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स्वेज नहर संकट: मिस्र मांगेगा एक अरब डॉलर का हर्जाना, एक हफ्ते बंद रही थी जहाजों की आवाजाही
Thu, 01 Apr 2021 07:25 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काहिरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काहिरा
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 01 Apr 2021 07:25 PM IST
सार
- स्वेज नहर से जहाज तो निकला लेकिन अब हर्जाने की जंग
- स्वेज कैनाल अथॉरिटी ने लगाया नुकसानी का हिसाब
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मिस्र के स्वेज नहर में इस तरह फंसा था पनामा का जहाज
- फोटो : Twitter
विस्तार
हाल ही में स्वेज नहर में फंसे पनामा की कंपनी एवर गिवन के विशाल मालवाहक पोत एवर ग्रीन के मामले में मिस्र एक अरब डॉलर यानी 73 अरब रुपये से ज्यादा का हर्जाना मांगने जा रहा है। करीब 400 मीटर लंबे मालवाहक जहाज के नहर के दक्षिण हिस्से में फंस जाने के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही करीब सात दिन बंद रही थी।
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यह जहाज मिस्र की ग्रेट बिटर खाड़ी में 23 मार्च को फंस गया था। भारी मशक्कत के बाद उसे सोमवार को निकाला जा सका। इस कारण सैकड़ों जहाज स्वेज नहर के आसपास अटक गए थे। फंसे जहाज के चालक दल में 23 भारतीय शामिल थे।
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स्वेज नहर मिस्र के आधिपत्य में है और वहां से जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन व मेंटेनेंस का काम वहीं करता है। उसका कहना है कि सात दिन तक यह पोत फंसा रहने के कारण उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इससे इस अहम नहर के जरिए होने वाला समुद्री परिवहन ठप पड़ गया था।
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इस तरह हुआ नुकसान
स्वेज कैनाल अथॉरिटी का कहना है कि मोटे तौर पर उसे सात दिन में करीब 1 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अथॉरिटी यहां से गुजरने वाले पोतों से पारगमन शुल्क वसूलती है। इसके अलावा फंसे जहाज को निकालने के दौरान भी काफी नुकसान व यांत्रिक खर्च हुआ। उपकरणों व श्रमिकों की लागत भी लगी। यह सब जोड़कर संबंधित कंपनी से हर्जाना वसूला जाएगा।
अथॉरिटी के ओसामा रैबी ने बुधवार को मिस्र के एक स्थानीय टीवी चैनल को यह जानकारी दी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हर्जाने की राशि किससे वसूली जाएगी, लेकिन अनुमान है कि पनामा की कंपनी एवर गिवन को ही इस बारे में नोटिस दिया जाएगा।