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RIC Troika: रूस-भारत-चीन के बीच त्रिपक्षीय सहयोग होगा मजबूत, मॉस्को की पहल का बीजिंग ने किया समर्थन
Thu, 17 Jul 2025 04:48 PM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंंग
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 17 Jul 2025 04:48 PM IST
सार
रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय समूह के बीच बातचीत काफी लंबे समय से रुकी थी। आरआईसी को लेकर रूस और चीन की रुचि हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर की एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन यात्रा के बाद बढ़ी है। अब रूस ने इसे दोबारा शुरू करने की पहल की है। इसका चीन ने भी समर्थन किया है।
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग।
- फोटो : ANI
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विस्तार
लंबे समय से रुके हुए रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय सहयोग को दोबारा शुरू करने की पहल हो रही है। रूस की इस पहल का चीन ने भी समर्थन किया है। चीन ने कहा कि यह त्रिपक्षीय सहयोग न केवल तीनों देशों के हित में है। बल्कि क्षेत्र और विश्व की सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी उचित है।
रूसी मीडिया ने रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको के हवाले से कहा कि मॉस्को आरआईसी प्रारूप की बहाली की उम्मीद करता है। हम मुद्दे पर बीजिंग और नई दिल्ली के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विषय दोनों के साथ हमारी बातचीत में हो रही है। हम इस प्रारूप को सफल बनाने में रुचि रखते हैं, क्योंकि ब्रिक्स के संस्थापकों के अलावा ये तीनों देश महत्वपूर्ण साझेदार हैं।
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उन्होंने कहा कि मेरी राय में इस सहयोगी रणनीतिक समूह का अभाव अनुचित लगता है। हम उम्मीद करते हैं कि देश आरआईसी के ढांचे के भीतर काम फिर से शुरू करने पर सहमत होंगे। इससे तीनों देशों के संबंध उस स्तर पर पहुंच जाएंगे जो उन्हें त्रिपक्षीय सहयोग में काम करने की अनुमति देता है।
इस पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को कहा कि चीन-रूस-भारत सहयोग न केवल तीनों देशों के संबंधित हितों की पूर्ति करता है, बल्कि क्षेत्र और विश्व में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और प्रगति को बनाए रखने में भी मदद करता है। चीन त्रिपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए रूस और भारत के साथ संवाद बनाए रखने के लिए तैयार है।
ये भी पढ़ें: यूक्रेन की जेलेंस्की सरकार में बड़ा फेरबदल, यूलिया स्विरीडेन्को को बनाया पीएम; नई टीम के चेहरे कौन?
आरआईसी को लेकर रूस और चीन की रुचि हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर की एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन यात्रा के बाद बढ़ी है। इस दौरान जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सहित शीर्ष चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत की थी। लावरोव ने पिछले साल कहा था कि आरआईसी प्रारूप में संयुक्त कार्य पहले कोरोना वायरस के कारण और बाद में 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य गतिरोध के कारण रुक गया था।
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रूसी मीडिया ने रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको के हवाले से कहा कि मॉस्को आरआईसी प्रारूप की बहाली की उम्मीद करता है। हम मुद्दे पर बीजिंग और नई दिल्ली के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विषय दोनों के साथ हमारी बातचीत में हो रही है। हम इस प्रारूप को सफल बनाने में रुचि रखते हैं, क्योंकि ब्रिक्स के संस्थापकों के अलावा ये तीनों देश महत्वपूर्ण साझेदार हैं।
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उन्होंने कहा कि मेरी राय में इस सहयोगी रणनीतिक समूह का अभाव अनुचित लगता है। हम उम्मीद करते हैं कि देश आरआईसी के ढांचे के भीतर काम फिर से शुरू करने पर सहमत होंगे। इससे तीनों देशों के संबंध उस स्तर पर पहुंच जाएंगे जो उन्हें त्रिपक्षीय सहयोग में काम करने की अनुमति देता है।
इस पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को कहा कि चीन-रूस-भारत सहयोग न केवल तीनों देशों के संबंधित हितों की पूर्ति करता है, बल्कि क्षेत्र और विश्व में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और प्रगति को बनाए रखने में भी मदद करता है। चीन त्रिपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए रूस और भारत के साथ संवाद बनाए रखने के लिए तैयार है।
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आरआईसी को लेकर रूस और चीन की रुचि हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर की एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन यात्रा के बाद बढ़ी है। इस दौरान जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सहित शीर्ष चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत की थी। लावरोव ने पिछले साल कहा था कि आरआईसी प्रारूप में संयुक्त कार्य पहले कोरोना वायरस के कारण और बाद में 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य गतिरोध के कारण रुक गया था।
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