US: ट्रंप ने मिडिल ईस्ट की कमान एडमिरल कूपर को दी, अफ्रीकी कमांड की जिम्मेदारी एयर फोर्स जनरल एंडरसन को सौंपी
ट्रंप ने मिडिल ईस्ट कमांडर के लिए नौसेना एडमिरल ब्रैड कूपर, अफ्रीका कमांड के लिए पहले एयर फोर्स जनरल डैगविन एंडरसन को नामित किया। कूपर के पास गहरा क्षेत्रीय अनुभव, एंडरसन अफ्रीका में अमेरिकी मिशन की नई दिशा देंगे।
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन ने मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में अमेरिकी सेनाओं की कमान के लिए किए बड़े नामांकन किए हैं। इस आधार पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेनाओं की कमान संभालने के लिए वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर को नामित किया है। अगर उनकी नियुक्ति पक्की होती है, तो यह दूसरी बार होगा जब नौसेना के किसी अधिकारी को इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य कमान (यूएस अफ्रीका कमांड ) की जिम्मेदारी लेने के लिए एयर फोर्स लेफ्टिनेंट जनरल डैगविन एंडरसन को भी नामित किया है।
मामले में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि ट्रंप ने अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य कमान (यूएस अफ्रीका कमांड ) की जिम्मेदारी लेने के लिए एयर फोर्स लेफ्टिनेंट जनरल डैगविन एंडरसन को भी नामित किया है। अगर एंडरसन की नियुक्ति होती है, तो वह इस पद को संभालने वाले पहले एयर फोर्स अधिकारी होंगे।
ब्रैड कूपर का अनुभव और पृष्ठभूमि
कूपर फिलहाल सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के डिप्टी कमांडर हैं और मिडिल ईस्ट में काम करने का उन्हें लंबा अनुभव है। उन्होंने इससे पहले करीब तीन साल तक बहरीन में अमेरिकी नौसेना की 5वीं फ्लीट का नेतृत्व किया। वहां उन्होंने बिना चालक दल वाले और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आधारित मिशन भी शुरू किए। उन्होंने यमन में ईरान समर्थित हौती विद्रोहियों के खिलाफ नौसैनिक अभियानों का भी नेतृत्व किया।
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महत्वपूर्ण भूमिका में बदलाव
CENTCOM अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमानों में से एक है, जो मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और पूर्वोत्तर अफ्रीका के 21 देशों में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशनों की निगरानी करती है। वर्तमान प्रमुख जनरल एरिक कुरिल्ला रिटायर होने वाले हैं। इससे पहले अधिकांश बार यह पद आर्मी या मरीन जनरल्स के पास रहा है।
डैगविन एंडरसन की पृष्ठभूमि
एंडरसन एयर फोर्स के अनुभवी पायलट हैं, जिन्होंने KC-135 टैंकर, C-130 ट्रांसपोर्ट और U-28A जैसे विशेष विमानों को उड़ाया है। उन्होंने 3,400 से अधिक घंटे की उड़ान भरी है, जिसमें 738 घंटे कॉम्बैट मिशन शामिल हैं। वे फिलहाल जॉइंट स्टाफ में डाइरेक्टर के पद पर हैं। उन्होंने पहले अफ्रीका में स्पेशल ऑपरेशन कमान भी संभाली थी।
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अफ्रीका कमान की भूमिका
गौरतलब है कि यूएस अफ्रीका कमांड की स्थापना 2007 में हुई थी और यह पूरे अफ्रीकी महाद्वीप को कवर करती है। इसका मुख्य काम आतंकवाद से लड़ने और स्थानीय सेनाओं को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है। इन दोनों नामांकनों से अमेरिका की सैन्य रणनीति में नई दिशा और संतुलन लाने की उम्मीद की जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब गाजा युद्ध और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर वैश्विक हलचल जारी है।