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Supreme Court: 'केंद्र शत्रु संपत्ति का मालिक नहीं, पालिका टैक्स से छूट नहीं'; लखनऊ नगर निगम की अपील पर कोर्ट
Fri, 23 Feb 2024 11:11 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 23 Feb 2024 11:11 PM IST
सार
केंद्र शत्रु संपत्तियों का मालिक नहीं है। अदालत ने साफ किया है कि केंद्र सरकार को पालिका टैक्स भरना होगा। कर से राहत की मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ लखनऊ नगर निगम की याचिका पर शीर्ष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से नियुक्त संरक्षकों के कब्जे वाली शत्रु संपत्तियां केंद्र सरकार की संपत्ति नहीं हैं। केंद्र इस पर गृह और जल कर सहित नगरपालिका उपकर का भुगतान करने से छूट नहीं मांग सकती है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ दायर लखनऊ नगर निगम की याचिका पर गुरुवार को यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा था कि नगर निगम शत्रु संपत्ति पर कब्जा करने वाले करदाताओं से संपत्ति कर (Property Tax) की मांग नहीं कर सकता है।
निगम की ओर से टैक्स मांगने के फैसले को चुनौती
विचाराधीन संपत्ति उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महात्मा गांधी मार्ग पर स्थित है। इसका स्वामित्व कभी महमूदाबाद के राजा मोहम्मद अमीर अहमद खान के पास था, जो 1947 में पाकिस्तान चले गए थे। हालांकि, राजा के पुत्र और पत्नी भारत में रह गए थे। बाद में राजा की मौत के बाद उन्होंने इस संपत्ति को वापस मांगा था। उक्त संपत्ति का एक हिस्सा वर्तमान में प्रतिवादी कोहली ब्रदर्स कलर लैब प्राइवेट लिमिटेड के कब्जे में हैं, जिन्होंने निगम की ओर से संपत्ति और अन्य कर मांगे जाने को चुनौती दी थी।
भारत सरकार को भी कोई स्वामित्व अधिकार हस्तांतरित नहीं
जस्टिस नागरत्ना ने 143 पेज के अपने फैसले में कहा, एक बार उक्त संपत्ति संरक्षक के कब्जे में चले जाने के बाद भारत सरकार शत्रु संपत्तियों का स्वामित्व नहीं ले सकती। ऐसा इसलिए इसलिए, क्योंकि शत्रु संपत्ति के मालिक से संरक्षक को स्वामित्व का कोई हस्तांतरण नहीं होता है। इसके परिणामस्वरूप भारत सरकार को भी कोई स्वामित्व अधिकार हस्तांतरित नहीं होता है। इसलिए, संरक्षकों के कब्जे वाली शत्रु संपत्तियां केंद्र सरकार की संपत्ति नहीं है।
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टैक्स भुगतान के लिए नोटिस पर अदालत की टिप्पणी
पीठ ने कहा कि शत्रु संपत्ति पर केंद्र की ओर से नियुक्त संरक्षक उक्त संपत्ति का मात्र ट्रस्टी भर है। वह उसका मालिक नहीं हो जाता। इसलिए उसे करों में छूट पाने का अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रतिवादी की तरफ से अब तक जमा किए गए करों को नागरिक निकाय वापस नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि अगर अब तक टैक्स भुगतान के लिए नोटिस नहीं जारी किया गया हो तो अब वह जारी नहीं किया जाएगा। लेकिन वर्ष 2024-25 से अपीलकर्ता उक्त संपत्ति पर कर और उपकर लेने का अधिकारी होगा।
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निगम की ओर से टैक्स मांगने के फैसले को चुनौती
विचाराधीन संपत्ति उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महात्मा गांधी मार्ग पर स्थित है। इसका स्वामित्व कभी महमूदाबाद के राजा मोहम्मद अमीर अहमद खान के पास था, जो 1947 में पाकिस्तान चले गए थे। हालांकि, राजा के पुत्र और पत्नी भारत में रह गए थे। बाद में राजा की मौत के बाद उन्होंने इस संपत्ति को वापस मांगा था। उक्त संपत्ति का एक हिस्सा वर्तमान में प्रतिवादी कोहली ब्रदर्स कलर लैब प्राइवेट लिमिटेड के कब्जे में हैं, जिन्होंने निगम की ओर से संपत्ति और अन्य कर मांगे जाने को चुनौती दी थी।
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भारत सरकार को भी कोई स्वामित्व अधिकार हस्तांतरित नहीं
जस्टिस नागरत्ना ने 143 पेज के अपने फैसले में कहा, एक बार उक्त संपत्ति संरक्षक के कब्जे में चले जाने के बाद भारत सरकार शत्रु संपत्तियों का स्वामित्व नहीं ले सकती। ऐसा इसलिए इसलिए, क्योंकि शत्रु संपत्ति के मालिक से संरक्षक को स्वामित्व का कोई हस्तांतरण नहीं होता है। इसके परिणामस्वरूप भारत सरकार को भी कोई स्वामित्व अधिकार हस्तांतरित नहीं होता है। इसलिए, संरक्षकों के कब्जे वाली शत्रु संपत्तियां केंद्र सरकार की संपत्ति नहीं है।
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टैक्स भुगतान के लिए नोटिस पर अदालत की टिप्पणी
पीठ ने कहा कि शत्रु संपत्ति पर केंद्र की ओर से नियुक्त संरक्षक उक्त संपत्ति का मात्र ट्रस्टी भर है। वह उसका मालिक नहीं हो जाता। इसलिए उसे करों में छूट पाने का अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रतिवादी की तरफ से अब तक जमा किए गए करों को नागरिक निकाय वापस नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि अगर अब तक टैक्स भुगतान के लिए नोटिस नहीं जारी किया गया हो तो अब वह जारी नहीं किया जाएगा। लेकिन वर्ष 2024-25 से अपीलकर्ता उक्त संपत्ति पर कर और उपकर लेने का अधिकारी होगा।