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पाकिस्तान में मरा अब्दुल रहमान मक्की कौन?: लश्कर-ए-तैयबा का नंबर-2, हाफिज सईद से भी था रिश्ता, जानें सबकुछ

Fri, 27 Dec 2024 05:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 27 Dec 2024 05:03 PM IST
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सार
अब्दुल रहमान मक्की 2008 मे मुंबई पर हुए 26/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। इस आतंकी हमले में 175 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 300 से अधिक घायल हुए थे। इन आतंकी घटनाओं के चलते संयुक्त राष्ट्र ने उसे 2023 में वैश्विक आतंकी घोषित किया था। 
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Terrorist Abdul Rehman Makki dead in Pakistan 26-11 Plotter close aide of LeT Hafiz Saeed US India news and up
26/11 हमलों की साजिश रचने वाला अब्दुल रहमान मक्की। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दहशतगर्द हाफिज सईद के साथ आतंकी संगठन लश्कर-ए-तयैबा और जमात-उद-दावा के सरगना की भूमिका निभाने वाले अब्दुल रहमान मक्की की मौत की खबरें सामने आई हैं। बताया गया है कि 26/11 हमले की साजिश रचने वाले मक्की (70) की हार्ट अटैक के चलते मौत हुई। जमात-उद-दावा ने खुद उसकी मौत की जानकारी देते हुए कहा कि  मक्की पिछले कुछ दिनों से बीमार था और लाहौर के एक निजी अस्पताल में हाई-डायबिटीज की समस्या का इलाज चल रहा था। उसे गुरुवार सुबह ही हार्ट अटैक आया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। 


अब्दुल रहमान मक्की 2008 मे मुंबई पर हुए 26/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। इस आतंकी हमले में 175 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 300 से अधिक घायल हुए थे। इन आतंकी घटनाओं के चलते संयुक्त राष्ट्र ने उसे 2023 में वैश्विक आतंकी घोषित किया था। इसके बाद उसकी संपत्तियों को जब्त करने के साथ उसकी यात्रा पर रोक लग गई। हालांकि, पाकिस्तान में मक्की आजादी से घूमने वाले आतंकियों में शामिल रहा। भारत में भी आतंक-रोधी कानून यूएपीए के तहत उसे मोस्ट वॉन्टेड आतंकी घोषित किया गया था।

मक्की का हाफिज सईद से क्या रिश्ता?
बताया जाता है कि अब्दुल रहमान मक्की लश्कर और जमात दोनों का उप-प्रमुख था। लेकिन दोनों आतंकी संगठनों में उसकी भूमिका हाफिज सईद की तरह ही इसके प्रमुख की तरह की थी। बस पद में वह दोनों संगठनों का उप-प्रमुख था। वह रिश्ते में हाफिज सईद का दूर का भाई और बहनोई था। 

अब्दुल रहमान मक्की का कद कितना ऊंचा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे हर मौके पर हाफिज सईद के साथ ही देखा जाता था। 2019 में हाफिज को 36 साल की जेल की सजा होने के बाद मक्की ने दोनों आतंकी संगठनों की कमान खुद संभाल ली और हाफिज सईद के निर्देशों पर ही काम करने लगा। 

अपने बहनोई की तरह ही मक्की ने भी अपने नाम के आगे हाफिज शीर्षक जोड़ना शुरू कर दिया था। आमतौर पर यह शीर्षक उन्हें दिया जाता है, जिन्हें कुरान पूरी तरह याद हो। इतना ही नहीं उसने जमात-उद-दावा में अपने लिए नायब अमीर का शीर्षक भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। 
 

आतंकवादी घोषित, फिर भी आजाद रहा मक्की
2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाकर हाफिज सईद और अब्दुल मक्की पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की गई थी। यह प्रस्ताव-1267 था, जिसके तहत आतंकी संगठन- आईएसआईएस, अल-कायदा या उनसे जुड़े संस्थानों को मदद मुहैया कराने वाले लोगों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। जहां हाफिज सईद पर तो इस प्रस्ताव के जरिए प्रतिबंध लगे, वहीं मक्की इस प्रस्ताव से बच निकला। 

इसके कुछ ही महीनों बाद नवंबर 2010 में उसने भारत के खिलाफ हिंसा और आतंकवाद फैलाने की धमकी दी। नतीजतन अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने उसे अपनी आतंकवादियों की सूची में शामिल कर लिया। वित्त मंत्रालय ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उसे लश्कर-ए-तैयबा के राजनीतिक मामलों के विभाग के प्रमुख अब्दुल रहमान मक्की के इस आतंकी संगठन के लिए पैसे जुटाने के साक्ष्य मिले हैं। उसने लश्कर के एक ट्रेनिंग कैंप के लिए 2,48,000 डॉलर और इससे जुड़े मदरसों के लिए 1,65,000 डॉलर जुटाए हैं। 

इतना ही नहीं अमेरिका ने उसकी जानकारी देने वाले के लिए 20 लाख डॉलर का इनाम भी घोषित कर दिया। अमेरिका की इन कार्रवाइयों के बावजूद मक्की को पाकिस्तान में पूरी स्वतंत्रता हासिल रही। उसे कई मौकों पर लाहौर और इस्लामाबाद में कोर्ट में आते-जाते देखा गया। इस दौरान वकीलों और समर्थकों का हुजूम भी उसके साथ ही मौजूद रहता था। 

पाकिस्तान में भी मक्की पर दर्ज थे कई मामले
अब्दुल रहमान मक्की पर पाकिस्तान में भी कई मामले चल रहे थे। पंजाब पुलिस के आतंक-रोधी विभाग ने जमात-उद-दावा पर 40 से ज्यादा केस दर्ज किए थे। इन मामलों में मक्की और हाफिज सईद के नाम भी थे। जहां सईद को इन मामलों में कुल 36 साल की सजा हुई, वहीं मक्की छह महीने की जेल की सजा पाकर बच निकला। लाहौर हाईकोर्ट ने नवंबर 2021 को मक्की को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी फंडिंग केस में बरी किया जा चुका है। 

एफएटीएफ के दबाव में पाकिस्तान को करनी पड़ी कार्रवाई
दुनियाभर में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के वित्तपोषण पर नजर रखने और कार्रवाई करने वाली संस्था- फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की तरफ से ब्लैक लिस्ट किए जाने का खतरा सिर पर मंडराने के बाद पाकिस्तान सरकार ने आतंकवादियों और आतंकी संगठनों पर कार्रवाई शुरू की। इसी सिलसिले में पाकिस्तान सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगाने शुरू किए और इनके सरगनाओं पर केस दायर किए। इस कार्रवाई के तहत ही हाफिज सईद को पहले की तरह एक बार फिर नजरबंद कर दिया गया। हालांकि, बाद में उसे रिहा कर दिया गया। अगले साल पाकिस्तान में जमात-उद-दावा को आतंक-रोधी कानून के तहत पूरी तरह ही प्रतिबंधित कर दिया गया। 

आतंकियों पर इन दिखावे वाली कार्रवाईयों को एफएटीएफ के अधिकारियों ने पहचान लिया और उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया। जल्दबाजी में पाकिस्तान सरकार ने लश्कर, जमात के साथ-साथ जैश-ए-मोहम्मद संगठन पर भी कार्रवाई शुरू कर दी। इनसे जुड़ी मस्जिदों और मदरसों के अलावा चैरिटीज को भी प्रतिबंधित किया गया। इनसे जुड़े कई सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तान ने एफएटीएफ के डर से हाफिज सईद और अब्दुल रहमान मक्की पर कई केस दर्ज किए। इन्हीं में से एक मामले में 2019 में एक बार फिर हाफिज सईद को गिरफ्तार किया। साथ ही नफरती भाषण से जुड़े एक मामले में मक्की की भी गिरफ्तारी हुई। 

चीन के दांव-पेच के बावजूद 2023 में घोषित हुआ वैश्विक आतंकवादी
हालांकि, हाफिज सईद के उलट मक्की इस बार भी कानून के शिकंजे से बच निकला। इतना ही नहीं, 2022 में भारत और अमेरिका की तरफ से यूएनएससी में मक्की के खिलाफ पेश हुए प्रस्ताव-1267 को भी चीन ने रोक दिया। हालांकि, उसकी यह कोशिशें ज्यादा समय तक काम नहीं आईं और आखिरकार 2023 में अब्दुल रहमान मक्की को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान में वह गिरफ्तारी से बचा रहा। 
 
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