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Zakir Hussain: नम आंखों से दी गई तबला वादक जाकिर हुसैन को अंतिम विदाई; सैन फ्रांसिस्को में हुए सुपुर्द-ए-खाक

Fri, 20 Dec 2024 09:13 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 20 Dec 2024 09:13 AM IST
सार

प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र जाकिर हुसैन का जन्म नौ मार्च 1951 को हुआ था। उन्हें उनकी पीढ़ी के सबसे महान तबला वादकों में से एक माना जाता है। उनके परिवार में उनकी पत्नी एंटोनिया मिनेकोला और उनकी बेटियां अनीशा कुरैशी और इजाबेला कुरैशी हैं।

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Tabla maestro Zakir Hussain Paases Away Laid To Rest In San Francisco
उस्ताद जाकिर हुसैन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूरी दुनिया में मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन को गुरुवार को सैन फ्रांसिस्को में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। दुनिया के सबसे बेहतरीन तबलावादकों में से एक जाकिर हुसैन का सोमवार को सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में निधन हो गया था। वह 73 वर्ष के थे।  वे फेफड़ों की बीमारी इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस से उत्पन्न जटिलताओं से परेशान थे।

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परिवार में कौन-कौन?
प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र जाकिर हुसैन का जन्म नौ मार्च 1951 को हुआ था। उन्हें उनकी पीढ़ी के सबसे महान तबला वादकों में से एक माना जाता है। उनके परिवार में उनकी पत्नी एंटोनिया मिनेकोला और उनकी बेटियां अनीशा कुरैशी और इजाबेला कुरैशी हैं। परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'वह दुनिया भर के अनगिनत संगीत प्रेमियों द्वारा संजोई गई एक असाधारण विरासत छोड़ गए हैं, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक बना रहेगा।'
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कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कलाकारों के साथ काम किया
छह दशकों के अपने करियर में जाकिर हुसैन ने कई प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन गिटारवादक जॉन मैकलॉघलिन, वायलिन वादक एल शंकर और तालवादक टीएच 'विक्कू' विनायक्रम के साथ 1973 में भारतीय शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी जैज संगीत के तत्वों के उनके संलयन को काफी सराहा गया।
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सात वर्ष की आयु से ही तबले पर हाथ आजमाना शुरू किया
जाकिर हुसैन ने महज सात वर्ष की आयु से ही तबले पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया था और आगे चलकर उन्होंने पंडित रविशंकर, अली अकबर खान और शिवकुमार शर्मा जैसे दिग्गजों सहित भारत के लगभग सभी प्रतिष्ठित संगीत कलाकारों के साथ काम किया। यो-यो मा, चार्ल्स लॉयड, बेला फ्लेक, एडगर मेयर, मिकी हार्ट और जॉर्ज हैरिसन जैसे पश्चिमी संगीतकारों के साथ उनके अभूतपूर्व संगीत ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया।


पांच ग्रैमी पुरस्कार जीते
जाकिर हुसैन ने अपने करियर में पांच ग्रैमी पुरस्कार जीते, जिनमें से तीन इस साल की शुरुआत में 66वें ग्रैमी पुरस्कार में मिले थे। भारत के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों में से एक हुसैन को 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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