यूक्रेन संकट: जो बाइडन की टीम सबूत मांग रही है और पुतिन अपनी चाल चल रहे हैं
मंगलवार को जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कॉल्ज मास्को गए थे। राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत के बाद उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की। स्कॉल्ज ने बाइडन के पास तक पुतिन का संदेश बताया। उन्होंने रूस की चिंताओं से अवगत कराया और कहा कि कोई युद्ध नहीं चाहता...
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बिना कोई जंग लड़े रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बड़ी सफलता पा ली है। वह अमेरिका और पश्चिमी देशों को रूस की चिंताओं को ध्यान में रखने के लिए मजबूर करने में सफल रहे हैं। इसी के साथ रूस के रक्षा मंत्रालय ने सैन्य अभ्यास पूरा होने के बाद सेना की टुकड़ी के यूक्रेन सीमा से बैरक में लौटने का दावा किया है। रूस के दावे पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, नाटो के प्रमुख जेंस स्टोलेनबर्ग सबूत मांग रहे हैं। ब्रिटेन ने ऐसे हालात को लेकर रूस पर प्रतिबंधों को कड़ा करने पर जोर दिया तो रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ब्रिटेन को चेताया है। दुनिया में यूक्रेन संकट पर उथल-पुथल अभी जारी है। इस दौरान चीन ने फिर अमेरिका पर आरोप लगाया है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से यूक्रेन के हालात पर चर्चा हुई। इस दौरान शी जिनपिंग ने मिंस्क समझौते का समर्थन किया। इसके साथ चीन ने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर युद्ध जैसी स्थिति को भड़काने के प्रयास का आरोप लगाया। चीन ने कहा कि रूस के यूक्रेन पर हमले की तारीख का बताना इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। चीन के रूस के साथ खड़े रहने को भी दुनिया में एक तरह के ध्रुवीकरण से जोड़ा जा रहा है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाराखोवा ने भी अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा रूस के यूक्रेन पर हमला करने की तारीख को बताना हास्यास्पद और मजाक कहा है। मारिया जाराखोवा ने कहा कि उनका देश शुरू से कहता आ रहा है कि उसकी यूक्रेन पर हमले की कोई योजना नहीं है। रूस ने सैनिकों की तैनाती रूटीन अभ्यास के तहत अपनी सीमा में की थी और इसका उसे पूरा हक है।
जर्मन चांसलर ने की बाइडन से बात
मंगलवार को जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कॉल्ज मास्को गए थे। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से बात की। स्कॉल्ज ने बाइडन के पास तक पुतिन का संदेश बताया। उन्होंने रूस की चिंताओं से अवगत कराया और कहा कि कोई युद्ध नहीं चाहता। तनाव और टकराव की स्थिति किसी के भी हित में नहीं है। इससे समझा जा रहा है कि रूस के यूक्रेन की सीमा पर 1.30 लाख सैनिकों की तैनाती के बाद एक बार फिर अमेरिका और रूस के बीच में शीतयुद्ध का दौर शुरू हो गया है।
ब्रिटेन ने रूस के पड़ोसी देश इस्तोनिया में नाटो को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। एक वास्तविकता यह भी है कि जिस तरह से धमक बरकरार रखकर व्लादिमीर पुतिन ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर बढ़त ली है, वह अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन की नीति पर कई सवाल खड़े कर रही है। इसलिए आगे न केवल कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आएगी, बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने वाली प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। रूस के एंटनोव सिलुनोव ने स्पष्ट किया कि रूस ऊर्जा क्षेत्र में वैकल्पिक रास्ते के लिए तैयार हैं। यह यूरोपीय देशों और यूक्रेन के लिए संकेत है।
यूक्रेन में साइबर हमले ने कर दिया सबको दंग
यूक्रेन में एक भयानक साइबर हमला हुआ। इस हमले के स्रोत की जांच चल रही है। यूक्रेन के विशेषज्ञों को भी अभी हमले के पीछे की ताकतों का पता नहीं चल पा रहा है। हालांकि यूक्रेन की साइबर सुरक्षा के वरिष्ठ अधिकारी इल्लया वित्युक ने इसके पीछे क्रेमलिन (रूस) का हाथ बताया है। लेकिन रूस ने इस हमले के पीछे अपनी भूमिका से साफ इनकार किया है। यूक्रेन पर हुए साइबर हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पारा काफी चढ़ा दिया था। इस हमले को अमेरिका और पश्चिम के देश यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले का प्रयास के तौर पर देख रहे थे। यूक्रेन में इसकी खबर तेजी से फैली थी और लोग तनाव में आने शुरू हो गए थे। हालांकि इस तरह के साइबर अटैक को कुछ विशेषज्ञ एक मनोवैज्ञानिक युद्ध पद्धति से भी जोड़कर देख रहे थे, लेकिन कुछ घंटे बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने की तरफ बढऩे लगी।
यूक्रेन पर रूस हमला करता तो कितने खतरनाक होते हालात?
दिल्ली में सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की कीमत 56 रुपये प्रति किग्रा के पार हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम, प्राकृतिक गैस के दाम भी तेजी से बढऩे शुरू हो चुके हैं। बदले में अमेरिका में मंहगाई 7.5 की दर को पार करने के लिए उतावली है और शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी जा रही है। यूरोप में औद्योगिक क्षेत्र से लेकर आम उपभोग में गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यह तो एक बानगी भर है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि रूस के यूक्रेन पर हमला होने के बाद बेतहाशा मंहगाई और विकासशील देशों के लिए संकट खड़ा हो सकता था। कच्चे तेल के दाम 100 डालर प्रति बैरल को पार कर सकते थे। इसके अलावा रूस के हमले की प्रतिक्रिया में हजारों लोगों के मारे जाने, यूरोप तक युद्ध का प्रभाव जाना तय था। इसकी विभीषिका दूसरे विश्वयुद्ध से कई गुना अधिक हो सकती थी।