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South Korea: महाभियोग झेल रहे राष्ट्रपति येओल को एक और बड़ा झटका, अधिकारियों ने कोर्ट से मांगा गिरफ्तारी वारंट

Fri, 17 Jan 2025 03:09 PM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 17 Jan 2025 03:09 PM IST
सार

सुक येओल की ओर से तीन दिसंबर को मार्शल लॉ के एलान ने दक्षिण कोरियाई लोगों आश्चर्य में डाल दिया था। हालांकि, मार्शल लॉ केवल कुछ घंटे तक ही लागू रहा, लेकिन इसने देश की राजनीति, कूटनीति और वित्तीय बाजार में हलचल मचा दी थी।

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South Korean investigators request court warrant to formally arrest impeached president news in hindi
राष्ट्रपति यून सुक योल - फोटो : एएनआई

विस्तार

दक्षिण कोरिया के महाभियोग का सामना कर रहे राष्ट्रपति यून सुक येओल की लगातार मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने येओल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करने के लिए अदालत से वारंट का अनुरोध किया है। बता दें, इससे पहले अदालत ने राष्ट्रपति की रिहाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। उन्हें बुधवार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। उन पर पिछले महीने मार्शल लॉ लगाकर देश में विद्रोह कराने का आरोप है। 

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20 दिन बढ़ सकती है हिरासत
यून पर तीन दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करने के कारण बगावत का आरोप लग सकता है, जिससे देश में गंभीर राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। अगर यून को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाता है, तो जांचकर्ताओं को उनकी हिरासत 20 दिनों तक बढ़ाने का अधिकार होगा। इस दौरान मामले को अभियोजन के लिए भेजा जाएगा। 
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तीन दिसंबर को लगाया था मार्शल लॉ
सुक येओल की ओर से तीन दिसंबर को मार्शल लॉ के एलान ने दक्षिण कोरियाई लोगों आश्चर्य में डाल दिया था। इस घोषणा के बाद देशभर में आक्रोश देखने को मिला। हालांकि, मार्शल लॉ केवल कुछ घंटे तक ही लागू रहा, लेकिन इसने देश की राजनीति, कूटनीति और वित्तीय बाजार में हलचल मचा दी। इसके बाद एशिया के सबसे जीवंत लोकतंत्रों में से एक दक्षिण कोरिया ने अचानक से अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल का दौर देखा। इसके बाद 14 दिसंबर को सांसदों ने उन पर महाभियोग चलाने और उन्हें पद से हटाने के लिए मतदान किया।
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इसके बाद सियोल पश्चिमी जिला न्यायालय ने 31 दिसंबर को यून सुक येओल को हिरासत में लेने का वारंट जारी किया था, क्योंकि वह पूछताछ के लिए जांच अधिकारियों के समक्ष पेश नहीं हो रहे थे। जब जांच एजेंसी और पुलिस यून को गिरफ्तार करने पहुंची तो उनके समर्थक और राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा ने विरोध किया था। इस दौरान यून के वकीलों ने एक कानून का हवाला देते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी के पास विद्रोह के आरोपों की जांच करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।


सियोल केंद्रीय जिला अदालत ने खारिज की थी रिहाई की याचिका
वकीलों ने सियोल केंद्रीय जिला अदालत से आग्रह किया था कि वह सुक येओल की रिहाई पर विचार पर करे। इसके अलावा, सुक येओल के खिलफ जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट की वैधता को भी चुनौती दी गई थी। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद से वह हिरासत में हैं। 

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