फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Sri Lanka in trap of China trying to get out of the economic crisis

विदेशी कर्ज की मार: आर्थिक संकट से निकलने की कोशिश में चीन के जाल में फंस रहा है श्रीलंका

Thu, 27 Jan 2022 04:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 Jan 2022 04:13 PM IST
सार

श्रीलंका को 2022 में 4.5 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। जबकि उसके विदेश मुद्रा भंडार में सिर्फ 2.5 बिलियन डॉलर की रकम है। इस भंडार में डॉलर बढ़ाने के लिए श्रीलंका ने इसी महीने भारत से मदद ली। भारत के साथ उसने 40 करोड़ डॉलर का करेंसी स्वैप किया...

विज्ञापन
Sri Lanka in trap of China trying to get out of the economic crisis
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

मौजूदा आर्थिक संकट के बीच जिस तरह श्रीलंका ने चीन के सामने हाथ फैलाया है, उससे यहां कई हलकों में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि गोताबया राजपक्षे की सरकार फौरी राहत के लिए देश की संप्रभुता का सौदा कर रही है। आशंका यह है कि श्रीलंका कर्ज के जाल में फंस जाएगा, जिससे चीन को भारतीय महासागर में अपने पांव और फैलाने का मौका मिलेगा। जिस समय इस क्षेत्र में अमेरिका के साथ चीन का टकराव बढ़ रहा है, हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का अवसर चीन के लिए एक वरदान की तरह है।

विज्ञापन

कोलंबो यात्रा पर आए थे चीनी विदेश मंत्री

इस महीने के मध्य में चीन के विदेश मंत्री वांग यी कोलंबो यात्रा पर आए थे। उस मौके पर श्रीलंका सरकार ने उनसे चीन का कर्ज चुकाने की समयसीमा में छूट देने की गुजारिश की। साथ ही श्रीलंका ने चीन को अपने यहां से होने वाले निर्यात पर अधिक रियायतों की मांग की। 2021 में श्रीलंका से तकरीबन साढ़े तीन बिलियन डॉलर का निर्यात चीन को हुआ था।

विज्ञापन


वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक श्रीलंका को 2022 में 4.5 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। जबकि उसके विदेश मुद्रा भंडार में सिर्फ 2.5 बिलियन डॉलर की रकम है। इस भंडार में डॉलर बढ़ाने के लिए श्रीलंका ने इसी महीने भारत से मदद ली। भारत के साथ उसने 40 करोड़ डॉलर का करेंसी स्वैप (मुद्रा की अदला-बदली) किया। इसके बावजूद उसकी समस्या इतनी गंभीर है कि उसे इस करेंसी स्वैप से मामूली राहत ही मिली है।

विज्ञापन
विज्ञापन

गरीबी रेखा ने नीचे पहुंचे आधे श्रीलंकाई

श्रीलंकाई संसद में विपक्ष के सदस्य और जाने-माने अर्थशास्त्री हर्षा डि सिल्वा ने कुछ दिन पहले संसद में कहा कि जनवरी 2023 आते-आते श्रीलंका के विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो चुका होगा। बल्कि उसमें कुल देनदारी की तुलना में लगभग 44 करोड़ डॉलर की कमी रहेगी। इस सूरत को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों मूडीज और फिच ने श्रीलंका का दर्जा बी से गिरा कर सी कर दिया है। विश्व बैंक ने कहा है कि बीते दो साल में आधे से ज्यादा श्रीलंकाई गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं। देश में पिछले नवंबर में मुद्रास्फीति की दर 11.1 फीसदी तक पहुंच गई थी। इस वजह से रोजमर्रा की जरूरत की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गई हैँ।


इस संकट के बीच राजपक्षे सरकार जिस तरह से खुद को चीन पर अधिक निर्भर बना रही है, उसको लेकर देश में विरोध बढ़ रहा है। चीन के खिलाफ श्रीलंका में जन भावनाएं पहले से मौजूद हैं। कोलंबो बंदरगाह का ठेका चीन को देने के लिए हुए समझौते के खिलाफ श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट में 18 याचिकाएं दायर की गई थीं। अप्रैल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने इस करार के कई प्रावधानों को अवैध करार दिया था।


श्रीलंका पर इस समय 35 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज है। इसमें श्रीलंका का हिस्सा दस फीसदी ही है। लेकिन अब जिस तरह से राजपक्षे सरकार चीन से और मदद के लिए हाथ फैला रही है, उससे चीन का देश की वित्तीय व्यवस्था पर नियंत्रण कायम हो सकता है। स्थानीय मीडिया में छप रही रिपोर्टों से साफ है कि इस स्थिति को लेकर श्रीलंका के लोगों में चिंता बढ़ रही है। ये अंदेशा गहरा रहा है कि मौजूदा संकट से निकलने की कोशिश में श्रीलंका कहीं कहीं लंबे समय के लिए कर्ज के जाल में ना फंस जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed