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Strait of Hormuz: अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी लगाने के लिए तैयार, ईरान के पलटवार के बाद भी पीछे नहीं हट रहे ट्रंप

Mon, 13 Apr 2026 07:56 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 13 Apr 2026 07:56 PM IST
सार

अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी शुरू करने के लिए वो पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के नाकेबंदी वाले फैसेल के बाद होर्मुज में तनाव बढ़ गया है। ईरान ने इस फैसले को अवैध और समुद्री डकैती बताया। साथ ही अमेरिका को बड़ी चेतवानी भी दी।

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Strait of Hormuz US Navy Ready to Impose Blockade Trump not Backing Down Even After Irans Retaliation
होर्मुज की अहमियत और इसका इतिहास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने अल जजीरा को बताया कि सेना नौसैनिक नाकेबंदी लगाने और उसे बनाए रखने के लिए तैयार है। अधिकारी ने आगे बताया कि फिलहाल नियमों के उल्लंघन के लिए रूल्स ऑफ एंगेजमेंट यानी मुठभेड़ के नियम तय नहीं किए गए हैं। अधिकारी ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तैयारी के साथ इस कदम को तब तक लागू रखने के लिए पर्याप्त हैं। जब तक इसकी जरूरत होगी। यह सब ट्रंप के फैसलों के अनुरूप है।
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नाकेबंदी वाले फैसले पर क्या बोला ईरान?
ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इस नाकेबंदी को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गैरकानूनी बताया है। उन्होंने इसे “समुद्री डकैती” कहा और चेतावनी दी कि होर्मुज के पास आने वाले किसी भी युद्धपोत को संघर्षविराम का उल्लंघन माना जाएगा। इससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
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ट्रंप के एलान पर यूके का क्या रुख?
यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने चेतावनी जारी की है कि ईरान के तटीय इलाकों और बंदरगाहों पर समुद्री प्रतिबंध लागू हो गए हैं। यह सभी देशों के जहाजों पर लागू होंगे। हालांकि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा जारी रह सकती है, लेकिन जहाजों को सैन्य निगरानी और जांच का सामना करना पड़ सकता है।


मेरिका को सहयोगियों का समर्थन कितना?
अमेरिका के इस फैसले को उसके सहयोगियों का पूरा समर्थन नहीं मिला है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने साफ किया कि उनका देश नाकेबंदी का समर्थन नहीं करता। वहीं यूरोपीय आयोग ने समुद्री रास्तों की आजादी बनाए रखने पर जोर दिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि इस मुद्दे पर पश्चिमी देशों में भी मतभेद हैं।
 
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस कदम के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना चाहता है, क्योंकि उसकी आय का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, ऐसे में इस नाकेबंदी का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

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