Toque Macaque Monkeys: श्रीलंका और चीन के बीच आ खड़ा हुआ ‘मंकी बिजनेस’, एक लाख बंदर बेचने का करार!
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विस्तार
श्रीलंका और चीन में टोक मकाक बंदरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। टोक मकाक बंदर सिर्फ श्रीलंका में पाए जाते हैं। लाल-भूरे रंग के इन बंदरों को स्थानीय भाषा में रिलेवा भी कहा जाता है। श्रीलंका सरकार ने दावा किया था कि चीन श्रीलंका से एक लाख टोक मकाक बंदरों के आयात के लिए राजी हुआ है। लेकिन चीन ने बुधवार को इस खबर का खंडन कर दिया। उसने कहा कि यह खबर पूरी तरह से गलत है।
श्रीलंकाई मीडिया में इस घटना पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि दोनों देशों के बीच ‘मंकी बिजनेस’ की दिक्कत आ गई है। ये मामला श्रीलंका के कृषि मंत्री महिंदा अमरावीरा की चीन यात्रा के बाद सामने आया। बताया जाता है कि चीन यात्रा के दौरान अमरावीरा ने चीन के वन-जीव संरक्षण विभाग से जुड़े नेशनल जूलॉजिकल गार्डेन्स के सामने एक बिजनेस प्रस्ताव रखा था। बताया जाता है कि चीन के कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उनकी इस मामले में बातचीत भी हुई थी।
बाद में अमरावीरा ने बताया कि इस बारे में एक समिति के गठन के लिए उन्होंने श्रीलंका मंत्रिमंडल के सामने एक प्रस्ताव रखा है। लेकिन मंत्रिमंडल के प्रवक्ता बांदुला गुनावर्धने ने मंगलवार को खंडन किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव रखा गया है। इस बीच कई पशु अधिकार और पर्यावरणवादी संगठनों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि इन बंदरों को ले जाने की शर्तों के बारे में चीन के प्रस्ताव का बिना पूरा अध्ययन किए श्रीलंका सरकार ने यह फैसला कर लिया है।
अब कोलंबो स्थित चीन के दूतावास ने एक बयान में इस पूरी खबर का ही खंडन कर दिया है। दूतावास ने लुप्त होती टोक मकाक प्रजाति के एक लाख बंदरों के श्रीलंका से चीन को निर्यात होने संबंधी ‘स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई हालिया खबरों को दुष्प्रचार’ करार दिया। कुछ खबरों में कहा गया था कि इन बंदरों का निर्यात एक प्राइवेट चीनी कंपनी को किया जाएगा, जो इन बंदरों का इस्तेमाल प्रायोगिक मकसदों से करेगी।
चीनी दूतावास ने कहा कि उसने इस संबंध में बीजिंग स्थित सभी संबंधित अधिकारियों से इन खबरों की पड़ताल की है। बयान में कहा गया- वन्य जीवों और पौधों के आयात निर्यात की निगरानी और प्रबंधन करने वाली प्रमुख एजेंसी चीन की नेशनल फॉरेस्ट्री और ग्रासलैंड प्रशासन है। उसने दो टूक कहा है कि उसे बंदरों के ऐसे किसी सौदे के बारे में जानकारी नहीं है। उसे किसी स्रोत से इसके लिए आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
श्रीलंका सरकार के एक सूत्र ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम को बताया कि उसे इस बारे में चीन और श्रीलंका के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत की जानकारी है। यह प्रस्ताव सबसे पहले श्रीलंका की तरफ से रखा गया। बाद में अमरावीरा को यह जानकारी दी गई कि चीनी पक्ष टोक मकाक बंदरों के आयात में दिलचस्पी दिखा रहा है। इसके बाद अमरावीरा ने कहा था कि ये बंदर श्रीलंका में बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने बंदरों के निर्यात का विरोध करने वाले पर्यावरणवादी संगठनों की कड़ी आलोचना भी की थी।