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UN Repot: श्रीलंका में आर्थिक संकट मानव अधिकारों के हनन और आर्थिक अपराधों का नतीजा, पढ़िये खास बातें
Wed, 07 Sep 2022 07:02 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,कोलंबो
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 07 Sep 2022 07:02 PM IST
सार
यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद सत्र के 51वें सत्र से पहले जारी की गई है। यह सत्र 12 सितंबर से सात अक्तूबर तक जिनेवा में होगा। इसमें श्रीलंका पर एक प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना है।
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श्रीलंका में आर्थिक संकट
- फोटो : Social media
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विस्तार
श्रीलंका में जबर्दस्त आर्थिक संकट को लेकर यूएन ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि यह संकट अतीत व वर्तमान में किए गए मानवाधिकारों के हनन और आर्थिक अपराधों की छूट का नतीजा है। इसी कारण इस द्वीप देश की तबाही हुई है।
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संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट द्वारा तैयार रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई। इसमें श्रीलंका की मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने और अतीत के मानवाधिकारों के उल्लंघन की पुनरावृत्ति से बचने के लिए कुछ मूलभूत बदलावों का भी सुझाव दिया गया था।
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यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद सत्र के 51वें सत्र से पहले जारी की गई है। यह सत्र 12 सितंबर से सात अक्तूबर तक जिनेवा में होगा। इसमें श्रीलंका पर एक प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना है। यह पहला मौका है जब संयुक्त राष्ट्र के अहम निकाय ने आर्थिक संकट को श्रीलंका के घोर मानवाधिकार हनन से जोड़ा है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में स्थायी सुधार के लिए श्रीलंका को उन अंतर्निहित कारणों को पहचानने और उन्हें दूर करने की जरूरत है, जिन्होंने यह संकट पैदा किया। इन कारणों में अतीत और वर्तमान में मानवाधिकारों के हनन, आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार के दोषियों को दंड से छूट शामिल हैं। बता दें, 1948 में आजादी के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है। यह संकट विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी से उत्पन्न हुआ था।
मुद्राकोष 2.9 अरब डॉलर की मदद को तैयार
पिछले हफ्ते आईएमएफ ने घोषणा की थी कि वह इस दिवालिया देश को आर्थिक संकट से निपटने और नागरिकों की आजीविका की रक्षा के लिए श्रीलंका को चार वर्षों में लगभग 2.9 अरब डॉलर का कर्ज देने को तैयार है। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका के सभी समुदाय देश में जवाबदेही के साथ लोकतांत्रिक सुधारों के पक्ष में हैं। ऐसे में भविष्य के लिए एक साझा और आम दृष्टिकोण अपनाते हुए सुधार किए जाने चाहिए।
रिपोर्ट में विक्रमसिंघे सरकार से कहा गया है कि वह कठोर सुरक्षा कानूनों को तुरंत खत्म करे और विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई रोके। विक्रमसिंघे ने तत्कालीन राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के देश से भाग जाने के बाद बागडोर संभाली थी। गोतबाया सरकार के खिलाफ देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया था। गोतबाया परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर लगाए गए थे।
अमेरिका ने श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन के लिए सहयोग देने पर हामी भरी
अमेरिका ने श्रीलंका की बीमार अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद करने पर सहमती दी है। इसके साथ ही अमेरिका ने 2.9 बिलियन अमरीकी डालर के बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ की ओर से निर्धारित शर्तों के अनुरुप श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन पर सहयोग करने पर भी हामी भरी है। अमेरिका की ओर से यह सहमति एक कर्मचारी स्तरीय समझौते के दौरान दी गई है।