Sri Lanka: सरकार अब किसी आंदोलन समर्थक को बख्शने के मूड में नहीं, शुरू हुआ दमन
Sri Lanka: श्रीलंका सरकार ने स्कॉटलैंड की नागरिक और रिसर्चर केलिह फ्रेजर का वीजा रद्द कर दिया है। फ्रेजर देश में चार महीने से ज्यादा समय से चल रहे अरागलया का डॉक्यूमेंटेशन कर रही थीं...
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श्रीलंका में अरागलया (सरकार विरोधी आंदोलन) के सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अब उनके समर्थकों का दमन भी शुरू हो गया है। श्रीलंका सरकार ने स्कॉटलैंड की नागरिक और रिसर्चर केलिह फ्रेजर का वीजा रद्द कर दिया है। फ्रेजर देश में चार महीने से ज्यादा समय से चल रहे अरागलया का डॉक्यूमेंटेशन कर रही थीं। साथ ही वे इस आंदोलन के बारे में जुटाई गई जानकारियां लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रही थीं।
अब सामने आई खबर के मुताबिक श्रीलंका के आव्रजन विभाग के अधिकारी बीते दो अगस्त को फ्रेजर के निवास पर गए थे। तब उन्होंने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया। अब खबर आई है कि उनका वीजा रद्द कर दिया गया है। ये पूरा प्रकरण इसी हफ्ते सामने आया, जब फ्रेजर ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने लिखा- ‘श्रीलंका में अगर सरकारी हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो आपके साथ यही होगा।’ फ्रेजर से 15 अगस्त तक श्रीलंका से चले जाने को कहा गया है।
फ्रेजर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है- ‘मुझे इस बात गर्व है कि मैं इस आंदोलन का हिस्सा बनी। अभी मुझे यहां कई सोशल मीडिया कार्य करने थे, जिससे बहुतों को लाभ होता। लेकिन देश से बाहर निकाल कर मुझ पर और इस देश पर जबरदस्त प्रहार किया गया है। ऐसा लगता है कि वर्तमान शासक जनता को ही अपना दुश्मन मानने लगे हैं। क्या यह देशवासियों के लिए उचित है?’
फ्रेजर ने बताया है कि अभी श्रीलंका से बाहर जाने के लिए विमान के खर्च की व्यवस्था उन्होंने नहीं की है। उन्होंने बताया कि उनका सारा धन श्रीलंकाई मुद्रा में जमा है। जबकि श्रीलंका के बैंक विदेशी मुद्रा में लेन-देन की इजाजत नहीं दे रहे हैं।
उधर पुलिस का आरोप है कि फ्रेजर सोशल मीडिया पर श्रीलंका के बारे में ‘नकारात्मक सूचनाएं’ शेयर कर रही थीं। पुलिस प्रवक्ता निहाल थुलडुवा ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से कहा- ‘एक विदेशी नागरिक हमारे देश के बारे में ऐसे निगेटिव कंटेंट शेयर करे, यह उचित नहीं है। वे कोई पत्रकार नहीं हैं, जो यहां गोटा गो होमा आंदोलन को कवर करने आई हों।’
फ्रेजर को देश से निकालने की खबर आते ही अरागलया कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों में गुस्सा फैल गया। इसका इजहार सोशल मीडिया पर हुआ। सोशल मीडिया पर फ्रेजर समर्थक पोस्ट की भरमार हो गई। इन पोस्ट्स में कहा गया कि फ्रेजर ने एतिहासिक अरागलया आंदोलन का दस्तावेजीकरण किया और उसे अपना समर्थन दिया। इसलिए सरकार की ये कार्रवाई दमनकारी है।
कोलंबो में गॉल फेस स्थित गोटा गो होमा स्थल अब खाली हो गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार के सख्त दमन के कारण फिलहाल उन्होंने आंदोलन रोक दिया है। पिछले दो हफ्तों में अरागलया से जुड़े कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में गिरफ्तारी की गई है। सरकार का दावा है कि ये सारी कार्रवाई कानून के मुताबिक हुई है। सरकार ने कहा है कि नौ मई से नौ जुलाई तक देश में हुई हिंसा के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जा सकता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस सरकारी कार्रवाई से देश में गुस्सा पनप रहा है। एक कार्यकर्ता अपना नाम गुप्त रखते हुए मीडियाकर्मियों से कहा- ‘सरकार प्लेकार्ड लेकर चलने के लिए हमें आतंकवादी बता रही है। जबकि यह एक शांतिपूर्ण आंदोलन था, जिस दौरान आतंकवादी कार्रवाइयां सिर्फ सरकार की ओर से की गईं।’