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जीवन धारा: विज्ञान जीने का सलीका भी सिखाता है, सवाल पूछते रहिए और अपने काम को बोलने दीजिए

Sun, 13 Sep 2026 10:42 AM IST
ज्योति भास्कर जेनिफर डूडना।
जेनिफर डूडना। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 13 Sep 2026 10:42 AM IST
सार

विज्ञान केवल किताबों में दिए गए तथ्यों को याद करने का नाम नहीं है। विज्ञान सवाल पूछने, किसी समस्या को समझने व फिर उसके जवाब की तलाश करने का भी नाम है।

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Science also teaches art of living keep asking questions and let your work speak for itself
मेडिटेशन (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट ग्राफिक्स / एजेंसी

विस्तार

जब मैं हाईस्कूल में थी, तब एक दिन मेरे मार्गदर्शक सलाहकार ने मुझे अपने कार्यालय में बुलाकर पूछा, ‘बड़ी होकर तुम क्या बनना चाहती हो?’ मैंने कहा, ‘मैं वैज्ञानिक बनना चाहती हूं।’ उन्होंने कहा, ‘लड़कियां वैज्ञानिक नहीं बनतीं।’ मैंने तय किया कि किसी दूसरे व्यक्ति की सोच यह तय नहीं करेगी कि मैं अपने जीवन में क्या कर सकती हूं। मैंने उस बात का जवाब किसी बहस से नहीं दिया। मैंने विज्ञान को चुना और अपने काम से जवाब देने का फैसला किया। समय के साथ मैंने अपने आसपास की प्रकृति को ध्यान से देखना सीखा।

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प्रकृति के ऐसे कई रूप थे, जिन्हें देखकर मेरे मन में सवाल उठते थे। मैं सोचती थी कि ये जीव अपने वातावरण में कैसे रहते हैं, वे समय के साथ कैसे बदलते हैंै। शायद इन्हीं छोटी-छोटी बातों ने मुझे रुककर सोचने और चीजों को थोड़ा गहराई से समझने की आदत विकसित की।
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रसायन विज्ञान की शिक्षिका ने मुझे विज्ञान को एक अलग नजरिये से देखने का मौका दिया। उन्होंने हमें सिखाया कि विज्ञान केवल किताबों में दिए गए तथ्यों को याद करने का नाम नहीं है। विज्ञान सवाल पूछने, किसी समस्या को समझने व फिर उसके जवाब की तलाश करने का नाम है। आगे चलकर यही जिज्ञासा मुझे जीन व डीएनए के अध्ययन तक ले गई। विज्ञान किसी से यह नहीं पूछता कि आप पुरुष हैं या महिला। वह केवल यह पूछता है कि आपके सवाल क्या हैं, आपकी जिज्ञासा कितनी गहरी है और आप किसी उत्तर को खोजने के लिए कितनी मेहनत करने को तैयार हैं।
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मेरा मानना है कि विज्ञान और तकनीक बहुत बड़ी संभावनाएं खोल सकते हैं, लेकिन उनके साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। अगर कोई आपके सपने को छोटा समझता है, तो उसे अपनी सीमा मत बनने दीजिए। लगातार सीखते रहिए, सवाल पूछते रहिए और अपने काम को बोलने दीजिए। 

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