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Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन के युद्धबंदियों की रिहाई के लिए संघर्ष, कैदियों की घर वापसी की आस आज भी बरकरार

Sun, 06 Apr 2025 11:14 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 06 Apr 2025 11:14 AM IST
सार

तीन साल पहले रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध में लाखों लोग बलि चढ़ गए। कितनों की तो जान चली गई तो कई लोगों को झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। स्थिति ये है कि आज भी युद्धबंदियों की रिहाई के लिए दोनों देशों में संघर्ष जारी है। दूसरी ओर युद्धबंदियों में भी अपनी रिहाई को लेकर आस बरकरार है। 

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Thousands of Ukrainian civilians still held by Russia with uncertain hope of release World News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में सैकड़ो घर तबाह हो गए। हजारों लोगों को हिरासत में ले लिया गया, लेकिन आज भी हजारों यूक्रेनी नागरिकों के घर के दरवाजे और उनरे परिवार के सदस्य उनका इंतजार कर रहे है। ऐसी ही एक घटना है जब लगभग दो साल पहले कोस्टियनटीन जिनोवकिन की मां ने अपने घर का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनी, तो उन्हें लगा कि उनका बेटा घर लौट आया है क्योंकि वह कुछ भूल गया था। लेकिन इसके बजाय, कुछ रूसी सैनिक जो बैलेक्लाव पहने हुए थे मेलिटोपोल में उनके अपार्टमेंट में घुस आए। बता दें कि यह शहर दक्षिणी यूक्रेन में है और रूसी सेना द्वारा कब्जा किया गया है।

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जिनोवकिन की रिहाई के उम्मीद में उनकी मां
एक छोठे से उल्लंघन में हिरासत में लिए गए जिनोवकिन की जल्दी रिहा होने की उम्मीद थी। इसके बावजूद, जिनोवकिन को रिहा नहीं किया गया। हालांकि  लेकिन उनकी पत्नी लिउसिएना ने बताया कि उन्होंने जिनोवकिन के घर की ऐसी तलाशी ली कि घर को अणुओं में तोड़ दिया, क्योंकि मई 2023 में उनकी गिरफ्तारी के कुछ हफ़्तों बाद, रूसी अधिकारियों ने उनकी मां से कहा कि वह एक आतंकवादी हमले की साजिश रच रहे थे। अब उन पर ऐसे आरोप लग रहे हैं, जिनका उनका परिवार विरोध कर रहा है और उन्हें बेतुका मानता है।

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रूसी कैद में बंद है ऐसे हजारों जिनोवकिन
जिनोवकिन की कहानी कोई अलग नहीं है। कोस्टियनटीन जिनोवकिन रूस की कैद में एक ऐसे हजारों नागरिकों में से हैं, जिन्हें हिरासत में लिया गया है। हालांकि इस मामले में अब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का कहना है कि युद्धबंदियों की रिहाई और उनके साथ समझौता युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि, इस मुद्दे को अभी तक रूस और यूक्रेन के बीच अमेरिकी वार्ता में ज्यादा महत्व नहीं मिला है।



पीपल फर्स्ट जैसे अभियान भी रहे असफल
लगातार जारी संघर्ष के बीच एक अवाजा युद्धविराम की उठी। इसके चलते बीते जनवरी में, यूक्रेनी और रूसी अधिकार समूहों ने पीपल फर्स्ट अभियान शुरू किया, जिसमें यह कहा गया कि किसी भी शांति समझौते में उन सभी लोगों की रिहाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिन्हें बंदी बनाया गया है। इनमें युद्ध के विरोध में जेल में बंद रूसी नागरिक और अवैध रूप से निर्वासित यूक्रेनी बच्चे शामिल हैं।

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जेल में कितने यूक्रेनी अंदाजा लगाना कठिन
हां एक बात ये भी है कि युद्ध के बढ़ते प्रकोप के साथ ही रूस ने यूक्रेन के अधिकतर हिस्सों पर कब्जा कर लिया। इससे साफ है कि इस बात का अंदाजा नहीं है कि कितने यूक्रेनी नागरिक हिरासत में हैं, चाहे वह कब्जे वाले क्षेत्रों में हों या रूस में। यूक्रेन के मानवाधिकार लोकपाल, दिमित्रो लुबिनेट्स ने अनुमान लगाया है कि 20,000 से ज्यादा लोग हिरासत में हैं। साथ ही मतविचुक का कहना है कि उनके समूह को नागरिक बंदियों की मदद के लिए 4,000 से ज्यादा अनुरोध मिले हैं। उनका कहना है कि युद्ध में गैर-लड़ाकों को हिरासत में रखना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

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