चीन: आखिर क्या है शी जिनपिंग की नई ‘विश्व सुरक्षा पहल’ की सच्चाई?
आलोचकों का कहना है कि इसके जरिए शी ने दुनिया का एक ऐसा ढांचा तैयार करने की महत्त्वाकांक्षा दिखाई है, जिसके केंद्र में चीन होगा। शी ने ‘अविभाज्य सुरक्षा’ की अवधारणा पेश की। इसका मतलब यह समझा गया है कि दुनिया में किसी देश को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे किसी दूसरे देश को अपनी सुरक्षा खतरे में महसूस हो...
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई वैश्विक सुरक्षा पहल (ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव) पर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। विश्व मीडिया में शी के गुरुवार को दिए उस भाषण की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई है, जिसमें उन्होंने ये पहल सामने रखी। शी ने ये भाषण बोआओ फोरम फॉर एशिया के वार्षिक सम्मेलन मे दिया। इस फोरम को हर साल दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की तर्ज पर चीन आयोजित करता है।
आलोचकों का कहना है कि इसके जरिए शी ने दुनिया का एक ऐसा ढांचा तैयार करने की महत्त्वाकांक्षा दिखाई है, जिसके केंद्र में चीन होगा। शी ने ‘अविभाज्य सुरक्षा’ की अवधारणा पेश की। इसका मतलब यह समझा गया है कि दुनिया में किसी देश को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे किसी दूसरे देश को अपनी सुरक्षा खतरे में महसूस हो।
चीन को बताया सर्व-प्रमुख शक्ति
शी ने अपने भाषण में बार-बार एशिया की बढ़ती ताकत का जिक्र किया। उन्होंने कहा- ‘जरूरत इस बात की है कि हम लगातार एशिया की अंतर्शक्ति, बुद्धि और बल को बढ़ाने का प्रयास करते रहें और एशिया को विश्व शांति का आधार, विश्व विकास का पावरहाउस (शक्ति केंद्र), और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नया गति-निर्धारक बनाएं।’ इसके साथ ही उन्होंने चीनी अर्थव्यवस्था की ताकतों का भी जिक्र किया। कहा कि महामारी के बाद विश्व अर्थव्यवस्था को संकट से निकालने मे चीन पूरी भूमिका निभाएगा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन टिप्पणियों से साफ है कि शी ने चीन को दुनिया सर्व-प्रमुख शक्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने शी के भाषण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि चीन ने उन्हीं बातों को दोहरा दिया है, जिसे क्रेमलिन कहता रहा है। उनमें "अविभाज्य सुरक्षा" की अवधारणा भी है। प्राइस ने कहा कि अमेरिका ‘नियम आधारित विश्व व्यवस्था’ की रक्षा करना जारी रखेगा, जिसे उसने अपने सहयोगी देशों के साथ मिल कर तैयार किया है।
विश्लेषकों के मुताबिक यह पहला मौका है, जब चीन ने "अविभाज्य सुरक्षा" की बात की है। एशिया में अमेरिकी कदमों के लिए इसके नतीजे हो सकते हैं। सिंगापुर स्थित एस राजाररत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर ली मिन्गजियांग एक समाचार एजेंसी से कहा- अगर चीन ने ताइवान या दक्षिण चीन सागर से संबंधित अमेरिका या उसके सहयोगी देशों के किसी कदम के बारे में माना कि यह उसकी सुरक्षा के खिलाफ है, तो मुमकिन है कि वह अविभाज्य सुरक्षा की अवधारणा लागू कर दे। इसके आधार पर वह दावा कर सकता है कि उसे जवाबी कार्रवाई करने का नैतिक अधिकार है।
अमेरिका ने की विश्व अर्थव्यवस्था की अनदेखी
वहीं विकासशील देशों में शी की ताजा पहल को लेकर सकारात्मक राय देखने को मिली है। ब्राजील में राष्ट्रपति के आर्थिक सलाहकार रह चुकीं अलेसांद्रो गोलोमबिउस्की टिक्सीरा के मुताबिक रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से वैश्विक सुरक्षा की नई पहल का संदर्भ बना है। उन्होंने कहा- "अमेरिका ने रूस को घेरने के कदम उठाए हैं। लेकिन इस दौरान उसने इसकी चिंता नहीं की है कि उसके कदमों का विश्व अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा। जबकि अमेरिका और चीन जैसे अग्रणी देशों पर यह जिम्मेदारी है कि वे सिर्फ अपना न सोचें, बल्कि विश्व स्थिति का भी ख्याल रखें।"
सिंगापुर के पूर्व राजनयिक और अब नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में सीनियर फेलॉ किशोर महबूबानी ने कहा कि शी ने बहुपक्षीय पहल और सहयोग पर जोर दिया है। इस तरह उन्होंने विभिन्न समूहों में टकराव को खत्म करने की जरूरत बताई है। महबूबानी ने शी की इस टिप्पणी को महत्त्वपूर्ण बताया कि दुनिया को गुटों में बंटने और शीत युद्ध की मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है।