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UK: ब्रिटेन की संसद से पास हुआ रवांडा शरणार्थी विधेयक, जानिए ऋषि सुनक सरकार के इस बिल पर क्यों हुआ विवाद
Tue, 23 Apr 2024 08:04 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 23 Apr 2024 08:04 AM IST
सार
साल 2022 में इस विधेयक को पेश किया गया था। हालांकि इस विधेयक को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हुई। जिसके बाद ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने इस विधेयक पर रोक लगा दी थी।
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ऋषि सुनक
- फोटो : ANI
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विस्तार
ब्रिटेन की संसद ने रवांडा शरणार्थी विधेयक को पारित कर दिया है। इस विधेयक के तहत ब्रिटेन की सरकार अवैध रूप से ब्रिटेन आने वाले लोगों को अफ्रीकी देश रवांडा भेजेगी। यह विधेयक बीते दो साल से अटका हुआ था और इसे अदालत में भी चुनौती दी गई। आखिरकार तमाम परेशानियों के बाद अब यह बिल कानून बनने वाला है। ब्रिटेन के गृह मंत्री जेम्स क्लेवरली ने बताया कि संसद से रवांडा विधेयक पारित हो गया है और कुछ ही दिनों में ये कानून बन जाएगा।
क्या है रवांडा शरणार्थी विधेयक और क्यों हो रहा था इसका विरोध
ब्रिटेन में अवैध रूप से आने वाले शरणार्थियों खासकर आपराधिक गैंग्स द्वारा छोटी नौकाओं में जिन लोगों को ब्रिटेन भेजा जाता था, उन्हें रोकने के लिए रवांडा शरणार्थी विधेयक लाया गया था। इस विधेयक के तहत अवैध रूप से ब्रिटेन आने वाले शरणार्थियों को ब्रिटेन की सरकार अफ्रीकी देश रवांडा भेजेगी। रवांडा ये शरणार्थी ब्रिटेन की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे। जिन लोगों के आवेदन स्वीकार हो जाएंगे, उन्हें ब्रिटेन बुलाकर नागरिकता दे दी जाएगी। वहीं जिन लोगों को आवेदन स्वीकार नहीं होंगे, वे या तो रवांडा में ही बसने के लिए आवेदन कर सकेंगे या फिर किसी तीसरे देश में शरण मांग सकेंगे।
नीति के तहत 1 जनवरी 2022 से अवैध रूप से ब्रिटेन आने वाले लोगों को रवांडा भेजा जाना शुरू किया जाना था। हालांकि अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। अब जब कानून संसद से पारित हो गया है तो माना जा रहा है कि जल्द ही रवांडा के लिए पहली उड़ान शुरू हो जाएगी। रवांडा बिल के तहत ब्रिटेन की सरकार ने रवांडा की सरकार के साथ प्रवासन संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत ब्रिटिश सरकार रवांडा को 2023 के अंत तक 24 करोड़ पाउंड का भुगतान कर चुकी है और पांच वर्षों के लिए यह कुल भुगतान 37 करोड़ पाउंड होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन, रवांडा भेजे गए हर व्यक्ति के लिए डेढ़ लाख पाउंड का भुगतान करेगा। अभी ब्रिटेन में शरणार्थियों पर सरकार सालाना चार अरब पाउंड खर्च करती है। संधि में कहा गया है कि एक स्वतंत्र निगरानी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि रवांडा अपने दायित्वों का अनुपालन करे।
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साल 2022 में इस विधेयक को पेश किया गया था। हालांकि इस विधेयक को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हुई। जिसके बाद ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने इस विधेयक पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जिन लोगों को नागरिकता नहीं मिलेगी, उन्हें वापस अपने मूल देश लौटना पड़ेगा और वहां उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर इस विधेयक को मानवाधिकारों के खिलाफ बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ब्रिटेन सरकार ने ही रवांडा में गैर न्यायिक हत्याओं, हिरासत में मौत और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए आलोचना की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद ब्रिटेन की सरकार सेफ्टी ऑफ रवांडा विधेयक पेश किया, जिसमें ब्रिटेन सरकार ने बताया कि रवांडा एक सुरक्षित देश है।
अभी भी कानूनी चुनौतियां नहीं हुई हैं खत्म
ब्रिटेन की संसद से रवांडा विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन अभी भी सरकार को इसे लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल इस विधेयक को यूरोपीय अदालत में चुनौती दी जा सकती है क्योंकि ब्रिटेन अभी भी यूरोपीय कन्वेंशन ऑन ह्युमन राइट्स का सदस्य देश है और यूरोपीय अदालत ने पहले भी इस विधेयक पर रोक लगाई थी। ऐसे में संभव है कि आगे भी यूरोपीय कोर्ट इसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड में प्रवासियों पर निगाह रखने वाली संस्था के अनुसार, साल 2022 में ही ब्रिटेन में अवैध रूप से आने वाले शरणार्थियों की संख्या 45,744 रही। साथ ही कुल शरणार्थियों की संख्या 7,45,000 रही। ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी भी इस विधेयक का विरोध कर रही है और एलान कर चुकी है कि अगर वे सत्ता में आए तो उनकी सरकार इस विधेयक को वापस ले लगी। ब्रिटेन में इस साल के अंत में आम चुनाव होने हैं।
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क्या है रवांडा शरणार्थी विधेयक और क्यों हो रहा था इसका विरोध
ब्रिटेन में अवैध रूप से आने वाले शरणार्थियों खासकर आपराधिक गैंग्स द्वारा छोटी नौकाओं में जिन लोगों को ब्रिटेन भेजा जाता था, उन्हें रोकने के लिए रवांडा शरणार्थी विधेयक लाया गया था। इस विधेयक के तहत अवैध रूप से ब्रिटेन आने वाले शरणार्थियों को ब्रिटेन की सरकार अफ्रीकी देश रवांडा भेजेगी। रवांडा ये शरणार्थी ब्रिटेन की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे। जिन लोगों के आवेदन स्वीकार हो जाएंगे, उन्हें ब्रिटेन बुलाकर नागरिकता दे दी जाएगी। वहीं जिन लोगों को आवेदन स्वीकार नहीं होंगे, वे या तो रवांडा में ही बसने के लिए आवेदन कर सकेंगे या फिर किसी तीसरे देश में शरण मांग सकेंगे।
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नीति के तहत 1 जनवरी 2022 से अवैध रूप से ब्रिटेन आने वाले लोगों को रवांडा भेजा जाना शुरू किया जाना था। हालांकि अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। अब जब कानून संसद से पारित हो गया है तो माना जा रहा है कि जल्द ही रवांडा के लिए पहली उड़ान शुरू हो जाएगी। रवांडा बिल के तहत ब्रिटेन की सरकार ने रवांडा की सरकार के साथ प्रवासन संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत ब्रिटिश सरकार रवांडा को 2023 के अंत तक 24 करोड़ पाउंड का भुगतान कर चुकी है और पांच वर्षों के लिए यह कुल भुगतान 37 करोड़ पाउंड होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन, रवांडा भेजे गए हर व्यक्ति के लिए डेढ़ लाख पाउंड का भुगतान करेगा। अभी ब्रिटेन में शरणार्थियों पर सरकार सालाना चार अरब पाउंड खर्च करती है। संधि में कहा गया है कि एक स्वतंत्र निगरानी समिति यह सुनिश्चित करेगी कि रवांडा अपने दायित्वों का अनुपालन करे।
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साल 2022 में इस विधेयक को पेश किया गया था। हालांकि इस विधेयक को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ याचिका दायर हुई। जिसके बाद ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने इस विधेयक पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जिन लोगों को नागरिकता नहीं मिलेगी, उन्हें वापस अपने मूल देश लौटना पड़ेगा और वहां उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर इस विधेयक को मानवाधिकारों के खिलाफ बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ब्रिटेन सरकार ने ही रवांडा में गैर न्यायिक हत्याओं, हिरासत में मौत और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए आलोचना की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद ब्रिटेन की सरकार सेफ्टी ऑफ रवांडा विधेयक पेश किया, जिसमें ब्रिटेन सरकार ने बताया कि रवांडा एक सुरक्षित देश है।
अभी भी कानूनी चुनौतियां नहीं हुई हैं खत्म
ब्रिटेन की संसद से रवांडा विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन अभी भी सरकार को इसे लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल इस विधेयक को यूरोपीय अदालत में चुनौती दी जा सकती है क्योंकि ब्रिटेन अभी भी यूरोपीय कन्वेंशन ऑन ह्युमन राइट्स का सदस्य देश है और यूरोपीय अदालत ने पहले भी इस विधेयक पर रोक लगाई थी। ऐसे में संभव है कि आगे भी यूरोपीय कोर्ट इसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड में प्रवासियों पर निगाह रखने वाली संस्था के अनुसार, साल 2022 में ही ब्रिटेन में अवैध रूप से आने वाले शरणार्थियों की संख्या 45,744 रही। साथ ही कुल शरणार्थियों की संख्या 7,45,000 रही। ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी भी इस विधेयक का विरोध कर रही है और एलान कर चुकी है कि अगर वे सत्ता में आए तो उनकी सरकार इस विधेयक को वापस ले लगी। ब्रिटेन में इस साल के अंत में आम चुनाव होने हैं।