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कोरोना महामारी: घर में आए नन्हे मेहमान के लिए माता-पिता ने निभाई बेहतर जिम्मेदारी
Sun, 11 Jul 2021 05:47 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, ओटावा।
एजेंसी, ओटावा।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 11 Jul 2021 05:47 AM IST
सार
- लॉकडाउन में तनाव और अवसाद नहीं प्यार और अपनत्व देखने को मिला
- कनाडा के वैज्ञानिकों का शोध, 2019 की तुलना में 2020 में स्थिति बेहतर
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : istock
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विस्तार
कोरोना महामारी के बीच तनाव व अवसाद के साथ मानसिक तकलीफें बढ़ी हैं। वैज्ञानिकों ने कोरोना महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक के अध्ययन में पाया है कि इस दौरान अभिभावकों में बच्चों को लेकर स्वभाव बेहतर हुआ है। घर में आए नन्हें मेहमान को लेकर दोनों अभिभावकों ने अपनी जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभाई है। इसके साथ ही जोड़ों में अपनत्व और प्यार भी बेहतर देखने को मिला है।
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यूनिवर्सिटी द क्यूबेक, मोंट्रियल के वैज्ञानिकों का कहना है कि नवजात बच्चों को लेकर माता-पिता में 2019 की तुलना में 2020 में अपनत्व और प्यार के साथ सहयोग की भावना बढ़ी है। पिता ने अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाई जबकि मां अपने जीवन को लेकर संतुष्ट दिखीं। नवजात के साथ पति-पत्नी के बीच संबंध भी मधुर रहे।
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देखभाल में देखी गई गिरावट
लॉकडाउन में बच्चे की देखभाल में गिरावट देखी गई। इसका कारण पहली बार मां बनने वाली महिला को अन्य लोगों का साथ और सलाह नहीं मिली जिसके कारण ऐसी बात सामने आई है। हालांकि घर में अभिभावकों के रहने के कारण बच्चे की देखभाल पहले से बेहतर रही और बच्चे के साथ हर समय कोई न कोई अभिभावक रहा जिससे बच्चे का समय खुशहाल गुजरा।
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90 फीसदी अभिभावक बच्चे को लेकर चिंतित
वैज्ञानिकों का कहना है कि 90 फीसदी अभिभावक कोरोना महामारी के बीच बच्चे को लेकर चिंतित रहे। 85 फीसदी अभिभावकों ने बच्चों की देखभाल में अधिक समय दिया और अपनी जिम्मेदारियों का संयुक्त रूप से निर्वाहन किया। लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों ने पूरी नींद ली, उसी का नतीजा रहा कि बच्चे और नवजात के साथ अभिभावकों अधिक समय बिताया और खुश भी रहे।