चीन को झटका: मदद की गुहार के बाद श्रीलंका का बड़ा फैसला, अपने जलक्षेत्र में विदेशी अनुसंधान पोतों पर लगाई रोक
Sri Lanka: श्रीलंका ने बुधवार को चीन को तगड़ा झटका देते हुए अपने जलक्षेत्र में विदेशी पोतों को अनुसंधान करने की अनुमति देने पर एक साल की रोक लगा दी है। वित्त मंत्री अली साबरी ने यह जानकारी दी है।
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श्रीलंका ने विदेशी पोतों को अपने जलक्षेत्र में अनुसंधान करने की अनुमति देने पर एक साल की रोक लगाने का फैसला किया है। द्वीप राष्ट्र के विदेश मंत्री अली साबरी ने बुधवार को यह बात कही। उन्होंने एक अखबार को बताया कि उनकी सरकार ने इस तरह का फैसला किया है और संबंधित देशों को इसकी जानकारी दे दी है।
खबर में कहा गया है कि यह फैसला चीन द्वारा अगले साल जनवरी में श्रीलंका के जलक्षेत्र में एक और अनुसंधान पोत को खड़ा करने की अनुमति मांगने के मद्देनजर लिया गया है। चीन अपने अनुसंधान/निगरानी पोतों को नियमित रूप से श्रीलंका भेजता है। इस साल अगस्त में चीन की नौसेना का युद्धपोत हाई यांग 24 हाओ दो दिवसीय यात्रा पर देश पहुंचा था।
भारत की आपत्ति के बावजूद चीनी सर्वेक्षण और अनुसंधान पोत 'शी यान 6' अक्तूबर में कोलंबो बंदरगाह पर रुका था और उसने हिंद महासागर के जल स्तंभ पर राष्ट्रीय जलीय संसाधन अनुसंधान और विकास एजेंसी (एनएआरए) के साथ अनुसंधान गतिविधियों को अंजाम दिया था।
पिछले साल अगस्त में चीनी बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज युआन वांग 5 हंबनटोटा बंदरगाह पर पहुंचा था, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। नई दिल्ली में इस बात की आशंका थी कि पोत की हाई-टेक ट्रैकिंग प्रणाली श्रीलंकाई बंदरगाह के रास्ते में भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों की जासूसी करने का प्रयास कर सकती है। हालांकि, श्रीलंका ने हंबनटोटा के रणनीतिक दक्षिणी बंदरगाह पर काफी देरी के बाद जहाज को डॉक करने की अनुमति दी। इस बंदरगाह को एक चीनी कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है।
साबरी ने कहा कि सरकार ने अगले साल जनवरी से किसी भी देश के अनुसंधान पोतों पर एक साल की रोक की घोषणा की है। उन्होंने कहा, 'हमें कुछ क्षमता विकास का काम करना है ताकि हम इस तरह की अनुसंधान गतिविधियों में समान साझेदार के रूप में भाग ले सकें।' अखबार डेली मिरर ने मंगलवार को कहा कि श्रीलंका में भी अगले साल चुनाव होने हैं। ऐसे में वह भू-राजनीतिक महत्व के मामलों से निपटने में किसी भी देश को नाराज किए बिना कार्रवाई करने की मांग कर रहा है।
साबरी ने कहा कि श्रीलंका ने देश में आने वाले विदेशी सैन्य जहाजों और विमानों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की है। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि एसओपी के तहत निर्धारित दिशा-निर्देश उन सभी देशों को भेजे गए हैं, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों के दौरान श्रीलंकाई जल क्षेत्र में अपने जहाजों को तैनात किया था।