ट्रंप ने जयशंकर-राजनाथ से मिलने के लिए तोड़ा प्रोटोकॉल, एच-1बी वीजा मुद्दे पर हुई चर्चा
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भारत और अमेरिका के बीच हुई टू प्लस टू वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मुलाकात पहले से तय नहीं थी। हालांकि, दोनों नेता राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए व्हाइट हाउस पहुंचे। ट्रंप ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए दोनों नेताओं के साथ ओवल ऑफिस में करीब 30 मिनट तक बैठक की।
आमतौर पर देखा जाता है कि राष्ट्राध्यक्ष दूसरे देश के राष्ट्रध्यक्ष के साथ ही बैठक करते हैं। बता दें कि अमेरिका में इससे पहले करीब 15 साल पहले राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने तत्कालीन विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा को व्हाइट हाउस में बैठक के लिए आमंत्रित किया था।
दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में विदेश मंत्री ने ट्रंप में भारतीय पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा के मुद्दे पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों के लिए एच-1बी वीजा की अहमियत समझाते हुए कहा कि अमेरिका को भारत से आने वाले प्रतिभा को नहीं रोकना चाहिए, क्योंकि यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए अहम है।
विदेश मंत्री ने ट्रंप से कहा कि यह दोनों देशों के बीच कूटनीतिक पुल के तौर पर काम करता है। वीजा के बदले नियमों का भारतीयों पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और कोई भी बेवजह का कानून उन्हें रोकने के लिए नहीं बनाया जाना चाहिए।
ट्रम्प प्रशासन जो अखबार में पढ़ रहा था, मैंने उससे ज्यादा स्पष्ट तस्वीर पेश की: जयशंकर
वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) में फॉरेन रिलेशन कमेटी के सामने नागरिकता संशोधन कानून पर अपना पक्ष रखा। जयशंकर ने कहा कि ट्रंप सरकार ने मुझेसे नागरिकता संशोधन कानून पर अपना नजरिया पेश करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि उनके अफसर जो अखबार में पढ़ रहे थे, मैंने कानून की उससे भी स्पष्ट तस्वीर उनके सामने पेश की।
अमेरिका चाहता है पाक आतंकवाद पर कार्रवाई करे: जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका के बीच दूसरी टू प्लस टू वार्ता के समापन के बाद कहा कि पाकिस्तान को लेकर ट्रंप प्रशासन का रुख बिलकुल स्पष्ट है और वह चाहता है कि इस्लामाबाद आतंकवादी समूहों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल, निरंतर एवं अपरिवर्तनीय कार्रवाई करे और यह सुनिश्चित करे कि आतंकवाद के लिए उसकी धरती का इस्तेमाल नहीं हो।
जयशंकर ने गुरुवार को यहां भारतीय पत्रकारों से कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में संभावनाओं और विषय वस्तु संबंधी विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि वार्ता में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और दक्षिण पूर्वी एशिया समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि हमने सुना कि पाकिस्तान के संबंध में अमेरिकी पक्ष का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उसका रुख यह है कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों के लिए उनके क्षेत्र का इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ तत्काल, निरंतर और अपरिवर्तनीय कार्रवाई करे।
अंतरिक्ष पर शोध संबंधी जानकारी, तकनीकी सहयोग पर लिए गए महत्वपूर्ण फैसले
विदेश मंत्री ने कहा कि वार्ता के दौरान अंतरिक्ष पर शोध संबंधी जानकारी, तकनीकी सहयोग और जल संसाधन प्रबंधन विषयों पर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने आपदा अनुकूल ढांचे संबंधी गठबंधन और हिंद-प्रशांत सागर पहल समेत भारत की कई पहलों का समर्थन किया है। हालांकि वार्ता मुख्य रूप से विदेश नीति, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों पर केंद्रित थी।
बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैन्य केंद्रीय कमान में भारतीय अधिकारियों की होगी तैनाती
जयशंकर ने बताया कि इस वार्ता में एक प्रमुख फैसला लिया गया है जिसके तहत बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैन्य केंद्रीय कमान में भारतीय अधिकारियों को तैनात जाएगा और संभव होगा तो विशेष अभियान कमान में भी भारतीय अधिकारियों को रखा जाएगा। दूसरी ओर, हिंद महासागर क्षेत्र में इंफर्मेशन फ्यूजन सेंटर में अमेरिकी अधिकारी को तैनात किया जाएगा।
गौरतलब हो कि अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने बुधवार को वाशिंगटन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मेजबानी की थी। जयशंकर और सिंह गुरुवार को अमेरिका से रवाना हुए। जयशंकर ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ भी बैठक की थी।