UN Peacekeepers: माली में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के काफिले पर IED से हमला, तीन की मौत, पांच घायल
माली में संयुक्त राष्ट्र बहुआयामी एकीकृत स्थिरीकरण मिशन ने एक ट्विटर पोस्ट में कहा कि मंगलवार को MINUSMA के काफिले पर एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) से हमला किया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, तीन शांति सैनिकों की मौत हो गई और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
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दुनिया के सबसे खतरनाक संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन को मंगलवार (21 फरवरी) को झटका लगा। मध्य माली में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के सैनिकों के काफिले पर सड़क के किनारे बम फेंका गया। इस घटना में तीन शांति सैनिकों की मौत हो गई और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
माली में संयुक्त राष्ट्र बहुआयामी एकीकृत स्थिरीकरण मिशन ( Multidimensional Integrated Stabilization Mission) ने एक ट्विटर पोस्ट में कहा कि मंगलवार को MINUSMA के काफिले पर एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) से हमला किया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, तीन शांति सैनिकों की मौत हो गई और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
Central #Mali 🇲🇱. A MINUSMA Force convoy hit an Improvised Explosive Device #IED today, 21 February. According to preliminary reports, 3 #Peacekeepers lost their lives and 5 others are seriously injured. They are #NotATarget.
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More info to follow. #PK75#A4P pic.twitter.com/FSS6M7fk7E— MINUSMA (@UN_MINUSMA) February 21, 2023
ट्विटर पोस्ट में कहा गया है कि यह शुरुआती आंकड़े है। मारे गए और घायल हुए लोग किस देश के थे इसके बारे में अभी पता नहीं चल पाया है। माली 2012 में उत्तरी अलगाववादी आंदोलन के रूप में शुरू हुए संघर्ष से त्रस्त रहा है, लेकिन तब से देश के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में नियंत्रण के लिए लामबंद होने वाले लोग सशस्त्र समूहों की भीड़ में बदल गए हैं। इनकी लड़ाई बुर्किना फासो और पश्चिमि अफ्रीकी देश नाइजर सहित अन्य पड़ोसी देशों में फैल गई है और इस क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति ने मानवीय संकट को जन्म दिया है। कुछ सशस्त्र समूहों के अल-कायदा और आईएसआईएल (आईएसआईएस) से भी संबंध हैं।
माली में संयुक्त राष्ट्र मिशन की स्थापना 2013 में की गई थी। यह 13,500 से अधिक सैन्य कर्मियों और पुलिस के साथ संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी शांति स्थापना तैनाती में से एक है। लेकिन इसमें हताहत होने की दर बहुत अधिक है, खासकर सड़क के किनारे बम विस्फोट के कारण। अब तक करीब 281 शांति सैनिक मारे गए हैं।