फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Taliban is unlikely to take part in UNGA as diplomats of ousted government are still in UN office

संयुक्त राष्ट्र महासभा: तालिबान के शामिल होने की संभावना नहीं, अभी भी कार्यालय में हैं पिछली सरकार के अधिकारी

Thu, 23 Sep 2021 08:22 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र/इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र/इस्लामाबाद Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 23 Sep 2021 08:22 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के मिशन में पिछली सरकार के अधिकारी अभी भी मौजूद हैं और संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित भी करने वाले हैं। ऐसे में सत्र में शामिल होने की मांग के साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव को पत्र लिखने के बाद भी तालिबान के इसमें शामिल होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

विज्ञापन
Taliban is unlikely to take part in UNGA as diplomats of ousted government are still in UN office
UNGA - फोटो : twitter.com/UN

विस्तार

अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार को सत्ता से बाहर कर अपनी सरकार बनाने वाले कट्टर इस्लामी संगठन तालिबान की संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में शामिल होने की संभावना न के बराबर है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछली सरकार के अधिकारी अभी भी संयुक्त राष्ट्र में कार्यालय में हैं। अफगानिस्तान 27 सितंबर को महासभा के सत्र को संबोधित करने वाला है।

विज्ञापन


20 सितंबर को तालिबान नियंत्रित अफगान विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में न्यूयॉर्क में हो रहे 76वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी था। इस पत्र पर तालिबान के नेता अमीर खान मुत्तकी ने नए विदेश मंत्री के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें लिखा था कि अशरफ गनी 15 अगस्त को राष्ट्रपति पद से हटा दिए गए थे, ऐसे में उनका दल अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
विज्ञापन


इससे एक सप्ताह पहले 15 सितंबर को गुटेरेस को वर्तमान में मान्यता प्राप्त अफगान राजदूत गुलाम इसाकजई से एक पत्र मिला था। इस पत्र में इसाकजई ने कहा था कि मैं और मेरे दल के अन्य सदस्य अभी भी संयुक्त राष्ट्र में अफगान मिशन में मौजूद हैं और काम कर रहे हैं, हम संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके बाद मंगलवार को उन्होंने सत्र में शिरकत की थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सत्र को संबोधित किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पाकिस्तान के समाचार पत्र दि डॉन ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया कि जब तक क्रेडेंशियल समिति कोई निर्णय नहीं लेती है तब तक वह (इसाकजई और उनका दल) मिशन में पहले की तरह ही मौजूद रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार इस तरह के फैसले लेने वाली संयुक्त राष्ट्र की नौ सदस्यी क्रेंडेंशियल समिति की बैठक 27 सितंबर से पहले होना मुश्किल है और अगर बैठक होती है तो भी यह सत्र संपन्न होने में बाकी बचे दो-तीन दिन में मुद्दे को सुलझा नहीं पाएगी।

क्रेडेंशियल समिति के पास भेज दिए गए हैं दोनों पत्र
संयुक्त राष्ट्र की प्रवक्ता स्टेफनी डुजारिक ने दोनों पत्र मिलने की पुष्टि की है। गुटेरेस के कार्यालय ने महासभा के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद से मशवरा करने के बाद दोनों पत्र समिति के पास भेज दिए हैं। समिति के सदस्यों में अमेरिका, रूस, चीन, बहामास, भूटान, चिली, नामीबिया, सिएरा लियोन व स्वीडन शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने वैध अफगान सरकार के तौर पर संयुक्त राष्ट्र के साथ जुड़ने के तालिबान के इस अनुरोध पर कुछ विशेष रुख नहीं दिखाया है। 

अमेरिका को थी तालिबान के अनुरोध की जानकारी
अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार उन्हें तालिबान के अनुरोध के बारे में जानकारी थी। हालांकि, यह संकेत देते हुए कि 27 सितंबर को तालिबान का प्रतिनिधि महासभा को संबोधित नहीं करेगा, उन्होंने कहा कि इस बारे में विचार-विमर्श करने में कुछ समय लगेगा। हालांकि, एक संभावना यह है कि अफगानिस्तान के वर्तमान राजदूत को महासभा को संबोधित करने की अनुमति न दी जाए। क्योंकि, अनुमति देना पिछली सरकार के लिए समर्थन का संकेत देगा।


तालिबान को लेकर कैसा रुख रखता है संयुक्त राष्ट्र
रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान की पिछली सरकार को संयुक्त राष्ट्र के अंदर अभी भी समर्थन प्राप्त है और इसका प्रतिनिधि महासभा को संबोधित करे, इस अभियान का नेतृत्व भारत कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तालिबानी नेता को महासभा के सत्र को संबोधित करने की अनुमति देने का मतलब होगा कि संयुक्त राष्ट्र ने काबुल में नई व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है। लेकिन, वास्तविकता यह है कि संयुक्त राष्ट्र फिलहाल ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed