यूएनएचआरसी : अफगानिस्तान में मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से सभी चिंतित, भारत अपने मित्रों की मदद को तैयार
यूएनएचआरसी के सत्र को संबोधित करते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने अफगानी नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान में अपने मित्रों की मदद के लिए तैयार है।
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अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि इंद्र मणि पांडेय ने यूएनएचआरसी के विशेष सत्र में मंगलवार को कहा कि हर कोई अफगान नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बढ़ते उल्लंघन से चिंतित है। अफगानी नागरिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या उनके सम्मान के साथ जीने के अधिकार का सम्मान किया जाएगा।
अफगानिस्तान के हालात को लेकर यूएनएचआरसी का यह सम्मेलन खासतौर पर बुलाया गया है। भारतीय प्रतिनिधि ने आगे कहा कि अफगानिस्तान के साथ हमारी सहस्राब्दी पुरानी दोस्ती लोगों के बीच संबंधों के मजबूत स्तंभों पर टिकी हुई है। भारत हमेशा शांतिपूर्ण, समृद्ध और प्रगतिशील अफगानिस्तान के लिए खड़ा रहा है। भारत अफगानिस्तान के अपने मित्रों की आकांक्षाओं को पूरा करने में उनकी सहायता करने के लिए तैयार है।
A special session of the UN Human Rights Council on #Afghanistan is underway in Geneva
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"The human rights system cannot and should not 'wait and see'. We need attention and action": Nasir Ahmad Andisha, Ambassador of the Islamic Republic of Afghanistan to UN Human Rights Council pic.twitter.com/nhwf3JQjN7
— ANI (@ANI) August 24, 2021
अफगानी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो
यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि इंद्र मणि पांडेय ने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रूप में हमें अफगानिस्तान के लोगों का पूरा समर्थन करना चाहिए और उनकी शांति, स्थिरता व सुरक्षा की आकांक्षा को पूरा करना चाहिए। अफगानी महिलाओं, बच्चों व अल्पसंख्यकों को शांति व गरिमा के साथ जीने का अवसर मिलना चाहिए।
पांडेय ने कहा कि अफगानिस्तान में व्यापक प्रतिनिधित्व आधारित सरकार के गठन से अधिक स्वीकार्यता और वैधता हासिल करने में मदद मिलेगी। हम उम्मीद करते हैं कि वहां एक समावेशी और व्यापक आधारित सरकार बनेगी, जो अफगान समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हो। अफगान महिलाओं की आवाज, अफगान बच्चों की आकांक्षाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
रुको व देखो वाली प्रणाली नहीं होना चाहिए : अफगान प्रतिनिधि
सत्र को संबोधित करते हुए अफगानिस्तान के राजदूत नासिर अहमद अंदिशा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रणाली 'रूको व देखो की नीति' पर आधारित नहीं होना चाहिए। हम विश्व का ध्यान व कार्रवाई चाहते हैं।