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श्रीलंका: चीन को एक लाख बंदर देगा श्रीलंका! पर्यावरण संरक्षण निकाय की चेतावनी- प्रयोगशालाओं में भेजने की आशंका

Mon, 17 Apr 2023 09:08 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 17 Apr 2023 09:08 PM IST
सार

टोटे मकाक बंदर श्रीलंका की स्थानीय प्रजाति है। भले ही यह श्रीलंका में संरक्षित नहीं है बावजूद इसके बंदरों की यह प्रजाति अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) की लाल सूची में लुप्तप्राय के रूप में वर्गीकृत है। इस वजह से इतनी बड़ी संख्या में बंदरों को निर्यात करने को लेकर पर्यावरणविद् चिंता में हैं।

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Sri Lanka environmental body warns one lakh endangered monkeys from country may end up in testing lab in China
बंदर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे द्वीप राष्ट्र श्रीलंका ने अपने हालात सुधारने के लिए एक खास योजना बनाई है। इसके तहत श्रीलंका अपने यहां से बंदरों की खास और लुप्तप्राय प्रजाति टोके मकाक चीन भेजेगा। बीते सप्ताह देश के कृषि मंत्री अमरवीरा ने इसके बारे में जानकारी दी थी। वहीं, अब श्रीलंका की पर्यावरण संरक्षण संस्था के प्रमुख ने भी इसे लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि लुप्तप्राय बंदर चीन में परीक्षण प्रयोगशालाओं में भेजे जा सकते हैं। बता दें कि चीन श्रीलंका के सबसे बड़े द्विपक्षीय उधारदाताओं में से एक है। 

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दरअसल, टोटे मकाक बंदर श्रीलंका की स्थानीय प्रजाति है। भले ही यह श्रीलंका में संरक्षित नहीं है बावजूद इसके बंदरों की यह प्रजाति अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) की लाल सूची में लुप्तप्राय के रूप में वर्गीकृत है। इस वजह से इतनी बड़ी संख्या में बंदरों को निर्यात करने को लेकर पर्यावरणविद् चिंता में हैं। पर्यावरणविदों की चिंताओं को लेकर सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल जस्टिस (सीईजे) के कार्यकारी निदेशक हेमंथा विथनाज ने कहा है कि 1,00,000 लुप्तप्राय बंदरों का पहला जत्था चीन में परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए जा सकता है।  
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श्रीलंका की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि विथनाज ने कहा कि इन बंदरों का इस्तेमाल कॉस्मेटिक उत्पादों और चिकित्सा प्रयोगों के परीक्षण के लिए किया जा सकता है। इससे पहले कृषि मंत्री अमरवीरा ने कहा था कि 1,000 से अधिक चीनी चिड़ियाघरों में 1,00,000 टोके मकाक के लिए चीन के अनुरोध को श्रीलंका में बड़ी मकाक आबादी को देखते हुए माना जा सकता है। उनके इस दावे को विथनाज ने खारिज कर दिया।  
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खेती को पहुंचाते हैं नुकसान
इससे पहले, चीन को बंदर निर्यात करने के सरकार के प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के महासचिव पलिथा रेंज बंडारा ने कहा कि बंदरों के साथ अगर संभव हो तो मोर का भी निर्यात किया जाना चाहिए। बंडारा ने बंदरों और मोरों के निर्यात का विरोध करने वालों को लेकर यह भी कहा था कि जो इसका विरोध कर रहे हैं उन्हें वानथविलुवा, अनमदुवा और अनुराधापुरा इलाकों में जाना चाहिए ताकि इन बंदरों और मोरों के कारण खेती को होने वाले नुकसान को देखा जा सके। 


बंदरों की बढ़ती आबादी को रोकने की कोशिश में लगा है श्रीलंका
दरअसल, जिन टोटे मकोका को चीन भेजे जाने की बात चल रही है, उन्हें श्रीलंका के कई हिस्सों में फसलों को नष्ट करने के लिए जाना जाता है। श्रीलंका में अधिकारियों ने देश में बंदरों की आबादी दो से तीन मिलियन के बीच आंकी है। विथनाज ने श्रीलंका सरकार से इस फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि मंत्री फैसले को वापस ले लेंगे। वह अपने दम पर जानवरों को दूसरे देशों में निर्यात करने का फैसला नहीं कर सकते, लेकिन स्थिति को सही ठहराते हुए वन्यजीव महानिदेशक द्वारा निर्णय लिया जा सकता है।

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