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Sri Lanka Crisis: चुनाव में देरी को लेकर विपक्षी दलों ने निकाली रैली, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले

Sun, 26 Feb 2023 09:24 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 26 Feb 2023 09:24 PM IST
सार

रैली में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार से स्थानीय निकाय चुनाव कराने की मांग की गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की और मध्य कोलंबो के यूनियन प्लेस इलाके में दो बार पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस के गोले छोड़े।

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Sri Lankan opposition led protest march comes under police tear gas water cannon attack
श्रीलंका में विपक्षी दलों का प्रदर्शन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्रीलंका में स्थानीय निकाय चुनावों में देरी के खिलाफ मुख्य विपक्षी गठबंधन 'नेशनल पीपुल्स पावर' की ओर से विरोध रैली का आयोजन किया गया। इसे तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने रविवार को आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं। दरअसल देश के चुनाव आयोग ने एक दिन पहले औपचारिक रूप से घोषणा की थी कि स्थानीय निकाय चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 9 मार्च को नहीं होंगे और नई तारीख 3 मार्च को अधिसूचित की जाएगी। 

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नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) की ओर से आयोजित रैली में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार से स्थानीय निकाय चुनाव कराने की मांग की गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की और मध्य कोलंबो के यूनियन प्लेस इलाके में दो बार पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस ने एनपीपी नेता अनुरा कुमार दिसानायक सहित 26 लोगों को रविवार रात आठ बजे तक राष्ट्रपति कार्यालय और राष्ट्रपति भवन के आसपास के इलाकों में प्रवेश से रोक दिया। इसके लिए पुलिस ने कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट से आदेश प्राप्त किया। 
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रैली में एनपीपी नेताओं के हाथों में एक बैनर था, जिस पर लिखा हुआ था- 'चुनाव न कराकर लोकतंत्र को दफन करने की सरकार की कायराना कोशिश को परास्त करें।'  समगी जन बालावेगया (एसजेबी) जैसे विपक्षी दलों ने देश के विक्रमसिंघे पर आरोप लगाया कि उन्होंने ट्रेजरी से मिलने वाले फंड को रोककर स्थानीय निकाय चुनावों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। विक्रमसिंघे राष्ट्रपति के अलावा देश के वित्त मंत्री भी हैं। विपक्षी दल उन पर आरोप लगा रहे हैं कि वह हार के डर से चुनाव न कराने के लिए राज्य के अधिकारियों और चुनाव आयोग को प्रभावित कर रहे हैं। 
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चार साल के कार्यकाल के लिए 340 स्थानीय परिषदों में नए प्रशासन के लिए चुनाव होने हैं। आर्थिक संकट के चलते पिछले साल मार्च में इसे स्थगित कर दिया गया था। तब से यह चुनाव नहीं हुए हैं। सरकार बार-बार संकेत दे रही है कि आर्थिक संकट को देखते हुए चुनाव कराने के लिए उपयुक्त समय नहीं है। सरकार का कहना है कि दस अरब रुपये की लागत से चुनाव कराने से राज्य को धन की कमी का सामना करना पड़ेगा और इससे वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। 

 
चुनावों को लेकर अनिश्चितता हैं, बावजूद इसके मुख्य विपक्षी पार्टी जोर-शोर से प्रचार कर रही है। माना जाता है कि उसके पास बड़ी संख्या में सीटों पर नियंत्रण हासिल करने का अच्छा मौका है। विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी के कारण श्रीलंका 2022 से अभूतपूर्व वित्तीय संकट से जूझ रहा है। देश की आजादी के बाद से द्वीप राष्ट्र सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। आर्थिक संकट के कारण ताकतवर राजपक्षे परिवार राजनीति से बाहर है। 

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