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Ukraine Crisis: यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस का दुनिया में बढ़ा प्रभाव, समर्थक देशों की संख्या बढ़ी

Sun, 02 Apr 2023 08:13 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 02 Apr 2023 08:13 PM IST
सार

ईआईयू की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस समर्थक देशों की श्रेणी में सबसे महत्त्वपूर्ण चीन है। लेकिन कई अन्य विकासशील देश (खास कर दक्षिण अफ्रीका, माली और बरकिना फासो) भी रूस के खेमे में चले गए हैं। रूस समर्थक देशों में दुनिया की 33 प्रतिशत आबादी रहती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका में रूस का प्रभाव बढ़ने के संकेत हैं। 

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Ukraine Crisis Russia influence in world increased after the war number of supporting countries increased
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। - फोटो : ANI

विस्तार

विकासशील देशों के बीच रूस का प्रभाव बढ़ रहा है। उन देशों में रूस की कूटनीतिक कोशिशें और प्रचार अभियान खासे सफल रहे हैं। इस बात का संकेत ब्रिटिश पत्रिका इकॉनमिस्ट से जुड़ी एजेंसी इकॉनमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट (ईआईयू) की एक रिपोर्ट से मिली है। कुछ रोज पहले जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद एक साल में दुनिया में कुल मिला कर रूस के लिए समर्थन बढ़ा है। खास कर ऐसा उन देशों में हुआ है, जो पहले से तटस्थ या गुटनिरपेक्ष रहने की नीति पर चलते रहे हैं।

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ईआईयू ने अपने अध्ययन के दौरान रूस पर प्रतिबंध के बारे में विभिन्न देशों के रुख, संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न देशों के मतदान, घरेलू राजनीतिक रुझान और सरकारी बयानों पर गौर किया। इसके अलावा रूस के साथ परंपरागत आर्थिक, राजनीतिक और सैनिक संबंधों के इतिहास पर भी ध्यान दिया गया। इस अध्ययन से सामने आया कि साल भर पहले रूस की तरफ स्पष्ट झुकाव रखने वाले देशों की संख्या 29 थी, जो अब 35 हो गई है। 
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ईआईयू की रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस समर्थक देशों की श्रेणी में सबसे महत्त्वपूर्ण चीन है। लेकिन कई अन्य विकासशील देश (खास कर दक्षिण अफ्रीका, माली और बरकिना फासो) भी रूस के खेमे में चले गए हैं। रूस समर्थक देशों में दुनिया की 33 प्रतिशत आबादी रहती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका में रूस का प्रभाव बढ़ने के संकेत हैं। 
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पर्यवेक्षकों के मुताबिक, यह ट्रेंड पश्चिमी देशों के लिए गहरी चिंता का विषय है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से इन देशों की कोशिश रूस को दुनिया में अलग-थलग करने की रही है। लेकिन ईआईयू की रिपोर्ट से जाहिर है कि इस कोशिश में उन्हें उन्हें कामयाबी नहीं मिली है। 

ईआईयू ने के मुताबिक, दुनिया में तटस्थ देशों की संख्या पिछले साल 32 थी, जो अब 35 हो गई  है। यानी तीन देश जो साल भर पहले रूस के विरोधी थे, अब उन्होंने बीच का रुख अपना लिया है। ईआईयू के मुताबिक तटस्थ देशों में दुनिया की 31 प्रतिशत आबादी रहती है। इस तरह दुनिया की 64 प्रतिशत आबादी उन देशों में रहती है, जो अब रूस का विरोध नहीं कर रहे हैं।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंबोडिया, तुर्किये और कतर जैसे देश पहले पश्चिम से जुड़े हुए थे। लेकिन अब वे तटस्थ हो गए हैं। उनकी सरकारें नए बने हालात में दोनों तरफ से फायदा उठाने की नीति पर चल रही हैं।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के समय रूस की दो टूक निंदा करने वाले देशों की संख्या 131 थी। यह अब घट कर 122 रह गई है। इनमें अमेरिका और यूरोपीय देश शामिल हैं। रूस की स्पष्ट निंदा करने वाले देशों में अब दुनिया की 36 प्रतिशत आबादी है। लेकिन इस समूह की ताकत यह है कि विश्व जीडीपी में उसका योगदान 68 प्रतिशत है। 


ईआईयू की ग्लोबल फॉरकास्टिंग डायरेक्टर अगाथे डेमारियस ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी से कहा कि रूसी प्रचार विकासशील देशों में बेहद सफल हो रहा है। उपनिवेश रह चुके देशों की भावनाओं का रूस लाभ उठा रहा है। इस प्रचार के जरिए यह भी बताया गया है कि पश्चिमी देशों ने विकासशील दुनिया में खाद्य असुरक्षा और ऊर्जा असुरक्षा पैदा की है।

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