फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   The reason for Corona vaccine delay has been attributed to the European Union approval process

कोरोना टीकाकरण में कैसे इतना पिछड़ गया यूरोप? ये है वजह

Sat, 30 Jan 2021 03:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 30 Jan 2021 03:50 PM IST
सार

ईयू ने यह शर्त भी शामिल की है कि अगर टीके का कोई खराब असर हुआ, तो उसके लिए टीका बनाने वाली कंपनी को जवाबदेह ठहराया जाएगा...

विज्ञापन
The reason for Corona vaccine delay has been attributed to the European Union approval process
यूरोपीय संघ - फोटो : pixabay

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के देशों में इसे लेकर बहुत बेचैनी है कि जहां दूसरे धनी देश कोरोना वायरस की रोकथाम के टीकाकरण में काफी आगे निकल गए हैं, वहीं यूरोपीय देश काफी पिछड़े हुए दिख रहे हैं। ऐसा इसके बावजूद हुआ कि यूरोपीय आयोग ने टीका तैयार करने वाली कंपनियों से करार करने में काफी फुर्ती दिखाई थी। आयोग ने छह कंपनियों से दो अरब टीकों के लिए अनुबंध किया है। उसने इस साल गर्मी आने तक यूरोप की 70 फीसदी आबादी को टीका लगवा देने का लक्ष्य घोषित किया था। लेकिन टीकाकरण इस लक्ष्य के लिहाज से आगे नहीं बढ़ रहा है।

विज्ञापन


जहां ब्रिटेन में प्रति 100 व्यक्तियों पर अब तक 11 को टीका लग चुका है और अमेरिका में ये संख्या 7.9 है, ईयू के देशों में ये तादाद बहुत कम है। मसलन, अब तक जर्मनी में हर 100 व्यक्ति में से 2.6 को, इटली में 2.8, और फ्रांस में 1.8 व्यक्ति को ही टीका लगाया जा सका है। ये आंकड़े ऑवर वर्ल्ड इन डेटा नाम की एजेंसी ने उपलब्ध कराए हैँ। इस निराशाजनक आंकड़ों के कारण ईयू को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि अगर टीका बनाने वाली कंपनियों से वैक्सीन की डोज की सप्लाई संबंधी बेहतर शर्तें अनुबंध में शामिल कराई गई होतीं, तो ये हालत नहीं होती।
विज्ञापन


लेकिन कंपनियों का कहना है कि ईयू ने वैक्सीन को हरी झंडी देने में ब्रिटेन और अमेरिका की तुलना में ज्यादा देर लगाई। ब्रिटेन ने फाइजर/बायोएनटेक कंपनी की वैक्सीन को 2 दिसंबर को ही हरी झंडी दे दी। एक हफ्ते बाद अमेरिका में भी इसे मंजूरी दे दी गई। लेकिन यूरोपियन मेडिसीन एजेंसी ने 21 दिसंबर को जाकर इसे हरी झंडी दी। ईयू क्षेत्र में टीकाकरण इसके भी एक हफ्ते बाद जाकर शुरू हो पाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस देरी की वजह ईयू की मंजूरी प्रक्रिया को बताया गया है। ईयू की एजेंसी तभी टीके को मंजूरी दे सकती थी, जब इसके सभी 27 सदस्य देशों से उसे इस बारे में सूचना मिल जाती। फिर ईयू ने यह शर्त भी शामिल की है कि अगर टीके का कोई खराब असर हुआ, तो उसके लिए टीका बनाने वाली कंपनी को जवाबदेह ठहराया जाएगा। ईयू के नेताओं का कहना है कि ऐसी शर्त शामिल करके वे लोगों में भरोसा पैदा करना चाहते थे। लेकिन इस प्रक्रिया में कंपनियों से अनुबंध को अंतिम रूप देने में देर हुई।

अनुबंध करने में देरी को लेकर हो रही आलोचना पर ईयू की स्वास्थ्य आयुक्त स्टेला किरियाकिडेस ने कहा कि यूरोपीय आयोग ने इस विचार को खारिज कर दिया है कि किसी देश ने पहले हरी झंडी दे दी, तो उसे वैक्सीन की सप्लाई भी पहले होनी चाहिए। जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां उत्पादन तभी शुरू करती हैं, जब उनका बिक्री के लिए अनुबंध पक्का हो चुका होता है। ऐसे में एक या दो हफ्ते की देर भी बहुत अहम हो जाती है।

ईयू ने फाइजर कंपनी से 30 करोड़ अतिरिक्त वैक्सीन की खरीद का अनुबंध इसी महीने किया है। इसके पहले उसने 60 करोड़ वैक्सीन की खरीद का अनुबंध इस कंपनी से किया था। अब फाइजर के बाद यूरोप से उतना ऑर्डर है, जिसके मुताबिक 2021 में अपने कुल उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा उसे यूरोप को देना होगा। ब्लूमबर्ग के मुताबिक ईयू ने वैक्सीन की खरीद के लिए 2.7 अरब यूरो का बजट अब तक मंजूर किया है। जबकि अमेरिका 18 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। इसलिए कई विशेषज्ञों का कहना है कि ईयू ने वैक्सीन पर पर्याप्त रकम खर्च नहीं की है। इस बीच ईयू का एस्ट्राजेनेका जैसी कंपनी के साथ विवाद भी खड़ा हुआ है।


विशेषज्ञों का कहना है कि कुल मिलाकर कोरोना टीकाकरण को लेकर ईयू की प्रतिक्रिया सुस्त और नाकाफी रही है। नतीजा यह है कि यहां महामारी फैलती चली गई है। हालात कब सुधरेंगे, इस बारे में अभी कोई कुछ कहने की हालत में नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed