तुवालु ने चीन की विस्तारवाद नीति को दिया झटका, ठुकराई मदद, ताइवान के साथ हुआ खड़़ा
विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश चीन को महज 12 हजार की आबादी वाला एक छोटे देश ने झटका दिया है। प्रशांत महासागर में स्थित देश तुवालु ने चीन का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव ठुकरा दिया है। इससे चीन की विस्तारवादी नीति को करारा झटका लगा है।
तुवालु के विदेश मंत्री साइमन कोफ ने गुरुवार को बताया कि हाल ही में चीन ने तुवालु को उसकी समुद्री सीमा के पास कृत्रिम द्वीप बनाने का प्रस्ताव दिया था। चीन का कहना था कि जलवायु परिवर्तन के चलते प्रशांत महासागर का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उसके कृत्रिम द्वीप खतरे में पड़े तुवालु के लोगों के लिए मददगार साबित होंगे। लेकिन तुवालु ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
तुवालु के विदेश मंत्री साइमन कोफ ने ताइवान के लिए स्पष्ट रूप से समर्थन व्यक्त किया और कहा कि उनका देश प्रशांत क्षेत्र में ताइवान के शेष चार सहयोगियों को एकजुट करने के लिए एक समूह स्थापित करने के लिए काम कर रहा था।
कोफ ने ताइपेई में एक साक्षात्कार में कहा, तुवालु और ताइवान के राजनयिक संबंध सबसे मजबूत हैं। उन्हें चीन का प्रस्ताव क्षेत्र में ताइवान का प्रभाव कम करने की कोशिश जैसा लग रहा है। कोफ ने कहा कि ताइवान के समर्थन के लिए हम प्रशांत महासागर में अपने सहयोगी- मार्शल आइलैंड, पलाऊ, नौरू के साथ खड़े हैं। साथ में हम प्रशांत महासागर में चीन के प्रभाव से निपट सकेंगे। हम सहयोग की ताकत में विश्वास रखते हैं।
चीनी कंपनियों ने तुवालु के स्थानीय समुदाय को 40 करोड़ डॉलर (करीब 2870 करोड़ रुपए) में कृत्रिम द्वीप बनाने का प्रस्ताव दिया था। कोफे ने बताया कि, 'हम काफी समय से चीन के कर्ज के बारे में सुन रहे थे। चीन हमारे द्वीपों को खरीद कर उनमें सैन्य बेस बनाने के लिए बेताब है। यह चीजें हमें परेशान कर रही थीं।'