फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   The National Convention of the United Marxist-Leninist clearly shows that former Prime Minister KP Sharma Oli is the strongest leader of this party

नेपाल: सीपीएन-यूएमएल मतलब अब केपी शर्मा ओली, व्यक्ति केंद्रित हुई पार्टी!

Wed, 01 Dec 2021 05:08 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 01 Dec 2021 05:08 PM IST
सार

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चितवन में हुए इस अधिवेशन के बाद यूएमएल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब यह एक व्यक्ति केंद्रित पार्टी के रूप में नजर आ रही है। इस अधिवेशन से यह संकेत मिला कि अब इस पार्टी में असहमति या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए ज्यादा जगह नहीं बची है...

विज्ञापन
The National Convention of the United Marxist-Leninist clearly shows that former Prime Minister KP Sharma Oli is the strongest leader of this party
केपी शर्मा ओली - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) के पिछले हफ्ते हुए राष्ट्रीय अधिवेशन ने यह साफ कर दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस पार्टी के सबसे मजबूत नेता हैँ। इस लिहाज से देश की राजनीति में उनकी अभी भी मजबूत हैसियत है। अगले साल होने वाले आम चुनाव में वे प्रधानमंत्री पद के एक प्रमुख दावेदार होंगे।

विज्ञापन

खास पदों पर बैठाए वफादार

पर्यवेक्षकों के मुताबिक खास बात सिर्फ यह नहीं है कि ओली एक बार फिर से सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष चुन लिए गए। बल्कि उससे भी ज्यादा दूरमागी महत्त्व वाली बात यह है कि वे पार्टी के तमाम खास पदों पर अपने वफादार लोगों को बैठाने में वे सफल रहे। इससे पार्टी पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई है। साथ ही इस वजह से आने वाले कई वर्षों तक अब उनका दबदबा पार्टी में कायम रहने की संभावना है।

विज्ञापन


पार्टी में फिलहाल ओली का दबदबा किस हद तक है, इसकी मिसाल यही है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में उन्हें जहां 1,614 वोट मिले, वहीं उन्हें चुनौती देने वाले भीम रावल सिर्फ 223 वोट हासिल कर पाए। अधिवेशन में 2,153 ऐसे प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्हें वोट देने का अधिकार था। चुनाव नतीजे से यह साफ हुआ कि 57 प्रतिनिधियों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेपाली मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक ओली खेमे ने अधिवेशन के दौरान पदाधिकरियों के लिए चुनाव के लिए वोटिंग टालने की लगातार कोशिश की। इसकी वजह से अधिवेशन का समय भी बढ़ाना पड़ा। पहले के कार्यक्रम के मुताबिक अधिवेशन बीते रविवार को दिन में खत्म हो जाना था। लेकिन उस दिन रात तक ऊहापोह चलता रहा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ओली गुट को मतदान टलवाने में तो सफलता नहीं मिली, लेकिन मतदान में उसने अपने पक्ष में विशाल बहुमत का प्रमाण दे दिया।

पार्टी में असहमति की जगह नहीं

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चितवन में हुए इस अधिवेशन के बाद यूएमएल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब यह एक व्यक्ति केंद्रित पार्टी के रूप में नजर आ रही है। इस अधिवेशन से यह संकेत मिला कि अब इस पार्टी में असहमति या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए ज्यादा जगह नहीं बची है।

काठमांडू यूनिवर्सिटी में राजनीतिक समाजशास्त्र के प्रोफेसर उद्धब प्याकुरेल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा कि नए पदाधिकारियों का चुनाव करते समय यूएमएल सामाजिक समावेशन की नीति पर नहीं चली। सिर्फ एक दलित नेता छबिलाल बिश्वकर्मा को पदाधिकारी बनाया गया है। कई दूसरे पिछड़े तबकों को पार्टी ने नुमाइंदगी नहीं दी है।



पार्टी ने अधिवेशन के दौरान 17 सूत्रीय एक प्रस्ताव पारित किया। उसमें कहा गया है कि यूएमएल का उद्देश्य है- ‘समृद्ध नेपाल, खुश नेपाली’। इसमें कहा गया है- ‘यूएमएल खुद को एक मजबूत पार्टी के रूप में विकसित करने का संकल्प लेती है। इसके साथ ही वह नेपाल को एक समृद्ध राष्ट्र बनाने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करेगी।’ पार्टी ने अपने इस दसवें अधिवेशन को ‘एकता अधिवेशन’ कहा। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि ओली की व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं ने आज देश में कम्युनिस्ट ताकतों को इस हद तक बांट दिया है, जितना पहले कभी नहीं देखा गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed