ताइवान ने ठुकराया चीन का 'एक देश, दो व्यवस्था' वाला फार्मूला, कहा- हम आजाद मुल्क हैं और रहेंगे
ताइवान ने चीन को एक बड़ा झटका दिया है। उसने बड़ा साहस दिखाते हुए चीन का ‘एक देश, दो व्यवस्था’ वाला प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन ने कहा है कि उन्हें चीन का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। ताइवान का कहना है कि यह फॉर्मूला हांगकांग में पूरी तरह से नाकाम हो गया है ऐसे में इसे स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है।
बता दें कि चीन इस देश को भी अपना ही एक हिस्सा मानता है और बार-बार कहता रहा है कि ताइवान का एकीकरण होकर रहेगा जिसे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है। ऐसे में ताइवान राष्ट्रपति का चीनी प्रस्ताव को ठुकराना वैश्विक मंच पर बेहद अहम माना जा रहा है।
ताइवान के 11 जनवरी को होने वाले आम चुनाव में साई इंग वेन दोबारा चुनावी मैदान में हैं। नए साल के मौके पर अपने भाषण में उन्होंने दोहराया है कि ताइवान एक संप्रभु देश है और वह चीन के दबाव से मुक्त होकर अपने यहां लोकतंत्र और स्वतंत्रता को कायम रखेगा। ताइवान के चुनाव में चीन का डर सबसे बड़ा मुद्दा है।
सेना के इस्तेमाल की धमकी दे चुका है चीन
हाल ही में चीन ने स्पष्ट किया था कि वह ताइवान के विलय को लेकर सैन्य ताकत का इस्तेमाल भी कर सकता है। राष्ट्रपति जिनपिंग इस द्वीप को अपने में मिलाने का कह चुके हैं। कुछ समय पहले चीनी रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगहे ने भी मातृभूमि के एकीकरण को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ने का बयान दिया था। दरअसल ताइवान 1950 से ही स्वतंत्र देश रहा है लेकिन चीन उसे अपना विद्रोही राज्य मानता रहा है।