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भारत और नेपाल के बीच मानचित्र घमासान, जानें क्या है कारण

Wed, 20 May 2020 12:43 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Tanuja Yadav Updated Wed, 20 May 2020 12:43 PM IST
सार

  • नेपाल ने जारी किया नया राजनैतिक नक्शा
  • लिपुलेख, कालापानी और लिंधियापुरा को बताया अपना क्षेत्र
  • भारत- नेपाल 1,800 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं

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the map tussle between nepal and india nepal released a new map including disputed territories
Nepal Parliament - फोटो : Social Media

विस्तार

नेपाल ने हाल ही में नए राजनैतिक मानचित्र को मंजूरी दी है जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्र बताए हैं जबकि ये तीनों भारत में आते हैं। नेपाल की सत्ता पार्टी नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी ने कानूनविदों ने संसद में एक विशेष प्रस्ताव सामने रखा है। 

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पार्टी ने इस प्रस्ताव के जरिए मांग की है कि नेपाल फिर से इन तीनों इलाकों को वापस ले। मंगलवार को चीन ने कहा था कि कालापानी का विवाद चीन और नेपाल का अपना विवाद है। वहीं भारतीय सेना के प्रमुख एम एम नारावणे ने पिछले हफ्ते एक बयान दिया था।
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एम एम नारावणे ने कहा था कि उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख पास को जोड़ने वाले रास्ते पर नेपाल ने किसी के कहने पर विरोध जताया था, इसके पीछे कई कारण हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल के इस रवैये के पीछ चीन के हाथ होने की संभावना लगती है।
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भारत और नेपाल 1,800 किलोमीटर का खुला बॉर्डर साझा करते हैं। भारत और नेपाल के बीच तनातनी तब हुई जब भारत ने पिछले साल अक्तूबर में नया राजनैतिक मानचित्र जारी किया था। नए नक्शे में जम्मू-कश्मीर का दोबारा संगठित करने के साथ नेपाल की सीमा से सटे कालापानी और लिपुलेख को शामिल किया था। 

भारत की ओर से बयान आया कि उसने नेपाल के साथ लगी सीमा को संशोधित नहीं किया है। दोनों देशों के बीच चिंता तब बढ़ी जब आठ मई को भारत ने लिपुलेख और चीन में कैलाश मानसरोवर रास्ते को जोड़ने वाली सड़क का उद्घाटन किया। 

कालापानी एक ऐसी जगह है जो चीन-नेपाल-भारत तीनों सीमाओं से सटी है, इसकी लंबाई 372 किलोमीटर है। भारत की ओर से कालापानी को उत्तराखंड का भाग कहा जाता है जबकि नेपाल ने इसे अपने नक्शे में जगह दी है। 

1816 में नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच हुई सुगौली संधि के मुताबिक कालापानी इलाके में बहने वाली महाकाली नदी ही दोनों देशों के बीच की सीमा है। हालांकि ब्रिटिश के सर्वेक्षणकर्ता ने नदी का उद्गम स्थल दिखाया है जिसकी अलग अलग जगहों पर कई सारी उपनदियां हैं।

नेपाल का दावा है कि विवादित इलाके की पश्चिमी ओर से आ रही नदी ही उद्गम स्थल है इसलिए कालापानी नेपाल की क्षेत्र में आता है लेकिन भारत महाकाली नदी का उद्गम स्थल अलग बताता है जो भारत के क्षेत्र में आता है। 


कालापानी क्षेत्र इसलिए ज्यादा महत्व रखता है क्योंकि कालापानी में लिपुलेख पास से भारत चीन के ऊपर नजर रख सकता है। 1962 से कालापानी में भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के तहत आता है।

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