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Strait of Hormuz: होर्मुज में एक चिंगारी से कैसे आमने-सामने आ सकते हैं अमेरिका और चीन

Tue, 14 Apr 2026 01:35 PM IST
Zahid Khan जाहिद खान
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:35 PM IST
सार

होर्मुज के रास्ते में चीन और अमेरिका का आमना सामना पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अगर समुद्री व्यापार के इस रास्ते पर किसी चीनी जहाज को रोका गया तो यह केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रहेगा।
 

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Strait of Hormuz conflict between USA and China tension over oil tankers and global trade impact
ईरान में होर्मुज जलडमरूमध्य में रास्ता बदला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होर्मुज को अब सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच की तनातनी मानना बड़ी भूल होगी। असली खतरा अब इससे भी बड़ा है। अगर इस रास्ते में किसी चीनी टैंकर को रोक लिया गया, तो मामला सिर्फ एक जहाज, एक समुद्री जांच या एक दबाव भरी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। वह सीधे अमेरिका और चीन के बीच टकराव का दरवाजा खोल सकता है और जब दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें आमने-सामने आती हैं, तो असर सिर्फ समंदर तक नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया उसकी चपेट में आ जाती है।
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अब हालात धीरे-धीरे उसी दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं, जहां ईरान पीछे छूट सकता है और सामने सीधी तस्वीर अमेरिका और चीन की बन सकती है। वजह साफ है। होर्मुज वह रास्ता है, जिससे दुनिया का बड़ा तेल गुजरता है और चीन इस पूरी कहानी में कोई किनारे बैठा तमाशबीन नहीं है। उसकी ऊर्जा जरूरत, उसका व्यापार, उसकी फैक्ट्रियां, उसका समुद्री कारोबार, सब किसी न किसी तरह इस रास्ते से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अगर अमेरिका यहां अपनी ताकत दिखाने के लिए किसी चीनी टैंकर को रोकता है, तो चीन इसे मामूली घटना मानकर आगे नहीं बढ़ जाएगा। वह इसे सीधी चुनौती मानेगा।
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यहीं से मामला भारी हो जाता है क्योंकि यह सिर्फ समुद्र में एक रोक नहीं होगी, यह संदेश होगा और चीन ऐसे संदेशों को बहुत ध्यान से पढ़ता है। वह समझेगा कि अमेरिका अब ईरान पर दबाव बनाते-बनाते चीन के हितों तक पहुंच गया है। इसका मतलब यह होगा कि अब बात सिर्फ पश्चिम एशिया की नहीं रही, अब इसमें दुनिया की बड़ी ताकतों का अहंकार, असर और दबदबा भी शामिल हो गया है और जहां यह चीजें शामिल हो जाएं, वहां मामला जल्दी शांत नहीं होता।
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चीन की ताकत सिर्फ उसकी फौज में नहीं है। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका फैलाव है। कारोबार में, बाजार में, बंदरगाहों में, माल ढुलाई में, कारखानों में, दुनिया की सप्लाई व्यवस्था में, हर जगह उसकी पकड़ है इसलिए उसका जवाब सिर्फ बंदूक से नहीं आएगा। वह व्यापार से जवाब दे सकता है। वह दबाव से जवाब दे सकता है। वह अपने बाजार का इस्तेमाल कर सकता है। वह दुनिया को यह भी दिखा सकता है कि अगर उसके हितों को छेड़ा गया, तो इसकी कीमत सिर्फ एक देश नहीं, कई देश चुकाएंगे। यही वजह है कि अमेरिका और चीन के बीच सीधे फौजी टकराव नहीं दिखता, लेकिन उसका असर बहुत दूर तक जाता है।

अमेरिका भी यह बात अच्छी तरह जानता है। उसे मालूम है कि चीन को छूना और चीन को ललकारना दो अलग बातें हैं इसलिए होर्मुज में उठाया गया एक कदम केवल समुद्री कार्रवाई नहीं होगा, वह एक तरह का इम्तिहान होगा। देखना यह होगा कि चीन सिर्फ बयान देता है या जवाब की नई लाइन खींचता है और अगर चीन ने जवाब में अपनी मौजूदगी बढ़ाई, अपने जहाजों की सुरक्षा बढ़ाई या अपने असर वाले मुल्कों को साथ खड़ा करना शुरू कर दिया, तो मामला और खुल जाएगा।

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फिर दुनिया का मिजाज बदलना शुरू होगा। छोटे देश चुप नहीं रह पाएंगे। उन्हें देखना होगा कि किस तरफ खड़ा होना है। बाजार पहले ही डर जाएंगे। तेल पर असर पड़ेगा। माल ढुलाई पर असर पड़ेगा। बीमा महंगा होगा। कारोबार धीमा होगा और फिर वही कहानी शुरू होगी, जिसका सबसे बुरा असर आम आदमी पर आता है। पेट्रोल महंगा, गैस महंगी, सामान महंगा, और ऊपर से डर अलग। बड़ी ताकतें अपने-अपने हिसाब से चाल चलती हैं, लेकिन उनकी कीमत आखिर में वही आदमी चुकाता है, जो न वॉशिंगटन में बैठा है, न बीजिंग में।

सबसे खतरनाक बात यह है कि ऐसे टकराव हमेशा बड़े ऐलान से शुरू नहीं होते। कई बार सिर्फ एक रोक, एक तलाशी, एक चेतावनी, एक गलत अंदाजा और हालात वहां पहुंच जाते हैं, जहां से वापसी मुश्किल हो जाती है। इतिहास में कई तनाव ऐसे रहे हैं, जो पहले दबाव के खेल की तरह शुरू हुए, लेकिन बाद में बड़े संकट में बदल गए। अभी भी ऊपर से सब कुछ नपा-तुला लग रहा है। हर पक्ष अपने कदम सोच-समझकर रख रहा है, लेकिन यही वह दौर होता है, जिसमें एक छोटी भूल बहुत बड़ी आग भड़का सकती है।


इसलिए होर्मुज को सिर्फ तेल का रास्ता समझना अब काफी नहीं है। यह अब दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच नब्ज टटोलने की जगह बनता जा रहा है। यहां अमेरिका अगर बहुत आगे बढ़ा तो चीन पीछे हटने वाला नहीं दिखेगा और अगर चीन ने जवाब में अपने हितों की खुली हिफाजत शुरू कर दी तो फिर मामला सिर्फ ईरान, इस्राइल, लेबनान या खाड़ी तक सीमित नहीं रहेगा। फिर यह साफ अमेरिका-चीन टकराव की कहानी बन जाएगी।

ऐसे में होर्मुज में किसी चीनी टैंकर को रोकना मामूली समुद्री घटना नहीं होगी। यह वह चिंगारी बन सकती है, जो ईरान-अमेरिका तनाव को पीछे छोड़कर सीधे अमेरिका-चीन टकराव का रास्ता खोल दे और जब दो बड़ी ताकतें आमने-सामने आती हैं तो समंदर से उठी हलचल दुनिया की हर जेब तक पहुंचती है।

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