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Sri Lanka Crisis: प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे बोले, संविधान में 21वें संशोधन से हमारी संसद मजबूत होगी
Sun, 29 May 2022 09:39 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 29 May 2022 09:39 PM IST
सार
प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि संविधान में 21वां संशोधन पारित होगा और संसद मजबूत होगी। यह कदम संसद को और शक्तिशाली बनाने के लिए और राष्ट्रपति को असेंबली के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए है।
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श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने रविवार को देश के संविधान में 21वें संशोधन की वकालत की। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों को सीमित करने के साथ शासन में संसद की भूमिका को बढ़ाएगा। श्रीलंका इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है।
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वर्तमान में चल रहे संविधान सुधार कार्यक्रम पर एक टेलीविजन पर प्रसारित एक विशेष बयान में विक्रमसिंघे ने कहा कि 21वां संशोधन अभूतपूर्व वित्तीय संकट से जूझ रहे श्रीलंका को कई मायनों में मदद पहुंचाएगा। मौद्रिक शक्तियों के प्रयोग से संसद को ये अधिकार देने के लिए मौजूदा कानूनों को मजबूत करने की जरूरत है।
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'कमजोर हो चुकी संसद को फिर से मजबूत करना आवश्यक है'
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड और भारत जैसे उदाहरणों का पालन करते हुए हम एक मजबूत और अधिक शक्तिशाली कानून प्रस्तावित कर रहे हैं। संसद के कामकाज का जिक्र करते हुए विक्रमसिंघे ने कहा कि सदन को दी गई शक्तियों को कमजोर किया गया है और इसे फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है।
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विक्रमसिंघे ने कहा कि संविधान में 21वां संशोधन पारित होगा और संसद मजबूत होगी। यह कदम संसद को और शक्तिशाली बनाने के लिए और राष्ट्रपति को असेंबली के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि 20वें संशोधन के चलते संसदीय शक्तियों के कमजोर हो जाने के कारण संसद का कामकाज पंगु हो गया है।
राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर 50वें दिन भी प्रदर्शन जारी
उधर, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार विरोधी प्रदर्शन शनिवार को लगातार 50वें दिन भी जारी रहा। पुलिस ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं। गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा श्रीलंका दिवालिया होने के कगार पर है।
द्वीपीय देश में इस समय लोगों को भोजन, ईंधन, दवाओं और रसोई गैस से लेकर माचिस तक की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 50 दिन से राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवेश द्वार पर बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके कारण वहां राजनीतिक अशांति पैदा हो गयी है।