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ऑकस करार पर तनाव : ऑस्ट्रेलिया ने कहा- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बिगड़ते हालात के बाद कारगर नहीं थीं फ्रांसीसी पनडुब्बियां

Mon, 20 Sep 2021 07:22 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, कैनबरा
एजेंसी, कैनबरा Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 20 Sep 2021 07:22 AM IST
सार

ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन ने रविवार को कहा, ऑस्ट्रेलिया को जिस तरह की पनडुब्बियों की जरूरत है, फ्रांस द्वारा बनाई जा रहीं पनडुब्बियां उस तरह की नहीं थीं। ऑस्ट्रेलिया द्वारा परमाणु पनडुब्बियों के लिए अमेरिका और ब्रिटेन के साथ ऑकस करार के बाद से फ्रांस के साथ उसके रिश्तों में तनाव उत्पन्न हो गया है।

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Tension on Ocus agreement: Australia says French submarines were not effective after the deteriorating situation in the Indo-Pacific region
scott morrison

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया ने साफ कह दिया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बिगड़ते हालात के बाद फ्रांसीसी पनडुब्बियां हमारे काम की नहीं रह गई थीं। ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन ने रविवार को कहा, फ्रांस को पता होगा कि ऑस्ट्रेलिया को गहरी और गंभीर चिंता थी कि उनका पनडुब्बी बेड़ा हमारी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा। ऑस्ट्रेलिया द्वारा परमाणु पनडुब्बियों के लिए अमेरिका और ब्रिटेन के साथ ऑकस करार के बाद से फ्रांस के साथ उसके रिश्तों में तनाव उत्पन्न हो गया है।

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ऑकस करार पर तनाव के बीच पीएम मॉरिसन बोले, फ्रांस को भी मालूम थीं हमारी चिंताएं
मॉरिसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को जिस तरह की पनडुब्बियों की जरूरत है, फ्रांस द्वारा बनाई जा रहीं पनडुब्बियां उस तरह की नहीं थीं। ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा, उन्हें (फ्रांस) अच्छी तरह पता था कि हमलावर श्रेणी की पनडुब्बियों को लेकर हमारी गहरी और गंभीर चिंता थी क्योंकि ये हमारे रणनीतिक हितों के अनुकूल नहीं थीं। हमने स्पष्ट कर दिया था कि हम अपने राष्ट्र हित के आधार पर कोई फैसला करेंगे।
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फ्रांस ने ऑस्ट्रेलिया पर 12 पारंपरिक डीजल-विद्युत चालित पनडुब्बियों के निर्माण के लिए नेवल ग्रुप के साथ 90 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (66 अरब डॉलर) के अनुबंध से पीछे हटने को पीठ में छुरा घोंपना करार दिया है। नाराज फ्रांस ने ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया। एजेंसी
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चीन ने की आलोचना
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ला द्रीयां ने अचानक समझौता रद्द किए जाने की आलोचना की। चीन ने भी परमाणु प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन की तीखी आलोचना की। फ्रांस ने जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ते हुए 2016 में यह सौदा हासिल किया था।

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