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Sri lanka: चीनी पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट को तगड़ा झटका, हवाई साबित हो रहे हैं सपने

Tue, 07 Jun 2022 07:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Jun 2022 07:13 PM IST
सार

श्रीलंका में इस समय मुद्रास्फीति की दर रिकॉर्ड स्तर पर है। श्रीलंका सरकार ने गुजरे वर्षों में पोर्ट सिटी जैसी परियोजनाओं को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने के लिए ब्याज दरें निम्न स्तर पर रखीं। साथ ही बड़े पैमाने पर मुद्रा की छपाई की गई। उसका नतीजा महंगाई बढ़ने और श्रीलंकाई मुद्रा की कीमत में भारी गिरावट के रूप में सामने आया है...

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Sri lanka Crisis: port city project built with the help of China in Sri Lanka has suffered due to economic crisis
कोलंबो पोर्ट सिटी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

श्रीलंका में चीन की मदद से बने पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट को तगड़ा झटका लगा है। श्रीलंका की आर्थिक बदहाली का असर यहां के कारोबार पर साफ देखने को मिल रहा है। जानकारों के मताबिक इससे चीन की मदद से बनने वाली परियोजनाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।  

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पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट 1.4 बिलियन डॉलर की परियोजना है। इसके तहत समुद्र में शहर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड ने श्रीलंका सरकार के साथ मिल कर रही है। परियोजना पूरी होने पर समुद्री क्षेत्र में जो थल क्षेत्र निर्मित होगा, उससे होने वाली आमदनी का बंटवारा श्रीलंका सरकार और चीनी कंपनी के बीच होगा। इस परियोजना पर 1.2 बिलियन डॉलर की रकम अब तक खर्च हो चुकी है।

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ज्यादा मुद्रा छापना पड़ा महंगा

बीते 28 मई को श्रीलंका इकोनॉमिक्स एसोसिएशन ने एक चर्चा का आयोजन किया था। उस दौरान जो बातें सामने आईं, उससे चीनी परियोजना में आ रही दिक्कतों का अंदाजा मिला। अब छपी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक चर्चा में भाग लेते हुए कोलंबो हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी पोर्ट सिटी के सहायक प्रबंध निदेशक थुलसी अलुविहारे ने कहा- ‘पोर्ट सिटी की मार्केटिंग और उसकी बिक्री के लिए हमारे पास बेहतरीन योजना है। लेकिन आर्थिक स्थितियों के कारण इस वर्ष हमारे सामने चुनौतियां पेश आई हैं।’

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श्रीलंका में इस समय मुद्रास्फीति की दर रिकॉर्ड स्तर पर है। श्रीलंका सरकार ने गुजरे वर्षों में पोर्ट सिटी जैसी परियोजनाओं को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने के लिए ब्याज दरें निम्न स्तर पर रखीं। साथ ही बड़े पैमाने पर मुद्रा की छपाई की गई। उसका नतीजा महंगाई बढ़ने और श्रीलंकाई मुद्रा की कीमत में भारी गिरावट के रूप में सामने आया है। इस नीति का भी मौजूदा संकट खड़ा करने में एक बड़ा योगदान है। विश्लेषकों का कहना है कि सात साल तक अपनाई गई ऐसी नीति ने श्रीलंकाई मुद्रा को खोखला कर दिया।

फिलहाल श्रीलंका के विनिमय बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 366 रुपये के आसपास है। मौजूदा संकट शुरू होने के पहले एक डॉलर की कीमत तकरीबन 200 रुपये होती थी। आलोचकों का कहना है कि मुद्रा छपाई के मामले में सरकार अभी भी अनुशासित नहीं हुई है। वह मुद्रा छपाई जारी रखे हुए है। इस बीच देश में ऊर्जा और दवाओं सहित जरूरी चीजों का अभाव बढ़ता गया है।

दिखाए थे बड़े-बड़े सपने

पोर्ट सिटी श्रीलंका में चीन के सहयोग से बन रहा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इसके तहत ढाई लाख वर्ग मीटर इलाके में दफ्तर और खुदरा कारोबार के स्थल बनाए जा रहे हैं। इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर नाम से हो रहे इस निर्माण के बारे में बताया गया था कि 2022 के तीसरी तिमाही तक यह ब्रेक इवन (घाटा-मुनाफा की बराबरी) पर पहुंच जाएगा। अलुविहारे के मुताबिक इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के पहले चरण में 50 करोड़ डॉलर का कुल निवेश होना है।



बताया गया था कि इस परियोजना से 1,43,400 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। साथ ही इससे श्रीलंका की अर्थव्यवस्थआ में 24 बिलियन डॉलर का मूल्य जुड़ेगा। परियोजना चालू होने के बाद उसका श्रीलंका के जीडीपी में 13 बिलियन डॉलर का सालाना योगदान होगा। लेकिन अब जो सूरत है, उसके बीच ये बातें दिन में दिखाए गए सपने की तरह लग रही हैं।

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