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सीमा विवाद को हल करने के लिए बनी टास्क फोर्स ने नेपाल सरकार को सौंपी रिपोर्ट

Wed, 07 Oct 2020 03:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 07 Oct 2020 03:26 PM IST
सार

  • भारत के साथ बातचीत से ही हल हो सकते हैं विवाद, सचिव स्तर की बातचीत की सिफारिश
  • लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा विवाद को हल करने के लिए बनी है विशेषज्ञ समिति
  • दशकों पुराना है विवाद, बातचीत से ही निकल सकता है कोई रास्ता

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Task force to resolve border dispute submitted report to Nepal government
लिपुलेख के लिए बन रही सड़क - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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भारत-नेपाल सीमा विवाद और खासकर कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा पर अपना अपना हक जताए जाने को लेकर नेपाल की विशेषज्ञों की टीम ने ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी जांच पूरी करके सरकार को रिपोर्ट दे दी है। इस रिपोर्ट में सीधे तौर पर कहा गया है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। भारतीय सुरक्षा बल इन विवादित इलाकों में दशकों से हैं और उनके कब्जे से जमीन वापस लेने के लिए भारत के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से बातचीत करनी होगी।

नेपाल सरकार ने तीन महीने पहले इस विवाद को दूर करने या इसके हल के लिए कारगर रास्ता तलाशने के लिए एक नौ सदस्यीय कमेटी बनाई थी। सरकार का थिंक टैंक माने जाने वाले पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी अध्यक्ष बिष्णुराज उप्रेती की अगुवाई में बनी इस समिति ने ये रिपोर्ट बनाई है। सरकार ने ये समिति इसलिए भी बनाई कि इसके जरिए भारत के साथ बातचीत का रास्ता खोला जा सके और मामले को मिल बैठकर सुलझाया जा सके।

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भारत और चीन के बीच मौजूदा विवाद और टकराव की स्थिति को देखते हुए कुछ जानकार और वरिष्ठ नेपाली अफसरों को बेहद संयम के साथ भारत से बातचीत करने की पहल करनी चाहिए। समिति के सदस्यों ने कहा है कि खासकर लिपुलेख इलाके में भारत की ओर से सड़क बनाए जाने और सीमा से जुड़े अन्य मसलों को लेकर ये बातचीत हो सकती है। पिछले नवंबर से ये विवाद बढ़ गया है जब भारत ने अपने नए राजनीतिक नक्शे में इन इलाकों को अपना हिस्सा बताया और इसके जवाब में 20 मई को नेपाल ने भी अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी कर दिया।
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नेपाल के अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में दोनों देशों के बीच सचिव स्तर की बातचीत होनी चाहिए। शायद इससे दशकों पुराने इस सीमा विवाद को हल करने में कोई मदद मिल सके। लेकिन भारत फिलहाल कोविड-19 के इस दौर में बातचीत को राजी नहीं है।

समिति अपनी ये रिपोर्ट प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सौंपने वाली थी, लेकिन इसे विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली को सौंपा गया। दरअसल प्रधानमंत्री कार्यालय के दर्जनों कर्मचारियों के कोविड पॉजीटिव होने की वजह से रिपोर्ट ओली को नहीं सौंपी जा सकी।


काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक बिष्णुराज उप्रेती ने बताया कि रिपोर्ट में समिति ने पांच इलाकों के ऐतिहासिक, भौगोलिक दस्तावेजों के साथ अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और पिछले कुछ सीमा विवाद से जुड़े मामलों का हवाला दिया है और कहा है कि ये समस्या बातचीत से ही हल हो सकती है।

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