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अफगानिस्तान: तालिबान सरकार ने मानवाधिकार संस्थाओं को किया बंद, कहा- इसकी जरूरत नहीं
Tue, 17 May 2022 05:30 PM IST
विजय पुंडीर
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 17 May 2022 05:30 PM IST
सार
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने मानवाधिकार आयोग को भंग करने का फैसला किया है। इसके अलावा 4 प्रमुख विभागों को भी बंद कर दिया।
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तालिबान (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
तालिबान ने अफगानिस्तान में मानवाधिकार संस्थानों को खत्म करने का फैसला किया है। इसके अलावा 4 प्रमुख विभागों पर भी तालिबान ने ताला लटका दिया है। तालिबान सरकार का कहना है कि वित्तिय संकट पैदा होने की वजह से उन्होंने यह फैसला किया है।
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने के बाद शनिवार को तालिबान सरकार ने बजट की घोषणा की। जिसमें उसने बताया कि इस वक्त देश को 501 मिलियन डॉलर के बजट घाटे का सामना कर रहा है।
तालिबान सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि इन विभागों की कोई जरूरत नहीं थी, इन्हें बजट में भी शामिल नहीं किया गया, इसलिए इन्हें भंग कर दिया गया। जिसके बाद तालिबान सरकार को चारों तरफ आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। तालिबान के इस कदम के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता भी बढ़ गई है।
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मानवाधिकार आयोग के अलावा जिन विभागों पर तालिबान सरकार ने ताला लटकाया है उनमें राष्ट्रीय पुनर्गठन उच्च परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद भी शामिल हैं। समांगनी का कहना है कि अगर भविष्य में उन्हें इन विभागों की जरूरत पड़ती है तो इन्हें फिर से सक्रिय किया जा सकता है।
ह्यूमन राइट्स वाच (HRW) में एसोसिएट महिला अधिकार निदेशक और पूर्व वरिष्ठ अफगानिस्तान शोधकर्ता हीथर बर्र ने कहा कि मानवाधिकार आयोग कहीं जाने, मदद मांगने, न्याय मांगने के लिए बहुत मायने रखता है। अब हम ऐसे अफगानिस्तान की बस कल्पना ही कर सकते हैं जहां मानवाधिकार आयोग था।
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गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने के बाद शनिवार को तालिबान सरकार ने बजट की घोषणा की। जिसमें उसने बताया कि इस वक्त देश को 501 मिलियन डॉलर के बजट घाटे का सामना कर रहा है।
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तालिबान सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि इन विभागों की कोई जरूरत नहीं थी, इन्हें बजट में भी शामिल नहीं किया गया, इसलिए इन्हें भंग कर दिया गया। जिसके बाद तालिबान सरकार को चारों तरफ आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। तालिबान के इस कदम के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता भी बढ़ गई है।
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मानवाधिकार आयोग के अलावा जिन विभागों पर तालिबान सरकार ने ताला लटकाया है उनमें राष्ट्रीय पुनर्गठन उच्च परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद भी शामिल हैं। समांगनी का कहना है कि अगर भविष्य में उन्हें इन विभागों की जरूरत पड़ती है तो इन्हें फिर से सक्रिय किया जा सकता है।
ह्यूमन राइट्स वाच (HRW) में एसोसिएट महिला अधिकार निदेशक और पूर्व वरिष्ठ अफगानिस्तान शोधकर्ता हीथर बर्र ने कहा कि मानवाधिकार आयोग कहीं जाने, मदद मांगने, न्याय मांगने के लिए बहुत मायने रखता है। अब हम ऐसे अफगानिस्तान की बस कल्पना ही कर सकते हैं जहां मानवाधिकार आयोग था।
तालिबान का महिलाओं पर पाबंदियों का एलान
इससे पहले तालिबान सरकार ने महिलाओं व लड़कियों के लिए हिजाब (बुर्का) को लेकर एक फरमान जारी किया था। जिसका महिलाओं की आजादी के खिलाफ बताते हुए जी-7 देशों ने कड़ा विरोध किया था।
तालिबान प्रमुख हिबतुल्ला अखुंदजादा ने अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से महिलाओं को बुर्का पहनने का फरमान सुनाया था। काबुल में कार्यक्रम के दौरान तालिबानी अधिकारियों ने इसे जारी किया। अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं को चादोरी यानी सिर से पैर तक बुर्का पहनना चाहिए। ये परंपरागत और सम्मानजनक है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं पर लगाए गए सबसे कठोर प्रतिबंधों में से एक है। इससे पहले अफगानिस्तान में तालिबान ने पोस्टर चिपका कर महिलाओं को घरों में रहने का आदेश दिया था। तालिबान ने 1990 के दशक में अपने शासन काल में अफगानिस्तान में महिलाओं को बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया था।
जी-7 ने जताया कड़ा ऐतराज
कनाडा में जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों ने साझा बयान जारी कर कहा कि तालिबान का हालिया आदेश महिलाओं की आजादी, समान अधिकारों व समाज में उनकी भागीदारी को सीमित करने वाला कदम है। बयान में कहा गया कि तालिबान द्वारा अफगानी महिलाओं के लिए हिजाब पाबंदियां अनिवार्य करने के साथ ही इसके उल्लंघन पर उनके परिजनों को सजा देने का आदेश निंदनीय है।
बयान पर कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका व यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधि ने दस्तखत किए। इन देशों के विदेश मंत्रियों के साझा बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं व लड़कियों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही पाबंदियों का हम कड़ा विरोध करते हैं।
यह है तालिबान का नया फरमान
-अफगानिस्तान में महिलाओं को अब सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना ही होगा।
-महिला ने घर के बाहर रहने पर अपना चेहरा नहीं ढंका तो, उसके पिता या करीबी पुरुष रिश्तेदार को जेल में डाल दिया जाएगा।
-परिवार की महिला द्वारा हिजाब नहीं पहनने पर पुरुष रिश्तेदार को सरकारी नौकरी से निकाल दिया जाएगा।
इससे पहले तालिबान सरकार ने महिलाओं व लड़कियों के लिए हिजाब (बुर्का) को लेकर एक फरमान जारी किया था। जिसका महिलाओं की आजादी के खिलाफ बताते हुए जी-7 देशों ने कड़ा विरोध किया था।
तालिबान प्रमुख हिबतुल्ला अखुंदजादा ने अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से महिलाओं को बुर्का पहनने का फरमान सुनाया था। काबुल में कार्यक्रम के दौरान तालिबानी अधिकारियों ने इसे जारी किया। अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं को चादोरी यानी सिर से पैर तक बुर्का पहनना चाहिए। ये परंपरागत और सम्मानजनक है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं पर लगाए गए सबसे कठोर प्रतिबंधों में से एक है। इससे पहले अफगानिस्तान में तालिबान ने पोस्टर चिपका कर महिलाओं को घरों में रहने का आदेश दिया था। तालिबान ने 1990 के दशक में अपने शासन काल में अफगानिस्तान में महिलाओं को बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया था।
जी-7 ने जताया कड़ा ऐतराज
कनाडा में जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों ने साझा बयान जारी कर कहा कि तालिबान का हालिया आदेश महिलाओं की आजादी, समान अधिकारों व समाज में उनकी भागीदारी को सीमित करने वाला कदम है। बयान में कहा गया कि तालिबान द्वारा अफगानी महिलाओं के लिए हिजाब पाबंदियां अनिवार्य करने के साथ ही इसके उल्लंघन पर उनके परिजनों को सजा देने का आदेश निंदनीय है।
बयान पर कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका व यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधि ने दस्तखत किए। इन देशों के विदेश मंत्रियों के साझा बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं व लड़कियों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही पाबंदियों का हम कड़ा विरोध करते हैं।
यह है तालिबान का नया फरमान
-अफगानिस्तान में महिलाओं को अब सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना ही होगा।
-महिला ने घर के बाहर रहने पर अपना चेहरा नहीं ढंका तो, उसके पिता या करीबी पुरुष रिश्तेदार को जेल में डाल दिया जाएगा।
-परिवार की महिला द्वारा हिजाब नहीं पहनने पर पुरुष रिश्तेदार को सरकारी नौकरी से निकाल दिया जाएगा।