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फलस्तीनी इलाकों में इस्राइली बस्तियों पर अमेरिका के नए रुख पर खेदः संयुक्त राष्ट्र

Fri, 22 Nov 2019 02:12 AM IST
संजीव कुमार झा यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 22 Nov 2019 02:12 AM IST
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UN says, US new statement on Israeli settlements occupied in Palestinian territories is regrettable
इस्राइली बस्तियां - फोटो : un hindi samachar

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने कहा है कि इस्राइल द्वारा कब्जा हुए फलस्तीनी इलाकों में इस्राइली बस्तियां बसाए जाने पर यूएन के लंबे समय से चले आ रहे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। यूएन का स्पष्ट रूप से मानना है कि फलस्तीनी इलाकों में इस्राइली बस्तियों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

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अमेरिका ने हाल ही में इस संबंध में अपनी नीति बदले जाने की घोषणा की थी जिसके बाद यूएन प्रवक्ता ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से यह बात कही है।

यूएन प्रवक्ता ने कहा कि सोमवार को अमेरिका के इस नए रुख की घोषणा पर संयुक्त राष्ट्र को बहुत खेद है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यूएन प्रासंगिक प्रस्तावों के तहत दो राष्ट्र समाधान के लिए संकल्पित है।
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इससे पहले मंगलवार को जिनीवा में एक प्रेस वार्ता में यूएन मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने बताया कि किसी एक सदस्य देश की नीति में परिवर्तन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानून में बदलाव नहीं लाता और ना ही उस कानून की अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और यूएन सुरक्षा परिषद द्वारा की जाने वाली व्याख्या में।
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अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने नीति में बदलाव की घोषणा करते हुए कहा था कि नागरिक बस्तियों की स्थापना को अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना बताना काम नहीं आया है। उनके मुताबिक इससे शांति को आगे नहीं बढ़ाया जा सका है।

अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान की फलस्तीनी नेताओं और जॉर्डन की सरकार ने निंदा की थी लेकिन इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसका स्वागत किया था।

विदेश मंत्री पोम्पेयो के इस बयान को मीडिया रिपोर्टों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 को खारिज किए जाने के रूप में देखा गया है।

इस प्रस्ताव के तहत वर्ष 2016 में स्पष्ट किया गया था कि 1967 से कब्जा किए हुए फलस्तीनी इलाकों पर इस्राइल द्वारा बस्तियां बसाने को कानूनी मान्यता हासिल नहीं है और कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।

साथ ही इसे दो राष्ट्रों के एक साथ शांति व सुरक्षा से रहने में एक बड़ा अवरोध भी करार दिया गया था। सुरक्षा परिषद के 15 में से 14 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया था लेकिन अमेरिका ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

माइक पोम्पेयो द्वारा इस बयान के बाद येरुशलम में अमेरिकी दूतावास ने एक सुरक्षा अलर्ट जारी किया है जिसमें येरूशलम जा रहे, या वहां से होकर गुजर रहे अमेरिकी नागरिकों को उच्च सतर्कता बरतने के लिए आगाह किया गया है।

इस क्षेत्र में पहले से ही तनाव व्याप्त है। 28 अक्टूबर को मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के लिए विशेष समन्वयक ने बताया था कि क्षेत्र में खतरनाक संकेत उभर रहे हैं और  इस्राइली बस्तियों की बढ़ती संख्या शांति प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा है।
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