Sushila Karki: तेजतर्रार न्यायाधीश रही हैं कार्की, ताकतवर लोगों को भी जेल भेजने से कभी नहीं डरीं
सुशीला कार्की के अंतरिम पीएम बनने के साथ ही संकट का हल फिलहाल तो निकल गया, पर चुनौतियां अब भी कम नहीं हैं।
- कार्की की छवि तेजतर्रार न्यायाधीश की रही है।
- वे ताकतवर लोगों को भी जेल भेजने से कभी नहीं डरीं।
- माना जा रहा है कि जेन-जी को सच्चा अभिभावक मिला है।
- कार्की का भारत से गहरा नाता है, ऐसे में अब नए नेपाल के निर्माण की उम्मीद है।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद का जिम्मा ऐसे समय संभाला है, जब जेन-जी की अपेक्षाओं पर खरे नए नेपाल का निर्माण करने और पूरी मजबूती के साथ लोकतंत्र स्थापित करने की जरूरत है।
उनके सहयोगियों का कहना है कि जेन-जी को कार्की के रूप में सच्चा अभिभावक मिला है, जो देश को नाजुक स्थिति से बाहर लाने में पूरी तरह सफल रहेंगी। उनके नेतृत्व में देश सही दिशा में आगे बढ़ेगा। कार्की तेजतर्रार न्यायाधीश रहीं और ताकतवर लोगों को जेल भेजने से भी नहीं डरती थीं। बतौर मुख्य न्यायाधीश, कार्की ने 2016 में भ्रष्टाचार विरोधी निकाय के शक्तिशाली प्रमुख पर पद के दुरुपयोग के आरोप में महाभियोग चलाने का फैसला सुनाया था।
उन्होंने लिखा था, उसके पास न तो नैतिक चरित्र है और न ही वह पद के लिए योग्य हैं। मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले कार्की उस दो सदस्यीय पीठ का हिस्सा रहीं, जिसने 2012 में सूचना एवं संचार मंत्री जय प्रकाश गुप्ता को भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया था। 2016 में पूर्व माओवादी विधायक और दोषी ठहराए गए हत्यारे बाल कृष्ण धुंगेल को माफी देने के खिलाफ फैसला सुनाया।
कार्की (73) का जन्म मोरंग के किसान परिवार में हुआ। सात संतान में सबसे बड़ी थीं। विराटनगर में रहते हुए बीपी कोइराला परिवार व प्रजातांत्रिक आंदोलन से भी जुड़ीं।
- 1974 में भारत में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
- 26 वर्ष में 1978 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि ली और कानून को अपना पेशा बनाया।
कार्की भ्रष्टाचार के खिलाफ बेहद मुखर रही हैं। वैसे तो वह नेपाली कांग्रेस के कोटे से शीर्ष अदालत में आईं, लेकिन ईमानदारी से कभी समझौता नहीं किया। अप्रैल, 2017 में माओवादी पीएम पुष्प कमल दहल-नीत सत्तारूढ़ गठबंधन उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया, जब सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठता के आधार पर उत्तराधिकार सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए पसंदीदा पुलिस प्रमुख को नियुक्त करने के उनके फैसले को पलट दिया था। गठबंधन सहयोगी शेर बहादुर देउबा के समर्थन से लाया गया यह महाभियोग हालांकि सफल नहीं हो पाया। कार्की ने कांग्रेस नेता दुर्गा सुबेदी से विवाह किया था। दोनों सच्चे गांधीवादी हैं।
कार्की के सहयोगी और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आनंद मोहन भट्टाराई का मानना है कि लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में उन्हें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। मुझे पूरी उम्मीद है कि वह संक्रमण काल में सर्वोच्च स्तर पर लोकतांत्रिक सिद्धांतों को अपनाते हुए नेतृत्व प्रदान करेंगी। हालांकि कुछ लोगों ने इसे चुनौती करार दिया। द काठमांडो पोस्ट के मुताबिक, काठमांडो यूनि. स्कूल ऑफ लॉ के प्रोफेसर बिपिन अधिकारी ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में उन्हें सरकार चलाने के लिए मजबूत टीम की जरूरत है।
नेपाल में तख्तापलट के तीन दिन बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं। संसद भंग करने के साथ छह महीने में उन्हें संसद यानी प्रतिनिधि सभा के चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने अपने पहले फैसले में पांच मार्च, 2026 को आम चुनाव का एलान कर दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उनकी सिफारिश मंजूर कर ली। अब सभी की नजर कैबिनेट विस्तार पर लगी हुई है।
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कार्की ने साफ किया है कि वह अपने कैबिनेट सदस्यों को चुनाव लड़ने से नहीं रोकेंगी। संभव है कि उनकी कैबिनेट में कुलमन घीसिंग, बालेंद्र शाह बालेन व सुमाना श्रेष्ठ को शामिल किया जाए। पीएम पद की दौड़ में बिजली बोर्ड के पूर्व सीईओ घीसिंग व काठमांडो के मेयर बालेन भी थे। सुमाना पूर्व शिक्षा मंत्री हैं। अंतरिम सरकार में जेन-जी का प्रतिनिधि नहीं होगा। हालांकि जेन-जी ने कहा कि वह अंतरिम सरकार के कामकाज पर कड़ी निगाह रखेंगे।