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कर्ज देकर कब्जा: कंबोडिया में सैन्य ठिकाना बनाने की राह पर चीन, हुआ गुप्त समझौता

Wed, 07 Oct 2020 01:31 AM IST
Jeet Kumar न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस , नाम पेन्ह।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस , नाम पेन्ह। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 07 Oct 2020 01:31 AM IST
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The Chinese military will be able to use Cambodia's maritime military base for the next 40 years
चीन का विमानवाही जंगी जहाज

पूरी दुनिया में सैन्य ठिकाने फैलाने की कोशिश में जुटा चीन अब कंबोडिया में भी डारा सकोर क्षेत्र में हवाई और समुद्री पोर्ट बनाने को लेकर चर्चा में आया है। यह पोर्ट कंबोडिया में किसी सैन्य ठिकाने की तरह काम करेगा। हालांकि कंबोडिया ने इससे इनकार किया है लेकिन माना जा रहा है कि चीन और कंबोडिया के बीच इस मामले को लेकर एक समझौता हो चुका है।

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समझौते के तहत चीनी सेना कंबोडिया के समुद्री सैन्य ठिकाने का अगले 40 वर्ष तक इस्तेमाल कर सकेगी। इसी समझौते के तहत दारा सकोर की हवाई पट्टी को भी लीज पर देने की योजना है। इस समझौते पर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय अपनी आपत्ति और आशंका जता चुका है।
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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनी तियानजिन ने 3.8 अरब डॉलर लगाकर दारा सकोर को 99 सालों के लिए लीज पर लिया है। इसके तहत कंबोडिया के तटीय क्षेत्र का 20 फीसदी हिस्सा आता है।
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चीन की कंपनी तियानजिन यूनियन डेवलपमेंट ग्रुप ने दारा सकोर के नेशनल पार्क में हवाई पट्टी और पास के रिजॉर्ट में बंदरगाह बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रोजेक्ट चीन के विस्तारवादी रवैये पर एक और कार्रवाई है।

दक्षिण चीन सागर में मिलेगी मजबूती
दारा सकोर की हवाई पट्टी कंबोडिया का सबसे बड़ा रनवे होगी और अगर चीन सैन्य बेस की तरह इसका इस्तेमाल करे तो दक्षिण चीन सागर की दावेदारी करने वाले देशों के खिलाफ वह सबसे मजबूत हो जाएगा।

यहां करीब 80 प्रतिशत हिस्से पर चीन अपना दावा करता है, जबकि ये समुद्र 6 देशों की सीमाओं से सटता है और सभी देश इसके थोड़े-थोड़े हिस्से को अपना मानने का दावा करते हैं।

चीन के आगे समर्पण के आरोप
कर्ज देकर कब्जा करने की रणनीति के तहत चीन कंबोडिया में भारी निवेश कर रहा है। चीन ने 2017 में वहां 5.8 अरब डॉलर का निवेश किया था और 2023 तक इस निवेश को 10 अरब डॉलर तक पहुंचाने में है। यह हालत देखते हुए दूसरे देश आरोप लगा रहे हैं कि कंबोडिया ने अब चीन के आगे आर्थिक समर्पण कर दिया है।


चीन को विशेषाधिकार से इनकार
कंबोडिया की सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि उसके नौसैनिक अड्डों पर चीन को आधारभूत विशेषाधिकार दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीन सिर्फ नियोजित बुनियादी ढांचे में सुधार करेगा। बता दें कि कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने 2019 में चीन के साथ ऐसे किसी भी समझौते से इनकार किया था। उन्होंने कहा कि कर्ज लेने का फैसला उनका खुद का है और उन्हें चीन से कोई खतरा नहीं।

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