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तालिबान की व्यवस्था: अफगानिस्तान में छात्रों के लिए खुले कक्षा सात से 12 तक के स्कूल, महिला शिक्षा पर पूरी तरह पाबंदी
Sat, 18 Sep 2021 03:09 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 18 Sep 2021 03:09 PM IST
सार
तालिबान के शिक्षा मंत्रालय की ओर से शनिवार से स्कूलों को खोलने के लिए घोषणा की गई। कक्षा सात से कक्षा 12 तक के स्कूलों को छात्रों के लिए खोला गया है। इस घोषणा में महिलाओं का जिक्र नहीं किया गया है।
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अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति
- फोटो : Social media
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विस्तार
महिलाओं को उनके अधिकार देने का दावा करने वाले तालिबान ने अफगानिस्तान में महिला शिक्षा पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। नए फरमान के तहत लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने की इजाजत नहीं होगी। माध्यमिक या इससे ऊपर की शिक्षा सिर्फ पुरुषों के लिए होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आई खबर के तहत तालिबान ने स्कूलों व कॉलेजों से महिला शिक्षकों को भी बाहर कर दिया है। पुरुषों को पढ़ाने के लिए सिर्फ पुरुष शिक्षक ही रखे गए हैं। तालिबान के इस फैसले के बाद अफगानिस्तान दुनिया का एक मात्र देश है जहां के लोगों को माध्यमिक शिक्षा के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
यूनीसेफ ने जताई थी चिंता
तालिबान का यह फैसला तब आया है जब यूनीसेफ ने अफगानिस्तान में महिला शिक्षा के प्रति अपनी चिंता प्रकट की थी। शुक्रवार को यूनीसेफ अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा था कि अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू होने की वजह से उन्हें वहां की महिला शिक्षा को लेकर चिंता है। इस फैसले से महिलाएं बहुत पीछे रहे जाएंगी और उनके लिए परिस्थितियां बहुत ही दयनीय हो जाएंगी।
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मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आई खबर के तहत तालिबान ने स्कूलों व कॉलेजों से महिला शिक्षकों को भी बाहर कर दिया है। पुरुषों को पढ़ाने के लिए सिर्फ पुरुष शिक्षक ही रखे गए हैं। तालिबान के इस फैसले के बाद अफगानिस्तान दुनिया का एक मात्र देश है जहां के लोगों को माध्यमिक शिक्षा के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
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यूनीसेफ ने जताई थी चिंता
तालिबान का यह फैसला तब आया है जब यूनीसेफ ने अफगानिस्तान में महिला शिक्षा के प्रति अपनी चिंता प्रकट की थी। शुक्रवार को यूनीसेफ अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा था कि अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू होने की वजह से उन्हें वहां की महिला शिक्षा को लेकर चिंता है। इस फैसले से महिलाएं बहुत पीछे रहे जाएंगी और उनके लिए परिस्थितियां बहुत ही दयनीय हो जाएंगी।
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