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महिला सुरक्षा पर प्रहार के खिलाफ टर्की में उठी जोरदार आवाजें, जानें इस बीच क्यों हो रही इस्तांबुल संधि की चर्चा

Mon, 22 Mar 2021 02:56 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 22 Mar 2021 02:56 PM IST
सार

विश्लेषकों ने इस विडंबना की तरफ ध्यान खींचा है कि महिलाओं पर हिंसा रोकने की ये संधि टर्की के शहर इस्तांबुल में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान संपन्न हुई थी। इसलिए इसे इस्तांबुल संधि कहा जाता है...

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Turkey President Recep Tayyip Erdogan quits istanbul treaty on violence against women
टर्की के राष्ट्रपति रजिब तैयिब अर्दोआन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

टर्की में राष्ट्रपति रजिब तैयिब अर्दोआन के खिलाफ फिर जन प्रदर्शनों की लहर उठी है। हालांकि पर्यवेक्षकों को आशा नहीं है कि इससे राष्ट्रपति की स्थिति पर कोई फर्क पड़ेगा या वे अपने प्रतिगामी नीतियों को बदलने के लिए तैयार होंगे, लेकिन विरोधियों ने अपनी मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का इरादा जताया है। विरोध की ताजा लहर महिला सुरक्षा संबंधी एक संधि से टर्की को निकालने के सरकार के फैसले को लेकर उठी है। सप्ताहांत में देश भर में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। विरोधियों ने अपना प्रतिरोध जारी रखने का एलान किया है। कई यूरोपीय देशों ने भी सरकार के ताजा कदम की आलोचना की है।

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पिछले हफ्ते आर्दोआन सरकार ने उस अंतरराष्ट्रीय संधि से टर्की को निकाल लिया, जिसका मकसद महिलाओं के खिलाफ हिंसा का मुकाबला करना है। देश की सिविल सोसाइटी संगठनों और महिला कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। सप्ताहांत में हुए प्रदर्शनों के दौरान लोगों ने उन महिलाओं की तस्वीरें ले रखी थीं, जिनकी हत्या कर दी गई थी। उन्होंने ध्यान दिलाया कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा टर्की में एक गंभीर समस्या है। पिछले महीने ही देश में एक डरावना वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक पति को अपनी पत्नी की बर्बरता से पिटाई करते दिखाया गया था।
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विश्लेषकों ने इस विडंबना की तरफ ध्यान खींचा है कि महिलाओं पर हिंसा रोकने की ये संधि टर्की के शहर इस्तांबुल में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान संपन्न हुई थी। इसलिए इसे इस्तांबुल संधि कहा जाता है। इस संधि में महिलाओं को लिंग आधारित हिंसा से बचाने के लिए कानूनी पैमाने तय किए गए थे। इस पर दस्तखत करने वाले देश उन मानकों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति आर्दोआन ने एक आदेश जारी कर एलान किया कि टर्की इस्तांबुल संधि से खुद को निकाल रहा है।
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महिला अधिकार संगठनों ने ध्यान दिलाया है कि पिछले दशक में टर्की में हत्या का शिकार हुई महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि इस्तांबुल संधि में तय मानकों पर अधिक सख्ती से अमल हो। लेकिन अब टर्की सरकार ने उन मानकों को लागू करने की बाध्यता से खुद को मुक्त कर लिया है। काउंसिल ऑफ यूरोप नामक संस्था ने आर्दोआन सरकार के इस फैसले को सदमा पहुंचाने वाला बताया है। ईयू ने कहा है कि इससे टर्की में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी। टर्की काउंसिल ऑफ यूरोप का सदस्य है। फ्रांस ने कहा है कि टर्की सरकार का ये फैसला पूरे यूरोप के लिए एक बुरा संकेत है। फ्रांस के यूरोपीय मामलों के मंत्री क्लेमेंट बाउन ने कहा कि टर्की में महिलाओं के अधिकारों में लगातार कमी चिंताजनक है।

विश्लेषकों का कहना है कि आर्दोआन ने अपने इस्लामी कट्टरपंथी समर्थकों को संतुष्ट करने के लिए ये कदम उठाया है। देश में आर्थिक मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। इस बीच आर्दोआन लगातार कट्टरपंथी नीतियों पर चलते हुए लोगों का ध्यान भटकाने में लगे रहे हैं। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि आर्दोआन ने पिछले साल इस्तांबुल संधि से हटने की बात की थी। अब उन्होंने ऐसा सचमुच कर दिया है।


टर्की के कट्टरपंथी इस्लामी समूहों की शिकायत रही है कि ये संधि टर्की के पारंपरिक ‘पारिवारिक उसूलों’ के खिलाफ है। इसमें लैंगिक समानता का समर्थन किया गया है और साथ ही यह समलैंगिक-ट्रांसजेंडर समुदायों का भी पक्ष लिया गया है। लेकिन महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि संधि से टर्की के हटने का असर यह होगा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ जाएगी। इससे ये संदेश जाएगा कि सरकार ऐसी हिंसा के खिलाफ नहीं है। आर्दोआन के प्रमुख विरोधी नेता और इस्तांबुल के मेयर एकरम इमामोगलू ने कहा है कि आर्दोआन ने अपनी सुरक्षा के लिए महिलाओं के उस संघर्ष की अनदेखी की है, जो वे वर्षों से चला रही हैं।

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