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क्या ट्रंप की जिद से भड़का संघर्ष?: ईरान पर हमला कहीं रणनीतिक भूल तो नहीं, US खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Tue, 10 Mar 2026 01:57 AM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Tue, 10 Mar 2026 01:57 AM IST
सार

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट में युद्ध से पहले ही कहा गया था कि सैन्य हस्तक्षेप से ईरान में सत्ता परिवर्तन संभव नहीं होगा। इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई शुरू की। रिपोर्ट में और भी कई खुलासे हुए। आइए, विस्तार से जानते हैं।

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Trump Iran war decision US intelligence report on iranian  leadership change analysis Middle East conflict
पश्चिम एशिया संकट - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए युद्ध को लेकर अब नए सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि युद्ध शुरू होने से पहले ही बताया गया थी कि सैन्य हस्तक्षेप से ईरान में सत्ता परिवर्तन संभव नहीं होगा। इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले का फैसला लिया। अब इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह युद्ध एक रणनीतिक भूल साबित हो सकता है।

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अमेरिकी खुफिया समुदाय के राष्ट्रीय खुफिया परिषद ने फरवरी में एक विस्तृत आकलन तैयार किया था। इसमें कहा गया था कि सीमित हवाई हमले या लंबे सैन्य अभियान से भी ईरान में नई सरकार बनने की संभावना बेहद कम है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि मौजूदा नेतृत्व को नुकसान पहुंचता है तब भी ईरान की सत्ता संरचना तुरंत नहीं टूटेगी और देश की राजनीतिक व्यवस्था खुद को बनाए रखने की कोशिश करेगी।
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क्या अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से ईरान की सत्ता बदल सकती थी?
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान में ऐसा कोई मजबूत और एकजुट विपक्षी गठबंधन मौजूद नहीं है जो मौजूदा नेतृत्व के खत्म होने के बाद सत्ता संभाल सके। यही कारण है कि रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि शीर्ष नेतृत्व को भी खत्म कर दिया जाए, तब भी देश में सत्ता परिवर्तन की स्थिति नहीं बनेगी। रिपोर्ट का निष्कर्ष यह था कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सत्ता की निरंतरता बनाए रखने की कोशिश करेगी।
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नेतृत्व खत्म होने पर ईरान की व्यवस्था क्या करती?
खुफिया आकलन में यह भी कहा गया था कि यदि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो जाती है तो भी ईरान की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था तुरंत नया नेतृत्व सामने लाकर सत्ता को स्थिर रखने की कोशिश करेगी। युद्ध की शुरुआत में खामेनेई की मौत के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, वह इसी आकलन से मेल खाता दिखा।


नए सुप्रीम लीडर के चयन से क्या संकेत मिला?
ईरान के प्रमुख धार्मिक नेताओं ने खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना। माना जा रहा है कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता से भी अधिक कठोर रुख रखने वाले नेता हैं। उनकी नियुक्ति को ईरान के सत्ता ढांचे की मजबूती और बाहरी दबाव के खिलाफ प्रतिरोध के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन ने युद्ध के क्या कारण बताए?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन ने ईरान पर हमलों के कई कारण बताए हैं। एक तरफ इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए जरूरी कदम बताया गया, तो दूसरी ओर संभावित बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को रोकने की कार्रवाई कहा गया। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध का उद्देश्य सत्ता परिवर्तन नहीं है, लेकिन ट्रंप कई बार यह भी कह चुके हैं कि वे ईरान में नया नेतृत्व देखना चाहते हैं। यह भी सामने आया है कि ट्रंप लंबे समय से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलनों को लेकर संदेह जताते रहे हैं। वे कई बार इन रिपोर्टों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं। यही वजह है कि इस खुफिया चेतावनी के बावजूद सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया।  


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