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Turkey Elections: निकाय चुनाव में एर्दोगन को लग सकता है झटका, मुख्य विपक्षी पार्टी ने बड़े शहरों में बनाई बढ़त
Mon, 01 Apr 2024 05:05 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्तांबुल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्तांबुल
Published by: जलज मिश्रा
Updated Mon, 01 Apr 2024 05:05 AM IST
सार
सीएचपी नेता ओजगुर ओजेल ने अपने समर्थकों से कहा कि जनता ने देश में एक नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने का फैसला किया है। जनता ने 22 साल पुरानी तस्वीर को बदलने और एक नए राजनीतिक माहौल का द्वार खोलने का फैसला किया है।
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तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन
- फोटो : ANI
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विस्तार
तुर्किये में नगर निकाय चुनाव में राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन को झटका लगा है। तुर्किये की मुख्य विपक्षी पार्टी जीत के करीब है। विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) ने प्रमुख शहरी क्षेत्रों पर बढ़त बनाई है। करीब 60 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती के बाद, सीएचपी के निवर्तमान मेयर एक्रेम इमामोग्लू ने इस्तांबुल में पार्टी का नेतृत्व किया। वहीं, अंकारा के निवर्तमान मेयर मंसूर यावस ने भी काफी अंतर से जीत हासिल की। सीएचपी देश के 81 प्रांतो में से 36 में आगे चल रही है।
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सीएचपी नेता ओजगुर ओजेल ने अपने समर्थकों से कहा कि जनता ने देश में एक नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करने का फैसला किया है। जनता ने 22 साल पुरानी तस्वीर को बदलने और एक नए राजनीतिक माहौल का द्वार खोलने का फैसला किया है।
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2019 में हुआ था स्थानीय चुनाव
एर्दोगन 2014 से तुर्की के राष्ट्रपति हैं। मई 2023 में हुए आम चुनाव में वह दोबारा जीतकर राष्ट्रपति बने। जीत के बाद दिए गए अपने भाषण में ही उन्होंने स्थानीय चुनावों का बिगुल बजा दिया था। हालांकि, साल 2019 में देश भर में हुआ पिछला स्थानीय चुनाव उनके लिए निराशाजनक रहा था। उनकी जस्टिस ऐंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) देश के तीन सबसे बड़े शहरों- इस्तांबुल, अंकारा और इजमीर में हार गई थी। प्रमुख प्रतिद्वंद्वी एक्रेम इमामोग्लू से इस्तांबुल हारना एर्दोगन के लिए बड़ा झटका था। इसके बाद साल 2023 में हुए चुनाव में बहुमत हासिल करके राष्ट्रपति बनकर एक बार फिर अपने विपक्षियों पर पलटवार किया।
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एर्दोगन के राजनीतिक करियर पर नजर
एर्दोगन ने राजनीतिक करियर की शुरुआत इस्तांबुल से ही की है। साल 1994 में तुर्की के पूर्व प्रधानमंत्री नेजमेट्टिन एरबाकां की वेलफेयर पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर एर्दोगन इस्तांबुल के मेयर चुने गए और 1998 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 2003 में प्रधानमंत्री बनकर इस पद पर तीन कार्यकाल बिताने के बाद 2014 में वह देश के राष्ट्रपति बने। वह कई मौकों पर कह चुके हैं कि जो भी इस्तांबुल जीतता है, वो तुर्किये को जीतता है।