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Syria: 'अपने नागरिकों को यातना देना बंद करे दमिश्क', कनाडा-नीदरलैंड के आरोपों पर UN की अदालत ICJ का फरमान
Thu, 16 Nov 2023 09:42 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हेग (नीदरलैंड)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हेग (नीदरलैंड)
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 16 Nov 2023 09:42 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी अदालत इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने सीरिया से कहा है कि दमिश्क में यातना के मामलों पर लगाम लगाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। नीदरलैंड और कनाडा ने दमिश्क में अपने ही नागरिकों पर अत्याचार के आरोप लगाए हैं।
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नीदरलैंड के हेग में अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत- इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने सीरियाई सरकार को यातना को रोकने के लिए "अपनी शक्तियों के भीतर सभी उपाय करने" का आदेश दिया है। नीदरलैंड और कनाडा ने दमिश्क पर वर्षों से अपने ही नागरिकों पर अत्याचार करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईसीजे ने गुरुवार को दमिश्क को यातना बंद करने का फरमान सुनाया।
आईसीजे के अंतरिम आदेश का मकसद यातना की आशंका से जूझ रहे नागरिकों समेत तमाम पीड़ितों की रक्षा करना है। सीरिया पर यातना समझौता (Torture convention) का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। अब जबकि मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में है, इस प्रक्रिया के पूरे होने में वर्षों लगने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के अध्यक्ष जोन ई डोनोग्यू ने कहा कि पैनल दमिश्क (सीरिया की राजधानी) को आदेश दे रहा है कि वह "यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के कृत्यों को रोकने के लिए अपनी शक्ति के भीतर सभी उपाय करे।" अदालत ने सीरिया से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि उसके अधिकारी, साथ ही कोई भी संगठन या व्यक्ति, जो उसके नियंत्रण, निर्देश या प्रभाव के अधीन हों, यातना या क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के अन्य कार्य न करें।
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ई डोनोग्यू ने कहा, अदालत ने दमिश्क को "विनाश को रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने और यातना के खिलाफ समझौते के दायरे में कृत्यों के आरोपों से संबंधित किसी भी सबूत के संरक्षण को सुनिश्चित करने" का आदेश दिया।
कनाडा और नीदरलैंड ने पिछले महीने अदालत से यातना पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देने का अनुरोध किया था। सीरिया ने अक्टूबर में सुनवाई का बहिष्कार किया। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि सीरिया आईसीजे के फरमान पर कैसे प्रतिक्रिया देगा।
बता दें कि सीरिया में संघर्ष करीब 12 साल पहले, मार्च 2011 में असद सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ। लेकिन प्रदर्शनकारियों पर सरकार की क्रूर कार्रवाई के बाद जल्द ही हालात, पूर्ण गृहयुद्ध में बदल गए। 2015 में विद्रोही समूहों के खिलाफ माहौल असद के पक्ष में बदल गया, जब रूस ने सीरिया के साथ-साथ ईरान और लेबनानी आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह को प्रमुख सैन्य सहायता प्रदान की।
पिछले महीने की सुनवाई में, कनाडाई सरकार की वकील टेरेसा क्रॉकेट ने अदालत से सीरिया पर एक बाध्यकारी आदेश लागू करने का आग्रह किया था। उन्होंने आगार किया था कि अगर सीरिया के हालात अनियंत्रित छोड़ दिए गए, तो सीरिया अत्याचार पर प्रतिबंध लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन जारी रखेगा।"
बता दें कि शीर्ष अदालत के आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं, लेकिन कार्यवाही में शामिल देश हमेशा इनका पालन नहीं करते हैं। पिछले साल, न्यायाधीशों ने एक अन्य मामले में ऐसा आदेश जारी किया था जिसमें मॉस्को से यूक्रेन में शत्रुता बंद करने का आह्वान किया गया था।
संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी अदालत- ICJ के आदेश गुरुवार को फ्रांसीसी न्यायिक अधिकारियों द्वारा युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों में कथित संलिप्तता के लिए सीरियाई राष्ट्रपति बशर असद, उनके भाई और दो सेना जनरलों के लिए अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी करने के एक दिन बाद आए।
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आईसीजे के अंतरिम आदेश का मकसद यातना की आशंका से जूझ रहे नागरिकों समेत तमाम पीड़ितों की रक्षा करना है। सीरिया पर यातना समझौता (Torture convention) का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। अब जबकि मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में है, इस प्रक्रिया के पूरे होने में वर्षों लगने की संभावना है।
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अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के अध्यक्ष जोन ई डोनोग्यू ने कहा कि पैनल दमिश्क (सीरिया की राजधानी) को आदेश दे रहा है कि वह "यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के कृत्यों को रोकने के लिए अपनी शक्ति के भीतर सभी उपाय करे।" अदालत ने सीरिया से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि उसके अधिकारी, साथ ही कोई भी संगठन या व्यक्ति, जो उसके नियंत्रण, निर्देश या प्रभाव के अधीन हों, यातना या क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के अन्य कार्य न करें।
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ई डोनोग्यू ने कहा, अदालत ने दमिश्क को "विनाश को रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने और यातना के खिलाफ समझौते के दायरे में कृत्यों के आरोपों से संबंधित किसी भी सबूत के संरक्षण को सुनिश्चित करने" का आदेश दिया।
कनाडा और नीदरलैंड ने पिछले महीने अदालत से यातना पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देने का अनुरोध किया था। सीरिया ने अक्टूबर में सुनवाई का बहिष्कार किया। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि सीरिया आईसीजे के फरमान पर कैसे प्रतिक्रिया देगा।
बता दें कि सीरिया में संघर्ष करीब 12 साल पहले, मार्च 2011 में असद सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ। लेकिन प्रदर्शनकारियों पर सरकार की क्रूर कार्रवाई के बाद जल्द ही हालात, पूर्ण गृहयुद्ध में बदल गए। 2015 में विद्रोही समूहों के खिलाफ माहौल असद के पक्ष में बदल गया, जब रूस ने सीरिया के साथ-साथ ईरान और लेबनानी आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह को प्रमुख सैन्य सहायता प्रदान की।
पिछले महीने की सुनवाई में, कनाडाई सरकार की वकील टेरेसा क्रॉकेट ने अदालत से सीरिया पर एक बाध्यकारी आदेश लागू करने का आग्रह किया था। उन्होंने आगार किया था कि अगर सीरिया के हालात अनियंत्रित छोड़ दिए गए, तो सीरिया अत्याचार पर प्रतिबंध लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन जारी रखेगा।"
बता दें कि शीर्ष अदालत के आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं, लेकिन कार्यवाही में शामिल देश हमेशा इनका पालन नहीं करते हैं। पिछले साल, न्यायाधीशों ने एक अन्य मामले में ऐसा आदेश जारी किया था जिसमें मॉस्को से यूक्रेन में शत्रुता बंद करने का आह्वान किया गया था।
संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी अदालत- ICJ के आदेश गुरुवार को फ्रांसीसी न्यायिक अधिकारियों द्वारा युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों में कथित संलिप्तता के लिए सीरियाई राष्ट्रपति बशर असद, उनके भाई और दो सेना जनरलों के लिए अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी करने के एक दिन बाद आए।