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Hindi News ›   World ›   Sri Lanka caught on threats from China as it allows its tracking Ship to stand at Hambantota Port

Indian Ocean: श्रीलंका ने दी चीन के जासूसी पोत को ठहरने की इजाजत, क्या ड्रैगन की धमकियों में आ गया पड़ोसी?

Kirtivardhan Mishra कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 17 Aug 2022 04:27 PM IST
सार

बताया जाता है कि यह जहाज उन्नत तकनीक से लैस है। इसकी वजह से चीनी उपग्रह इसके जरिए आसपास की जासूसी कर सकते हैं। 

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Sri Lanka caught on threats from China as it allows its tracking Ship to stand at Hambantota Port
चीन - फोटो : Self

विस्तार

हफ्तों तक चले विवाद के बाद चीन का सर्वे जहाज युवान वांग-5 मंगलवार को श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर पहुंच गया। खबरों के मुताबिक भारत ने श्रीलंका से कहा था कि इस जहाज का हंबनटोटा आना भारत की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है, इसलिए वह उसे वहां ठहरने की इजाजत ना दे। भारत के कहने पर श्रीलंका ने चीन से जहाज का आगमन टालने को कहा था। लेकिन समझा जाता है कि इसके बाद चीन ने श्रीलंका को धमकी। दिवालिया हो चुका श्रीलंका चीन की धमकियों में आ गया।   
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बताया जाता है कि यह जहाज उन्नत तकनीक से लैस है। इसकी वजह से चीनी उपग्रह इसके जरिए आसपास की जासूसी कर सकते हैं। श्रीलंका ने 2017 में हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल की लीज पर चीन को दे दिया था। विश्लेषकों का कहना है कि इस कारण श्रीलंका के लिए चीन की जिद का सामना करना संभव नहीं हुआ। 
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कूटनीतिज्ञों के मुताबिक श्रीलंका के पास दो क्षेत्रीय बड़ी ताकतों के बीच संतुलन बनाने की एक मुश्किल चुनौती खड़ी दिखती है। श्रीलंका जिस आर्थिक संकट में है, उसके बीच वह भारत या चीन किसी की अनदेखी करने की स्थिति में नहीं है। श्रीलंका ने चीनी जहाज तो 11 अगस्त को हंबनटोटा आने की अनुमति थी। लेकिन संभवतः भारत के मना करने पर उसने ये अनुमति वापस ले ली। श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने नाम ना छापने की शर्त पर वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम को बताया कि श्रीलंका के इस फैसले से चीनी अधिकारी गुस्से से उबल पड़े। 
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एक अधिकारी ने इस वेबसाइट को बताया- ‘छह अगस्त को श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय ने छह अगस्त को और राय-मशविरे की जरूरत बताते हुए चीन से जहाज का आगमन टालने का अनुरोध किया। जैसे ही इस बारे में श्रीलंका में अधिसूचना जारी हुई, कोलंबो और बीजिंग में कई उच्चस्तरीय बैठकें शुरू हो गईं। इनमें चीन ने श्रीलंका के फैसले को अस्वीकार्य बताया। चीनी अधिकारी खास कर इसलिए गुस्से में थे कि श्रीलंका ने अनुमति देने के बाद उसे वापस ले लिया था।’

श्रीलंकाई अधिकारियों के मुताबिक बंद कमरों में हुई बैठकों के दौरान चीन ने श्रीलंका के इस कदम के संभावित परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि श्रीलंका पर मौजूद चीन के कर्ज को लौटाने का कार्यक्रम फिर से तय करने, चार बिलियन डॉलर की सहायता उसे देने, और मुक्त व्यापार समझौते को लेकर चीन के साथ चल रही उसकी बातचीत पर इस मामले का असर पड़ेगा। आठ अगस्त को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा- ‘कुछ देशों का तथाकथित सुरक्षा चिंताओं के आधार पर श्रीलंका पर दबाव डालना बिल्कुल अनुचित है।’ 13 अगस्त को श्रीलंका ने हथियार डाल दिए। उसने एलान कर दिया कि जहाज 16 अगस्त को हंबनटोटा आएगा। मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे यह वहां पहुंच गया। 


श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक ये जहाज अब अगले सोमवार तक हंबनटोटा बंदरगाह पर रहेगा। श्रीलंका ने कहा है कि वह इस मामले में उच्च कूटनीतिक स्तरों पर सभी संबंधित पक्षों के साथ संपर्क में है। कूटनीतिक विशेषज्ञों ने राय जताई है कि अगर आरंभ में ही श्रीलंका जहाज को आने की इजाजत नहीं देता, तो विवाद खड़ा नहीं होता। लेकिन इजाजत देने के बाद उसे वापस लेकर श्रीलंका ने अपनी कूटनीतिक दिक्कतें बढ़ा ली हैं।  
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