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UAE: जनता के लिए मार्च से खुलेगा अबु धाबी का हिंदू मंदिर, 29 फरवरी तक VIP श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति
Tue, 27 Feb 2024 05:33 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अबु धाबी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अबु धाबी
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 27 Feb 2024 05:33 PM IST
सार
मंदिर के प्रवक्ता ने कहा कि एक मार्च से जनता मंदिर में दर्शन करने जा सकेंगे। पर्यटकों के लिए प्रत्येक सोमवार को मंदिर बंद रहेगा। मंदिर के निर्माण के लिए यूएई सरकार ने जमीन दान पर दिया था।
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अबु धाबी का बीएपीएस हिंदू मंदिर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अबु धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया था। अब एक मार्च से मंदिर का दरवाजा श्रद्धलुओं के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है। बोचासनवासी श्री अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) स्वामीनारायण संस्था का निर्माण अबु मुरीखाह, दुबई-अबू धाबी शेख जायद राजमार्ग पर अल रहबा के पास किया गया है। यह मंदिर 27 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है।
मार्च में जनता के लिए खुलेगा मंदिर का द्वार
मंदिर के प्रवक्ता ने कहा, "एक मार्च से जनता मंदिर में दर्शन करने जा सकेंगे। पर्यटकों के लिए प्रत्येक सोमवार को मंदिर बंद रहेगा।" करीबन 18 लाख ईंटों की मदद से बने यूएई के पहले हिंदू मंदिर के लिए भारत से गंगा और यमुना का पवित्र जल, राजस्थान का गुलाबी बलुआ पत्थर और लकड़ी के फर्नीचर का उपयोग किया गया है।
मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर का निर्माण प्राचीन निर्माण शैली के अनुसार किया गया है। मंदिर के निर्माण के लिए यूएई सरकार ने जमीन दान पर दिया था। बीएपीएस के अंतर्राष्ट्रीय संबंध प्रमुख स्वामी ब्रह्मविहरिदास ने बताया, "मंदिर के सात शिखरों पर देवताओं की मूर्तियां हैं, जिनमें भगवान राम, भगवान शिव, भगवान जगन्नाथ, भगवान कृष्ण, भगवान स्वामीनारायण (भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है), तिरूपति बालाजी और भगवान अयप्पा शामिल हैं।"
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पीएम मोदी द्वारा किया गया था मंदिर का उद्घाटन
मंदिर में महाभारत और रामायण के अलावा 15 अन्य कहानियों को भी दर्शाया गया है। इन कहानियों में माया, एज्टेक, मिस्र, अरबी, यूरोपीय, चीनी और अफ्रीकी सभ्यताएं शामिल हैं। मंदिर की बाहरी दीवारें भारत से लाए गए बलुआ पत्थर से निर्मित है।
बता दें कि इस भव्य मंदिर का उद्घाटन 14 फरवरी को पीएम मोदी के द्वारा किया गया था। उद्घाटन समारोह में 5,000 लोगों को आमंत्रित किया गया था। इसके बाद 15 से 29 फरवरी तक पहले से पंजीकरण कराने वाले विदेशी श्रद्धालुओं को मंदिर में आने की अनुमति दी गई है।
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मार्च में जनता के लिए खुलेगा मंदिर का द्वार
मंदिर के प्रवक्ता ने कहा, "एक मार्च से जनता मंदिर में दर्शन करने जा सकेंगे। पर्यटकों के लिए प्रत्येक सोमवार को मंदिर बंद रहेगा।" करीबन 18 लाख ईंटों की मदद से बने यूएई के पहले हिंदू मंदिर के लिए भारत से गंगा और यमुना का पवित्र जल, राजस्थान का गुलाबी बलुआ पत्थर और लकड़ी के फर्नीचर का उपयोग किया गया है।
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मंदिर के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर का निर्माण प्राचीन निर्माण शैली के अनुसार किया गया है। मंदिर के निर्माण के लिए यूएई सरकार ने जमीन दान पर दिया था। बीएपीएस के अंतर्राष्ट्रीय संबंध प्रमुख स्वामी ब्रह्मविहरिदास ने बताया, "मंदिर के सात शिखरों पर देवताओं की मूर्तियां हैं, जिनमें भगवान राम, भगवान शिव, भगवान जगन्नाथ, भगवान कृष्ण, भगवान स्वामीनारायण (भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है), तिरूपति बालाजी और भगवान अयप्पा शामिल हैं।"
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पीएम मोदी द्वारा किया गया था मंदिर का उद्घाटन
मंदिर में महाभारत और रामायण के अलावा 15 अन्य कहानियों को भी दर्शाया गया है। इन कहानियों में माया, एज्टेक, मिस्र, अरबी, यूरोपीय, चीनी और अफ्रीकी सभ्यताएं शामिल हैं। मंदिर की बाहरी दीवारें भारत से लाए गए बलुआ पत्थर से निर्मित है।
बता दें कि इस भव्य मंदिर का उद्घाटन 14 फरवरी को पीएम मोदी के द्वारा किया गया था। उद्घाटन समारोह में 5,000 लोगों को आमंत्रित किया गया था। इसके बाद 15 से 29 फरवरी तक पहले से पंजीकरण कराने वाले विदेशी श्रद्धालुओं को मंदिर में आने की अनुमति दी गई है।