जनमत संग्रह की मांग: ब्रिटेन से आजाद होने के लिए अब स्कॉटलैंड ने कर दी है ठोस पहल
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि वह नए जनमत संग्रह की अनुमति नहीं देगी। इस सवाल पर 2014 में जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें मामूली अंतर से आजादी का प्रस्ताव खारिज हो गया था। जॉनसन कह चुके हैं कि आजादी के सवाल पर जनमत संग्रह पीढ़ियों में होने वाली घटना है। यानी इसे बार-बार नहीं कराया जा सकता...
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स्कॉटलैंड की आजादी के सवाल पर दूसरा जनमत संग्रह कराने की मांग ने फिर जोर पकड़ लिया है। स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर और स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) की नेता निकोला स्टरजन ने सोमवार को ब्रिटिश सरकार से अपील की वह दूसरा जनमत संग्रह कराने के लिए उनकी सरकार के साथ सहयोग करे। फिलहाल स्कॉटलैंड ब्रिटेन का हिस्सा है। वहां की प्रांतीय सरकार के प्रमुख को फर्स्ट मिनिस्टर कहा जाता है।
इसके पहले इस महीने की शुरुआत में स्कॉटलैंड सरकार ने अपने अधिकारियों को जनमत संग्रह का ब्योरा तैयार करने का आदेश दिया था। एसएनपी ने पिछला चुनाव आजादी के सवाल पर दोबारा जनमत संग्रह कराने के वादे के साथ जीता था। अब उसका मनोबल इस बात से बढ़ा है कि स्कॉटलैंड की ग्रीन पार्टी ने भी आजादी की मांग का समर्थन कर दिया है। एसएनपी ने कहा है कि इस मुद्दे पर वह 2023 में जनमत संग्रह कराना चाहती है।
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि वह नए जनमत संग्रह की अनुमति नहीं देगी। इस सवाल पर 2014 में जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें मामूली अंतर से आजादी का प्रस्ताव खारिज हो गया था। जॉनसन कह चुके हैं कि आजादी के सवाल पर जनमत संग्रह पीढ़ियों में होने वाली घटना है। यानी इसे बार-बार नहीं कराया जा सकता। लेकिन उनकी सरकार में स्कॉटलैंड मामलों के मंत्री एलिस्टर जैक ने हाल में कहा था कि अगर स्कॉटलैंड के 60 फीसदी लोग चाहेंगे, तो दूसरा जनमत संग्रह हो सकता है।
अब ये मामला एसएनपी के सालाना सम्मेलन के मौके पर जोरशोर से उठा है। इसी सम्मेलन में समापन भाषण देते हुए स्टरजन ने आजादी पाने का लक्ष्य हासिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनमत संग्रह होना चाहिए। उन्होंने कहा- जैसे लंदन स्थित कंजरवेटिव सरकार ब्रेग्जिट हासिल करके खुश हुई थी, उसी तरह स्कॉटलैंड के लिए भी ब्रिटेन से अलग होना खुशी की बात होगी।
एसएनपी ने कहा है कि यूरोप में स्कॉटलैंड जैसे आकार के देश मौजूद हैं और अपनी आजादी के साथ वे समृद्ध बने हैं। स्कॉटलैंड की आबादी 55 लाख से कुछ ज्यादा है। एसएनपी की दलील है कि ऑस्ट्रिया, नॉर्वे, आयरलैंड, डेनमार्क और फिनलैंड जैसे देश भी लगभग इतनी ही आबादी के हैं। स्वतंत्र रहना उन देशों के फायदे में साबित हुआ है।
एसएनपी के सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत जनमत संग्रह का एक मसविदा स्कॉलैंड की संसद में पेश किया जाएगा। अगर वह पारित हो गया, तो स्कॉलैंड सरकार जनमत संग्रह कराने के लिए कानून बना सकती है। स्कॉटिश संसद में एनएनपी का बहुमत है, इसलिए उस प्रस्ताव का पारित होना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर स्कॉटलैंड की संसद से पारित कानून को ब्रिटिश सरकार ने रोकने की कोशिश की तो फिर मामला कोर्ट में जाएगा। कोर्ट को तब यह तय करना होगा कि स्कॉटिश सरकार को ब्रिटिश सरकार की सहमति के बिना जनमत संग्रह के लिए कानून बनाने का अधिकार है या नहीं।
स्टरजन ने कहा- ‘लोकतंत्र की अवश्य जीत होनी चाहिए।’ उन्होंने ब्रिटिश सरकार से इसके लिए सहयोग की अपील की। लेकिन ये मामला सद्भाव से हल होगा, अभी इसकी संभावना नहीं दिख रही है।