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Sri Lanka Tamil Issue: श्रीलंका इसका हल निकाले कैसे, तमिल चाहते हैं संघीय व्यवस्था, सिंहली इसके लिए तैयार नहीं

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 26 Nov 2022 03:01 PM IST
सार

Sri Lanka Tamil Issue: श्रीलंका सरकार और तमिल आतंकवादी संगठन- लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के बीच गृह युद्ध 2009 में खत्म हो गया था। लेकिन तमिलों के राजनीतिक मुद्दे आज तक हल नहीं हुए हैं। इस बीच गृह युद्ध के दौरान हुए मानव अधिकारों के व्यापक हनन का आरोप लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बुना हुआ है...

Sri Lanka Tamil Issue
Sri Lanka Tamil Issue - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

तमिल समस्या का बातचीत से हल निकालने की राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की कोशिश को एक प्रमुख तमिल संगठन का समर्थन मिला है। तमिल नेशनल एलायंस (टीएनए) ने कहा है कि तमिल समस्या को हल करने की हर गंभीर कोशिश में वह गंभीरता से शामिल होगा। लेकिन टीएनएन के सांसद एमए सुमंतिरन ने यह भी साफ कहा कि उनका संगठन संघीय समाधान चाहता है।

सुमंतिरन ने कहा है- ‘हमेशा की तरह हम हर गंभीर कोशिश में रचनात्मक भूमिका निभाएंगे। लेकिन कोई फर्जी प्रक्रिया नहीं चलने देंगे।’ राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा- ‘आपके कदम आपकी बातों से भी अधिक शक्तिशाली होने चाहिए। अब तक हमें सिर्फ बातें सुनाई गई हैं।’

इसी हफ्ते विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के विपक्षी दलों के सामने दशकों पुरानी तमिल समस्या का बातचीत से समाधान निकालने की अपनी योजना पेश की थी। इस कोशिश में उन्होंने अगले 11 दिसंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक सुमंतिरन ने संघीय समाधान की बात कह कर संकेत दिया है कि इस मामले में तमिल संगठनों के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। श्रीलंका की सिंहली आबादी में जनाधार रखने वाली पार्टियां ऐसे समाधान के खिलाफ हैं। वे श्रीलंका के एकात्मक स्वरूप को बनाए रखना चाहती हैं। इसीलिए समझा जा रहा है कि टीएनए के वार्ता प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा जताने के बावजूद असल समाधान ढूंढना अभी भी कठिन बना हुआ है।

विक्रमसिंघे ने कहा है कि बातचीत में हर मुद्दे या मांग को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा है- ‘इसके पहले कि दूसरे कदम उठाए जाएं, बुनियादी बदलाव लाने की जरूरत है।’ श्रीलंका सरकार और तमिल आतंकवादी संगठन- लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के बीच गृह युद्ध 2009 में खत्म हो गया था। लेकिन तमिलों के राजनीतिक मुद्दे आज तक हल नहीं हुए हैं। इस बीच गृह युद्ध के दौरान हुए मानव अधिकारों के व्यापक हनन का आरोप लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बुना हुआ है। इसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने इस मामले में श्रीलंका के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। जानकारों के मुताबिक विक्रमसिंघे की मुख्य चिंता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर श्रीलंका को ऐसी आलोचनाओं से बचाने की है।

तमिल अल्पसंख्यक मुख्य रूप से श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी इलाके में रहते हैं। वे वहां स्वायत्त प्रांत बनाने की मांग करते रहे हैं। सुमंतिरन ने संघीय समाधान की बात कह कर इसी मांग को दोहराया है। जबकि देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी श्रीलंका पोडुजना पेरामुना (एसएलपीपी) संघीय समाधान के बिल्कुल खिलाफ है। विक्रमसिंघे की ताजा पहल के बाद इस पार्टी के सांसद गेविंदु कुमारातुंगा ने आगाह किया है कि श्रीलंका के एकात्मक स्वरूप पर कोई समझौता उसे मंजूर नहीं होगा।

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि संघीय व्यवस्था की मांग पर सिंहली बहुसंख्यकों की उग्र भावनाएं सामने आती रही हैं। एसएलपीपी सांसद ने इस समुदाय की भावनाओं को ही जताते हुए बीते बुधवार को संसद में राष्ट्रपति से मुखातिब होकर कहा था- ‘अगर आप एकात्मक श्रीलंका पर आम सहमति बनाना चाहते हैं, तो हम सहमत हैं। लेकिन इसके बाहर जाकर कोई बात देश के बहुसंख्यकों को मंजूर नहीं होगी। हकीकत यह है कि हमारे सैनिकों ने श्रीलंका के एकात्मक स्वरूप की रक्षा के लिए अपनी जानें कुर्बान की हैं।’

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