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अफगानिस्तान: तालिबान ने अमेरिका को दी चेतावनी- अफ़गान वायुक्षेत्र में घुसपैठ रोके, वरना भुगतने होंगे अंजाम
Wed, 29 Sep 2021 09:47 PM IST
सुभाष कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: सुभाष कुमार
Updated Wed, 29 Sep 2021 09:47 PM IST
सार
अमेरिका ने कहा है कि अफ़गानिस्तान में पनप रहे आतंकी समूहों के खिलाफ़ वह अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करेगा।
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तालिबान ने अमेरिका को दी घुसपौठ रोकने की चेतावनी ।
- फोटो : social media
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विस्तार
तालिबान ने अमेरिका को अफगानिस्तान के वायुक्षेत्र में अमेरिकी ड्रोनों के घुसपैठ को लेकर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने यह चेतावनी अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल के माध्यम से जारी की है।
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा - अमेरिका ने इन ड्रोनों को अफगान सीमा में घुसपैठ करवा कर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के साथ-साथ तालिबान से कतर के दोहा में किए गए समझौतों का भी उल्लंघन किया है। ऐसे कदम हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। हम सभी देशों से अनुरोध करते हैं विशेष कर के अमेरिका से कि नकारात्मक परिणामों से बचने के लिए वो अपनी जिम्मेदारियों को समझें। सभी देश अफगानिस्तान के अधिकारों, कानूनों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करें ।
अमेरिका ने इस चेतावनी पर तत्काल कोई भी जवाब नहीं दिया है, लेकिन अफगानिस्तान की जमीन पर अलकायदा और आईसआईएल (आईएसआईस) के ताकतवर होने पर अपनी चिंता जाहिर की है। अमेरिका ने कहा है कि अफ़गानिस्तान में इन आतंकी समूहों के खिलाफ़ वह अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करेगा। अमेरिका ने तर्क दिया कि जब किसी देश की सरकार अपने यहां पनप रहे आतंकी खतरों को रोक पाने में सक्षम न हो तो ऐसी कार्रवाई जायज़ है।
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इससे पहले भी अमेरिका ने अफगानिस्तान के जलालाबाद में इस्लामिक स्टेट- खोरासान (आईसकेपी)के आतंकियों पर ड्रोन हमला किया था। इसी आतंकी समूह ने 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस आतंकी हमले में अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए थे।
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तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा - अमेरिका ने इन ड्रोनों को अफगान सीमा में घुसपैठ करवा कर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के साथ-साथ तालिबान से कतर के दोहा में किए गए समझौतों का भी उल्लंघन किया है। ऐसे कदम हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। हम सभी देशों से अनुरोध करते हैं विशेष कर के अमेरिका से कि नकारात्मक परिणामों से बचने के लिए वो अपनी जिम्मेदारियों को समझें। सभी देश अफगानिस्तान के अधिकारों, कानूनों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करें ।
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अमेरिका ने इस चेतावनी पर तत्काल कोई भी जवाब नहीं दिया है, लेकिन अफगानिस्तान की जमीन पर अलकायदा और आईसआईएल (आईएसआईस) के ताकतवर होने पर अपनी चिंता जाहिर की है। अमेरिका ने कहा है कि अफ़गानिस्तान में इन आतंकी समूहों के खिलाफ़ वह अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करेगा। अमेरिका ने तर्क दिया कि जब किसी देश की सरकार अपने यहां पनप रहे आतंकी खतरों को रोक पाने में सक्षम न हो तो ऐसी कार्रवाई जायज़ है।
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इससे पहले भी अमेरिका ने अफगानिस्तान के जलालाबाद में इस्लामिक स्टेट- खोरासान (आईसकेपी)के आतंकियों पर ड्रोन हमला किया था। इसी आतंकी समूह ने 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस आतंकी हमले में अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए थे।